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साहित्यकार इन्द्र सिंह बिष्ट के कहानी-संग्रह ‘आंचल में आंसू’ का लोकार्पण

Launch of author Indra Singh Bisht’s short story collection ‘Aanchal Mein Aansoo’

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साहित्यकार इन्द्र सिंह बिष्ट के कहानी-संग्रह ‘आंचल में आंसू’ का लोकार्पण

इन्द्र सिंह बिष्ट ‘प्रताप’ का जन्म 12 जनवरी 1955 को टिहरी गढ़वाल के जड़धार गांव में हुआ। उन्होंने हिन्दी में एमए किया और ग्रामीण विकास विभाग से लेखाकार के पद से सेवानिवृत्त हुए। आकाशवाणी नजीबाबाद और आकाशवाणी देहरादून से उनकी हिन्दी एवं गढ़वाली कहानियां और कविताएं प्रसारित हुई हैं। अनेक पत्र-पत्रिकाओं में उनकी कहानियां, कविताएं एवं लेख प्रकाशित होते रहे हैं। वे हिन्दी तथा गढ़वाली दोनों भाषाओं में लेखन करते रहे हैं।

देहरादून, 21 सितंबर 2026: वरिष्ठ साहित्यकार एवं कथाकार इन्द्र सिंह बिष्ट ‘प्रताप’ के हिन्दी कहानी-संग्रह ‘आंचल में आंसू’ का सोमवार को दून पुस्तकालय एवं शोध केन्द्र में लोकार्पण किया गया। इस मौके पर साहित्यिक संवाद भी हुआ, जिसमें साहित्य प्रेमियों ने लेखक से उनकी रचनात्मक यात्रा, कहानी लेखन और पुस्तक की विषयवस्तु से जुड़े प्रश्न किए।

कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार एवं समाजसेवी सोमवारी लाल उनियाल ‘प्रदीप’ ने की। मुख्य अतिथि के रूप में वरिष्ठ कथाकार डॉ. जितेन ठाकुर उपस्थित रहे। विशिष्ट अतिथि साहित्यकार मुकेश नौटियाल रहे। कार्यक्रम में साहित्यकार एवं शिक्षाविद् राजेन्द्र निर्मल, वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. हर्षमणि भट्ट, वरिष्ठ पत्रकार शीशपाल गुसाईं ने पुस्तक और लेखक के रचनात्मक अवदान पर विचार व्यक्त किए। संचालन साहित्यकार डॉ. अवनीश उनियाल ने किया। मंचासीन वक्ताओं ने कहा कि इन्द्र सिंह बिष्ट ‘प्रताप’ की कहानियों में पहाड़ के सामाजिक जीवन, पारिवारिक संबंधों, स्त्री जीवन की पीड़ा, बदलते सामाजिक मूल्यों, अंधविश्वास, मिथक, परम्परा, अध्यात्म, विज्ञान और ग्रामीण जीवन की अनेक परतों को देखा जा सकता है। संग्रह की कहानियां केवल घटनाओं का विवरण प्रस्तुत नहीं करतीं, बल्कि उनके माध्यम से सामाजिक और मानवीय प्रश्नों को उठाया गया है। भाषा की सहजता और कथ्य की संवेदनशीलता इन कहानियों को पाठक के निकट ले जाती है।

वक्ताओं ने संग्रह की चर्चित कहानी ‘आंचल में आंसू’ का विशेष उल्लेख करते हुए यह भी कहा कि इसमें नारी जीवन की पीड़ा और संवेदना को प्रभावशाली ढंग से अभिव्यक्त किया गया है। संग्रह की अन्य कहानियों में भी सामाजिक जीवन के विविध अनुभवों, पारिवारिक संबंधों और बदलते समय की चुनौतियों का चित्रण दिखाई देता है। कहानीकार ने अपने दीर्घ सामाजिक अनुभवों को कथा के माध्यम से अभिव्यक्त किया है, इसलिए उनकी रचनाओं में जीवन के निकट का यथार्थ दिखाई देता है। कथाकार प्रताप के साहित्यिक योगदान का उल्लेख करते हुए वक्ताओं ने यह भी कहा कि ‘आंचल में आंसू’ जैसे कहानी-संग्रह समाज के उन अनुभवों और संवेदनाओं को सामने लाते हैं, जिन्हें सामान्यतः जीवन की भागदौड़ में अनदेखा कर दिया जाता है।

अध्यक्षता करते हुए वरिष्ठ साहित्यकार सोमवारी लाल उनियाल ‘प्रदीप’ ने लेखक से अपने पुराने साहित्यिक-सामाजिक संबंधों को स्मरण करते हुए उनके लेखकीय विकास की चर्चा की है। उन्होंने बताया कि इन्द्र सिंह बिष्ट ने वर्ष 1970 में ‘उत्तरांचल’ साप्ताहिक के प्रकाशन से साहित्यिक गतिविधियों को आगे बढ़ाया और उसके साहित्य-कला-संस्कृति मंच के माध्यम से विभिन्न विधाओं के लेखकों एवं कवियों को जोड़ने का प्रयास किया। का कि बिष्ट की रचनात्मक यात्रा में साहित्य के साथ सामाजिक सरोकार लगातार जुड़ते रहे।

कार्यक्रम में उपस्थित लोगों ने पुस्तक को उत्तराखण्ड के सामाजिक जीवन और मानवीय संवेदनाओं को समझने की दृष्टि से महत्वपूर्ण बताया। साहित्यकारों ने कहा कि डिजिटल माध्यमों के बढ़ते प्रभाव के दौर में इस प्रकार के साहित्यिक आयोजन पाठकों और पुस्तकों के बीच जीवंत संबंध बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। दून पुस्तकालय एवं शोध केन्द्र के कार्यक्रम अधिकारी चंद्रशेखर तिवारी, भारती पाण्डे, सुंदर सिंह बिष्ट, कल्पना बहुगुणा, देवेन्द्र कांडपाल, डॉ. वीके डोभाल, जगदीश बाबला सहित साहित्यकार, लेखक, शोधार्थी, साहित्य प्रेमी, पाठकजन एवं अन्य प्रबुद्धजन कार्यक्रम के साक्षी बने।

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