अंतरराष्ट्रीयअध्यात्मउत्तराखंडऑफबीटचारधाम यात्रातीर्थाटनधर्म-परम्पराएंराष्ट्रीयसंस्कृति

शीतकालीन प्रवास के लिए मक्कूमठ रवाना हुए तृतीय केदार बाबा तुंगनाथ

Baba Tungnath, the third Kedar, has departed for Makkumath for his winter sojourn.

खबर को सुनें


शीतकालीन प्रवास के लिए मक्कूमठ रवाना हुए तृतीय केदार बाबा तुंगनाथ

दोपहर 12:30 बजे बंद किए गए तुंगनाथ धाम के कपाट, तीन पड़ावों से होकर शीतकालीन गद्दीस्थल मक्कूमठ स्थित मार्कंडेय मंदिर पहुुंचेगी बाबा की उत्सव डोली, आठ नवंबर को शीतकालीन गद्दी पर विराजमान होंगे बाबा तुंगनाथ

देहरादून, 06 नवंबर 2026: पंचकेदार में तृतीय एवं विश्व में सर्वाधिक ऊंचाई पर स्थित शिव मंदिर तुंगनाथ धाम के कपाट शुक्रवार को दोपहर 12:30 बजे शीतकाल के लिए बंद कर दिए गए। इसी के साथ बाबा की चल विग्रह उत्सव डोली शीतकालीन गद्दीस्थल मक्कूमठ स्थित मार्कंडेय मंदिर के लिए रवाना हो गई। आठ नवंबर को बाबा अगले छह माह के लिए शीतकालीन गद्दी पर विराजमान होंगे।

कपाट बंद होने के अवसर को यादगार बनाने के लिए मंदिर की फूलों से भव्य सजावट की गई थी। मंदिर के पुजारी वेदपाठी अभिषेक मैठाणी ने परंपराओं के
अनुसार पूजा-अर्चना एवं अनुष्ठान संपन्न कराए। कपाट बंद होने के बाद भगवान तुंगनाथ की उत्सव डोली ने मक्कूमठ के लिए प्रस्थान किया। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार डोली का प्रथम रात्रि प्रवास चोपता में होगा। सात नवंबर को डोली भनकुंड पहुंचेगी, जबकि आठ नवंबर को शीतकालीन गद्दीस्थल मार्कंडेय मंदिर में विराजमान होगी। इस मौके पर श्री बदरी-केदार मंदिर समिति के मुख्य कार्याधिकारी सोहन सिंह रांगड़, मठापति मुकेश मैठाणी, पूर्व मठापति रामप्रसाद मैठाणी, प्रबंधक प्रकाश पुरोहित सहित हक-हकूकधारी मौजूद रहे।

बता दें कि रुद्रप्रयाग जिले में समुद्रतल से 12073 फीट की ऊंचाई पर स्थित तुंगनाथ धाम में भगवान शिव की भुजाओं की पूजा होती है। यह धाम अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध है। इस सीजन एक लाख 93 हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने बाबा तुंगनाथ के दर्शन किए।

Global Ganga News

साथियों, Globalganga.com के मंच पर आपका स्वागत करते हुए हम स्वयं को गौरवान्वित महसूस कर रहे हैं। यह ऐसा मौका है, जब हम भी वेब पोर्टल की भीड़ में शामिल होने जा रहे हैं, इस संकल्प के साथ कि भीड़ का हिस्सा होते हुए भी हमेशा भीड़ से अलग दिखने का प्रयास करेंगे। हम चाहते हैं कि उत्तराखंड की संस्कृति एवं परंपराओं का देश-दुनिया में प्रसार हो, उत्तराखंड की बोली-भाषाएं समृद्ध हों और उन्हें स्वतंत्र पहचान मिले, यहां आध्यात्मिक पर्यटन एवं तीर्थाटन का विकास हो …और सबसे अहम बात यह कि इस सब में हमारी भी कुछ न कुछ भागीदारी अवश्य रहे। साथ ही एक विनम्र आग्रह भी है कि अपने कीमती सुझावों से समय-समय पर अवगत कराते रहें। ताकि सुधार की प्रक्रिया निरंतर गतिमान रहे। अंत में सिर्फ इतना ही कहना है कि हम एक-दूसरे पर भरोसा बनाये रखें। यही भरोसा समाज में संवाद की बुनियाद मजबूत करने का आधार बनेगा। इन्हीं शब्दों के साथ आइये! कामना करें कि- ‘सबके हृदय में सर्वदा संवेदना की दाह हो, हमको तुम्हारी चाह हो, तुमको हमारी चाह हो। -संपादक

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button