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उत्तराखंड को आत्मनिर्भर बना सकता है मत्स्य पालन

Fisheries can make Uttarakhand self-reliant

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उत्तराखंड को आत्मनिर्भर बना सकता है मत्स्य पालन

– उत्तराखंड से ओडिशा भ्रमण पर आए मीडिया दल ने केंद्रीय मीठा जल मत्स्य पालन संस्थान भुवनेश्वर का किया भ्रमण

– इस दौरे का एक महत्वपूर्ण पहलू रहा उत्तराखंड और ओडिशा के मत्स्य पालन माडल का तुलनात्मक अध्ययन

भुवनेश्वर, 26 मार्च 2026: उत्तराखंड से ओडिशा भ्रमण पर आए 15 सदस्यीय मीडिया अध्ययन दल ने बुधवार को भुवनेश्वर स्थित केंद्रीय मीठा जल मत्स्य पालन संस्थान (सीआईएफए) पहुंचकर आधुनिक मत्स्य पालन पद्धतियों का बारीकी से अवलोकन किया। इस दौरे का एक महत्वपूर्ण पहलू उत्तराखंड और ओडिशा के मत्स्य पालन माडल का तुलनात्मक अध्ययन भी रहा। जहां ओडिशा में बड़े पैमाने पर गर्म पानी आधारित मत्स्य पालन किया जाता है, वहीं उत्तराखंड में ठंडे पानी की उच्च मूल्य वाली मछलियों, विशेषकर ट्राउट के माध्यम से गुणवत्ता आधारित मत्स्य पालन तेजी से विकसित हो रहा है। निश्चित रूप से मत्स्य पालन उत्तराखंड को पूरी तरह आत्मनिर्भर बना सकता है।

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के संयोग से पीआईबी देहरादून के असिस्टेंट डायरेक्टर संजीव सुन्द्रियाल के नेतृत्व में आये दल को सीफा के निदेशक डॉ. प्रमोद कुमार साहू ने बताया कि संस्थान देश में ताजे पानी की मत्स्य पालन तकनीकों के विकास का प्रमुख केंद्र है। संस्थान की ओर से विकसित तकनीकें कम लागत में अधिक उत्पादन देने में सक्षम हैं और इन्हें उत्तराखंड समेत देश के विभिन्न भौगोलिक क्षेत्रों में अपनाया जा सकता है। बताया कि किस प्रकार नियंत्रित पानी में बेहतर गुणवत्ता वाली मछलियों का पालन कर अधिक उत्पादन लिया जा रहा है।

एक्वाकल्चर प्रोडक्शन एंड एनवायरनमेंट के विज्ञानी डॉ. प्रताप चंद्र दास ने चीतल मछली के बारे में बताया कि यह मछली अत्यंत स्वादिष्ट होती है और स्थानीय बाजार में इसकी कीमत लगभग 1,600 रुपये प्रति किलोग्राम तक रहती है। यह मछली आमतौर पर चार से पांच किलोग्राम तक की होती है और इसमें कांटे अधिक होते हैं, फिर भी ओडिशा में यह सबसे ज्यादा पसंद की जाती है। ।

फिश न्यूट्रीशन विशेषज्ञ शिव शंकर गिरी ने बताया कि संतुलित आहार और वैज्ञानिक प्रबंधन से मछलियों की गुणवत्ता, स्वाद और उत्पादन तीनों को बेहतर बनाया जा सकता है। बताया कि सीफा की ओर से विकसित न्यूट्रीशन माडल किसानों के लिए बेहद उपयोगी साबित हो रहे हैं। विज्ञानियों ने यह भी स्पष्ट किया कि देश में ‘ब्लू इकोनामी’ के क्षेत्र में अपार संभावनाएं हैं। सीफा जैसे संस्थान इस दिशा में देश को आत्मनिर्भर और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

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