हेमकुंड व फूलों की घाटी पैदल मार्ग से निकला 2104 क्विंटल प्लास्टिक कचरा
2,104 quintals of plastic waste removed from the trekking route to Hemkund and the Valley of Flowers.

हेमकुंड व फूलों की घाटी पैदल मार्ग से निकला 2104 क्विंटल प्लास्टिक कचरा
14 सितंबर तक 3.27 लाख श्रद्धालु हेमकुंड साहिब और 29 हजार से अधिक पर्यटक फूलों की घाटी पहुंचे, 26,300 बैगाें में भरकर एकत्र किए गए प्लास्टिक कचरे को नीचे लाए पर्यावरण मित्र
देहरादून, 16 सितंबर 2026 : इस वर्ष उत्तराखंड के चमोली जिले में स्थित हेमकुंड साहिब (15,225 फीट) और विश्व धरोहर फूलों की घाटी (12,995 फीट) रिकार्ड संख्या में श्रद्धालु व पर्यटक पहुंच रहे हैं। अब तक 3.27 लाख श्रद्धालु हेमकुंड साहिब में मत्था टेकने और 29 हजार पर्यटक फूलों की घाटी की सैर को पहुंच चुके हैं, जिन्होंने पैदल मार्गों पर जमकर गंदगी भी फैलाई। भ्यूंडार-पुलना के ग्रामीणों की ईको विकास समिति दोनों मार्गों से अब 2,104 क्विंटल कचरा एकत्र कर चुकी है, जिसे 26,300 बैगों में भरकर नीचे लाया गया।
हेमकुंड साहिब व लोकपाल लक्ष्मण मंदिर जाने के लिए पुलना से 16 किमी और फूलों की घाटी के लिए 14 किमी की दूरी पैदल तय करनी पड़ती है। घांघरिया हेमकुंड साहिब व घाटी का बेस कैंप है। इस मार्ग पर ईको विकास समिति 23 मई को हेमकुंड साहिब के कपाट खुलने के बाद से अब तक 22,300 बैग प्लास्टिक बोतल व अन्य प्लास्टिक सामग्री और 4,000 बैग प्लास्टिक रैपर, रेनकोट आदि एकत्र कर चुकी है। नंदा देवी राष्ट्रीय पार्क क्षेत्र में आने वाले भ्यूंडार-पुलना के ग्रामीणों की ईको विकास समिति रोजाना भ्यूंडार घाटी और लोकपाल-हेमकुंड साहिब क्षेत्र से प्लास्टिक की बोतलें, कचरा और अन्य अपशिष्ट एकत्रित कर उसे सुरक्षित रूप से नीचे लाकर रीसाइक्लिंग के लिए भेजने का कार्य कर रही है।
समिति के अध्यक्ष प्रवेंद्र सिंह चौहान ने बताया कि समिति हेमकुंड व फूलों की घाटी मार्ग से एकत्र कचरे को बेचकर आय भी अर्जित करती है। कचरा एकत्र करने के लिए पैदल मार्ग पर 60 पर्यावरण मित्र तैनात रहते हैं। यात्रा मार्ग को पांच जोन में बांटा गया है। यहां नियमित सफाई, कचरा संग्रहण और अपशिष्ट प्रबंधन का कार्य किया जा रहा है। कार्य की गुणवत्ता और नियमित निगरानी के लिए सफाई सुपरवाइजर और सफाई नायकों की व्यवस्था की गई है। लोकपाल-हेमकुंड साहिब और फूलों की घाटी का क्षेत्र ऊंचाई वाला, दुर्गम और संवेदनशील हिमालयी क्षेत्र है। यहां कचरे के परिवहन में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।



