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सोमवार को निज धाम में विराजमान होंगे बाबा रुद्रनाथ, छह माह यहीं देंगे अपने भक्तों को दर्शन

Baba Rudranath will be seated in his abode on Monday and will give darshan to his devotees here for six months

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सोमवार को निज धाम में विराजमान होंगे बाबा रुद्रनाथ, छह माह यहीं देंगे अपने भक्तों को दर्शन

रविवार को शीतकालीन प्रवास स्थल गोपेश्वर स्थित गोपीनाथ मंदिर से पनार बुग्याल पहुंची बाबा चतुर्थ केदार की उत्सव डोली, चमोली जिले में समुद्रतल से 11,808 फीट की ऊंचाई पर रुद्रनाथ गुफा में होते भगवान शिव के मुख दर्शन


देहरादून, 17 मई 2026: पंच केदार में चतुर्थ बाबा रुद्रनाथ की चल विग्रह उत्सव डोली रविवार को गोपेश्वर स्थित गोपीनाथ मंदिर से रुद्रनाथ धाम के लिए प्रस्थान कर अपने पहले पड़ाव पनार बुग्याल पहुंच गई। सोमवार दोपहर 12:45 बजे रुद्रनाथ धाम के कपाट खोले जाने हैं। इसके लिए रुद्रनाथ गुफा को पांच क्विंटल फूलों से सजाया गया है। वहीं, द्वितीय केदार बाबा मध्यमेश्वर को
शीतकालीन गद्दीस्थल ओंकारेश्वर मंदिर ऊखीमठ में नये अनाज (छाबड़ी) का भोग लगाया गया। धाम के कपाट 21 मई को खोले जाएंगे।

रविवार सुबह शीतकालीन गद्दीस्थल गोपीनाथ मंदिर में बाबा रुद्रनाथ के उत्सव विग्रह को पुजारी हरीश भट्ट ने भोग लगाया और फिर सेना के बैंड की मधुर लहरियों और बाबा की जय-जयकार के बीच उत्सव डोली ने चमोली जिले में समुद्रतल से 11,808 फीट की ऊंचाई पर स्थित रुद्रनाथ धाम के लिए प्रस्थान किया। डोली गंगोल व सगर गांव होते हुए शाम को पनार बुग्याल पहुंची। सोमवार सुबह डोली रुद्रनाथ धाम पहुंचेगी और फिर तय मुहूर्त में धाम के कपाट खोल दिए जाएंगे।


दुर्गम है रुद्रनाथ धाम की यात्रा

चतुर्थ केदार रुद्रनाथ धाम में शिव के मुख के दर्शन होते हैं। यहां बाबा गुफा में विराजमान हैं, जिसे मंदिर का स्वरूप दिया गया है। धाम में पहुंचने के लिए सगर व गंगोल गांव से 19 किमी की पैदल यात्रा करनी होती है। यात्रा मार्ग पर केदारनाथ वन्य जीव प्रभाग के बफर जोन से होकर गुजरता है। मार्ग में खूबसूरत बुग्यालों के साथ ही दुर्लभ जंगली जानवरों का दीदार भी होता है।

ओंकारेश्वर मंदिर के सभामंडप में विराजे बाबा मध्यमेश्वर

पंचकेदार में द्वितीय मध्यमेश्वर धाम के कपाट खोलने की प्रक्रिया भी रविवार को शुरू हो गई। सुबह आठ बजे केदारनाथ धाम के रावल भीमाशंकर लिंग की अगुआई में पुजारी व वेदपाठियों ने बाबा मध्यमेश्वर की पूजा-अर्चना की और फिर शीतकालीन प्रवास स्थल ओंकारेश्वर मंदिर के गर्भगृह से बाबा की भोग मूर्तियों को सभामंडप में लाया गया। प्रधान पुजारी बागेश लिंग व शिव लिंग ने भोग मूर्तियों की आरती उतारी और रावल भीमाशंकर लिंग ने प्रधान पुजारी शिव शंकर लिंग को पूजा का संकल्प दिलाया। इस अवसर स्थानीय महिलाओं ने उत्साह व उमंग के साथ बाबा को पूरी-पकौड़ी समेत नये अनाज (छाबड़ी) का भोग लगाया। 19 मई को बाबा की चल विग्रह उत्सव डोली शीतकालीन गद्दीस्थल से डंगवाड़ी, ब्राह्मणखोली, मंगोलचारी, सलामी, फापज, मनसूना, बुरुवा, राऊलैंक व उनियाणा होते हुए राकेश्वरी मंदिर रांसी, 20 मई को सीमांत गांव गौंडार पहुंचेगी और 21 मई को सुबह बनातोली, खटारा, नानौ, मैखम्भा, कूनचटटी होते हुए मध्यमेश्वर धाम पहुंचेगी। इसके बाद कर्क लग्न में धाम के कपाट खोल दिए जाएंगे।

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