उत्तराखंडऑफबीटजागरूकताप्रेरणामनोरंजनराष्ट्रीयशिक्षा

बच्चों ने सीखी कविता लेखन की बारीकियां, जानिए! कहां जो रहा ये आयोजन           

Children learned the nuances of poetry writing—find out where this event took place!

खबर को सुनें


बच्चों ने सीखी कविता लेखन की बारीकियां, जानिए! कहां जो रहा ये आयोजन

बच्चों को मौखिक व लिखित अभिव्यक्ति के लिए प्रेरित किया जाना इस कार्यशाला  का मुख्य उद्देश्य है। इस दौरान प्रत्येक बच्चे की एक हस्तलिखित पुस्तक तैयार की जाएगी। जबकि, बाल कवि सम्मेलन में बच्चे स्वरचित कविताओं का पाठ करेंगे। इसके साथ ही नुक्कड़ नाटक, समूह गीत, विज्ञान के खेल, औरेगैमी आदि विधाओं से भी बच्चों को जोड़ा जाएगा।

देहरादून, 14 अक्टूबर 2026: देहरादून में 23 से 25 अक्टूबर तक आयोजित होने वाले क्रिएटिव उत्तराखंड अभियान एवं किताब कौथिग के प्रथम चरण में बुधवार से पांच दिवसीय बालप्रहरी बाल लेखन कार्यशाला शुरू हो गई। अल्मोड़ा से प्रकाशित बच्चों की पत्रिका बालप्रहरी, भारत ज्ञान विज्ञान समिति व देहरादून किताब कौतिक आयोजन समिति के तत्वावधान में अजीम प्रेमजी फाउंडेशन के सहयोग से दून लाइबेरी देहरादून में आयोजित इस कार्यशाला में पहले दिन 35 बच्चों ने प्रतिभाग किया। कार्यशाला  का मुख्य उद्देश्य बच्चों को मौखिक व लिखित अभिव्यक्ति के लिए प्रेरित करना है।

लेखन कार्यशाला का शुभारंभ समूह गीत ‘ज्ञान का दीया जलाने’ से हुआ। इस मौके पर बतौर मुख्य अतिथि पूर्व अपर निदेशक शिक्षा एसपी सेमवाल ने कहा कि आज मोबाइल संस्कृति के दौर में बच्चे पुस्तकों से दूर होते जा रहे हैं। इसलिए एक जागरूक शिक्षक, साहित्यकार व अभिभावक होने के नाते सबसे पहले हमें ही पठन-पाठन की आदत विकसित करनी होगी। कहा कि बच्चे बहुत कुछ जानते हैं। उनकी प्रतिभा निखारने और उन्हें मौखिक व लिखित अभिव्यक्ति का अवसर देने के लिए गैर शैक्षणिक गतिविधियां मील का पत्थर साबित हो सकती हैं।

मुख्य प्रशिक्षक एवं बालप्रहरी के संपादक उदय किरौला ने कहा कि बालप्रहरी की ओर से अभी तक देश के 16 राज्यों में 350 से अधिक पांच दिनी कार्यशालाएं आयोजित की जा चुकी हैं। इस कार्यशाला में भी प्रत्येक बच्चे की एक हस्तलिखित पुस्तक तैयार की जाएगी। बाल कवि सम्मेलन में बच्चे स्वरचित कविताओं का पाठ करेंगे। साथ ही उन्हें नुक्कड़ नाटक, समूह गीत, विज्ञान के खेल, औरेगैमी आदि विधाओं से बच्चों को जोड़ा जाएगा।

क्रिएटिव उत्तराखंड अभियान एवं किताब कौथिग के मुख्य संयोजक  हेम पंत ने सभी का स्वागत करते कहा कि उत्तराखंड में जन सहयोग से 12 किताब कौथिग आयोजित हो चुके हैं। दून लाइबेरी में अगला किताब कौथिग 23 से 25 अक्टूबर तक होगा। यह बाल लेखन कार्यशाला भी किताब कौथिग का ही एक भाग है। किताब कौथिग में जहां देश-विदेश के प्रतिष्ठित साहित्यकारों की पुस्तकें होंगी, वहीं देहरादून के विभिन्न स्कूलों के बच्चों की ओर से तैयार हस्तलिखित पुस्तकों की प्रदर्शनी विशेष आकर्षण का केंद्र रहेंगी।

