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उत्तराखंड ने खनन से कमाया 800 करोड़ का राजस्व

Uttarakhand earned revenue of Rs 800 crore from mining

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उत्तराखंड ने खनन से कमाया 800 करोड़ का राजस्व

देहरादून, 17 अक्टूबर 2025 : खनन क्षेत्र में किए गए सुधारों ने उत्तराखंड को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाई है। भारत सरकार के खनन मंत्रालय द्वारा जारी “स्टेट माइनिंग रेडीनेस इंडेक्स (SMRI)” में उत्तराखंड को ‘सी’ कैटेगरी में पंजाब और त्रिपुरा के साथ अग्रणी स्थान प्राप्त हुआ है। यह उपलब्धि राज्य में पारदर्शी खनन व्यवस्था, पर्यावरण संरक्षण और तकनीकी दक्षता की दिशा में किए गए व्यापक सुधारों का परिणाम है।

केंद्रीय बजट 2025–26 में घोषित इस सूचकांक में राज्यों का मूल्यांकन नीति सुधार, पर्यावरणीय संतुलन, खनिज अन्वेषण क्षमता और प्रशासनिक दक्षता जैसे मापदंडों के आधार पर किया गया। खनन मंत्रालय ने कहा है कि यह सूचकांक राज्यों में सकारात्मक प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देने के साथ-साथ सतत खनन प्रथाओं को भी प्रोत्साहित करेगा।

मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि “खनन क्षेत्र में पारदर्शी, तकनीक-आधारित और उत्तरदायी प्रणाली विकसित कर हमने विकास और पर्यावरणीय संतुलन के बीच सामंजस्य स्थापित किया है। हमारी प्राथमिकता प्राकृतिक संसाधनों का दोहन नहीं, बल्कि उनका संवेदनशील प्रबंधन है।”

राज्य सरकार ने पिछले दो वर्षों में खनन क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण नवाचार किए हैं — ई-नीलामी प्रणाली को मजबूत किया गया, जिससे खनन पट्टों के आवंटन में पूर्ण पारदर्शिता सुनिश्चित हुई है। खनिज परिवहन के लिए ई-रवन्ना प्रणाली लागू कर राजस्व हानि पर प्रभावी रोक लगी है। सैटेलाइट आधारित निगरानी प्रणाली और डिजिटाइज्ड अनुमति प्रक्रिया ने अवैध खनन पर नियंत्रण को मजबूत किया है।

इन सुधारों का प्रत्यक्ष परिणाम यह रहा कि राज्य के खनन राजस्व में करीब 800 करोड़ रुपये की अप्रत्याशित बढ़ोतरी दर्ज की गई है। मुख्यमंत्री ने इस उपलब्धि के लिए खनन विभाग की टीम को बधाई देते हुए कहा कि यह सफलता उत्तराखंड सरकार के सशक्त शासन मॉडल और पारदर्शी नीतियों की झलक है।

हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर जैसे राज्यों के प्रतिनिधि भी उत्तराखंड के खनन मॉडल का अध्ययन कर इसे अपने राज्यों में लागू करने की दिशा में कदम बढ़ा रहे हैं। राज्य सरकार का लक्ष्य है कि आने वाले वर्षों में उत्तराखंड को खनन सुधारों, नवाचार और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में देश का आदर्श राज्य बनाया जाए।

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