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 भू-वैकुंठ में विराजे भगवान बदरी नारायण

Lord Badri Narayan resides in Bhu-Vaikuntha

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भू-वैकुंठ में विराजे भगवान बदरी नारायण

अखंड ज्योति के दर्शन के दर्शन को पहुंचे14 हजार से अधिक श्रद्धालुओं की मौजूदगी में खोले गए गुरुवार को  बदरीनाथ धाम के कपाट, इसी के साथ पूर्णता को प्राप्त हुई उत्तराखंड हिमालय की चारधाम यात्रा

देहरादून, 23 अप्रैल, 2026: आस्था एवं उल्लास के बीच भगवान बदरी नारायण गुरुवार को गर्भगृह स्थित बदरीश पंचायत में विराजमान हो गए। सेना के गढ़वाल
स्काउट बैंड की मधुर लहरियों के बीच देश-विदेश से पहुंचे 14 हजार से अधिक श्रद्धालुओं की मौजूदगी में 25 क्विंटल फूलों से सजे भू-वैकुंठ बदरीनाथ धाम के कपाट सुबह 6:15 बजे खोले गए। इसी के साथ उत्तराखंड हिमालय की चारधाम यात्रा ने पूर्णता प्राप्त कर ली। कपाट खुलने के बाद अखंड ज्योति के दर्शन को आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा।

धाम के कपाट खोलने की प्रक्रिया सुबह 4:30 बजे शुरू हुई और फिर भगवान के प्रतिनिधि उद्धवजी रावल निवास व देवताओं के खजांची कुबेरजी की उत्सव डोली बामणी गांव से मंदिर परिसर पहुंची। इसके बाद रावल अमरनाथ नंबूदरी ने भगवान बदरी विशाल को ओढ़ाये गए घृत कंबल के आवरण को हटाया और माता लक्ष्मी के विग्रह को गर्भगृह से बाहर लाकर परिक्रमा स्थल स्थित उनके मूल मंदिर में प्रतिष्ठित करने के साथ उद्धवजी व कुबेरजी के विग्रह को बदरीश पंचायत में विराजमान किया। ठीक 5:30 बजे द्वार पूजा शुरू हुई और फिर तय मुहूर्त पर मंदिर के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए।

कपाट खुलने के मौके पर सभी श्रद्धालुओं को घृत कंबल का प्रसाद वितरित किया गया। परंपरा के अनुसार पहले दिन शीतकाल के दौरान भगवान नारायण को ओढ़ाए गए घृत कंबल के रेशों को प्रसाद के रूप में बांटा जाता है। इस घृत कंबल को माणा गांव के भोटिया जनजाति के परिवारों की कुंवारी कन्याएं तैयार करती हैं, जिस पर पहाड़ी बदरी गाय के दूध से बने घी का लेपन किया जाता है।

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