कार्यशाला के पहले दिन बच्चों को कविता की जानकारी देते हुए हरिद्वार के वरिष्ठ साहित्यकार  प्रकाश चंद्र पांडे ने कहा कि हमारे आंतरिक मन के विचार ही कविता हैं। कविता व कहानी लिखने से पहले हमें अपनी पाठ्य पुस्तक व दूसरे लेखकों की कविता व कहानियांं को पढ़ना भी जरूरी है। कविता सत्र में पहले बच्चों ने अपने पाठ्य पुस्तक की कविताएं सुनाई। उसके बाद बच्चों ने पूछा गया कि इन्हें कविता क्यों कहा जाता है। बच्चों ने अपनी भाषा में  बताया कि  कविता में तुक, लय, भाव, शीर्षक आदि का होना अनिवार्य है। इसके बाद बच्चों ने दिए हुए शब्दों के आधार पर कविता तैयार की। बाल साहित्यकार एवं शिक्षाविद् डां सुरेंदत्त सेमल्टी ने भी  कविता लेखन की जानकारी दी।

पहले दिन अध्यक्ष मंडल में  ईशिका, शालिनी, सरोज कुमार व साधना को शामिल किया गया। आज संपन्न नाम लेखन प्रतियोगिता, शब्द लेखन प्रतियोगिता, पहाड़े लिखो प्रतियोगिता, चित्रकला प्रतियोगिता में  सरोज कुमार, गायत्री कुमार, शालिनी थापला, अंशिका रावत, चंचला, नशरा प्रवीन आदि बच्चों को  सुरेंद्रदत सेमल्टी, श्याम पलट पांडेय आदि के सौजन्य से पुरस्कार स्वरूप बाल साहित्य दिया गया। बच्चों ने तोता कहता है, जैसा मैं कहूं, कितना बड़ा पहाड़, पिज्जा हट आदि खेलों में खूब मस्ती की।

इस अवसर पर भारत समिति विज्ञान समिति के प्रांतीय अध्यक्ष विजय भट्ट, कमलेश खंतवाल, डॉ चंद्रकला भंडारी, चंद्रशेखर तिवारी, डीके पांडेय, शालिनी मनी, कीर्ति गोयल, हेमलता तिवारी, कुसुम बर्त्वाल, अनीता चौहान, पद्मा जैन, जेबी गोयल, अनीता अंथवाल, योगेन्द्र नेगी, प्रीति थपलियाल, शिवराज, कीर्ति गोयल आदि उपस्थित थे।  संचालन अदिति देवलोकी ने किया। अंत में अजीम प्रेम जी फाउंडेशन की  चंद्रकला भंडारी ने सभी का आभार व्यक्त किया।

Global Ganga News

साथियों, Globalganga.com के मंच पर आपका स्वागत करते हुए हम स्वयं को गौरवान्वित महसूस कर रहे हैं। यह ऐसा मौका है, जब हम भी वेब पोर्टल की भीड़ में शामिल होने जा रहे हैं, इस संकल्प के साथ कि भीड़ का हिस्सा होते हुए भी हमेशा भीड़ से अलग दिखने का प्रयास करेंगे। हम चाहते हैं कि उत्तराखंड की संस्कृति एवं परंपराओं का देश-दुनिया में प्रसार हो, उत्तराखंड की बोली-भाषाएं समृद्ध हों और उन्हें स्वतंत्र पहचान मिले, यहां आध्यात्मिक पर्यटन एवं तीर्थाटन का विकास हो …और सबसे अहम बात यह कि इस सब में हमारी भी कुछ न कुछ भागीदारी अवश्य रहे। साथ ही एक विनम्र आग्रह भी है कि अपने कीमती सुझावों से समय-समय पर अवगत कराते रहें। ताकि सुधार की प्रक्रिया निरंतर गतिमान रहे। अंत में सिर्फ इतना ही कहना है कि हम एक-दूसरे पर भरोसा बनाये रखें। यही भरोसा समाज में संवाद की बुनियाद मजबूत करने का आधार बनेगा। इन्हीं शब्दों के साथ आइये! कामना करें कि- ‘सबके हृदय में सर्वदा संवेदना की दाह हो, हमको तुम्हारी चाह हो, तुमको हमारी चाह हो। -संपादक

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button