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लोग घरों से दूर पालें मुर्गियां, आबादी के पास नहीं फटकेंगे भालू

People should raise chickens away from their homes, so that the javelins will not come near the population.

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लोग घरों से दूर पालें मुर्गियां, आबादी के पास नहीं फटकेंगे भालू

 

ज्योतिर्मठ नगर क्षेत्र के गांधीनगर वार्ड में लोग भालुओं के आतंक से हैं त्रस्त, वन विभाग राहत दिलाने के बजाय दे रहा सलाह कि घरों के आसपास न करें मुर्गी पालन, इससे भालू हो रहे आकर्षित और लोगों पर भी कर रहे हैं हमला

देहरादून, 19 अगस्त 2026: चमोली जिले में ज्योतिर्मठ नगर क्षेत्र के गांधीनगर वार्ड में इन दिनों लोगों भालुओं के आतंक से परेशान हैं। भालू चौबीसों घंटे आबादी वाले क्षेत्र में धमक जा रहे हैं, जिससे लोगों का घरों से बाहर निकलना भी मुश्किल हो गया। हैरत देखिए कि ऐसे हालात में वन विभाग लोगों को सलाह दे रहा है कि मुर्गियां घरों से दूर पालें। इससे भालू भी आबादी से दूर रहेंगे। ऐसे में लोगों का आक्रोश स्वाभाविक है। हालांकि, वन विभाग अब सफाई देते फिर रहा है कि उसकी सलाह का गलत अर्थ निकाला गया।

भालुओं के आतंक से त्रस्त गांधीनगर वार्ड की महिलाओं ने बुधवार को वन विभाग कार्यालय पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई। उनका कहना था कि विभाग उन्हें घरों के आसपास मुर्गियां न पालने की सलाह दे रहा है। वह रोजगार के लिए मुर्गी पालन करते हैं, जाहिर है उनकी बेहतर देखभाल घरों के आसपास ही हो सकती है। वन विभाग की यह सलाह सोशल मीडिया पर भी खूब वायरल हो रही है। लोग इसे लेकर तीखी प्रतिक्रिया दे रहे हैं। उनका कहना है कि अब उन्हें अपनी रोजी-रोटी का फैसला भी वन विभाग के अधिकारियों से पूछकर करना पड़ेगा।

इस मामले में सफाई देते हुए नंदा देवी राष्ट्रीय पार्क के अधिकारी आशीष जिरमान ने स्पष्ट किया कि उनके बयान का गलत अर्थ निकाला गया है। उनका कहना था तो यह था कि घरों के के आसपास मुर्गियां पालने से भालू आसानी से आकर्षित हो रहे हैं और हमलों का खतरा बढ़ रहा है। असल में विभाग की ओर से मुर्गियों के नुकसान का कोई मुआवजा नहीं दिया जाता, इसलिए सुरक्षा की दृष्टि से मुर्गियों को रिहायशी इलाकों से दूर पालना बेहतर होगा। मुर्गी पालन पूरी तरह बंद करने जैसे उनके द्वारा नहीं कही गई।

इधन, गांधीनगर वार्ड की सभासद ललिता देवी और लक्ष्मी देवी ने आरोप लगाया कि वन विभाग भालुओं को भगाने में पूरी तरह नाकाम रहा है। ऐसे में उनकी दिनचर्या अस्त-व्यस्त हो गई है और बच्चों को स्कूल भेजने में भी डर लग रहा  है। यही स्थिति रही तो वह रोजी-रोटी के जतन भी नहीं कर पाएंगे।

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