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हेमकुंड साहिब की यात्रा ने रचा इतिहास, पहली बार 93 दिन में 2.78 लाख यात्रियों ने किए दर्शन

Hemkund Sahib Yatra created history, for the first time 2.78 lakh pilgrims visited in 93 days.

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हेमकुंड साहिब की यात्रा ने रचा इतिहास, पहली बार 93 दिन में 2.78 लाख यात्रियों ने किए दर्शन

पहली बार वर्ष 2025 में पहुंचे थे सर्वाधिक यात्री, पूरे सीजन में दो लाख 74 हजार 441 ने किए थे दर्शन, इस बार यात्रियों का आंकड़ा पहुंच सकता है चार लाख के पार, अभी कपाट बंद होने में बचा है डेढ़ माह का समय

देहरादून, 25 अगस्त 2026: इस वर्ष रिकार्ड यात्री हेमकुंड साहिब और लोकपाल लक्ष्मण मंदिर पहुंच रहे हैं। अब तक दो लाख 78 हजार 345 यात्री हेमकुंड साहिब में मत्था टेक चुके हैं, जो कि हेमकुंड यात्रा के इतिहास में यात्रियों की सबसे बड़ी संख्या है। वर्ष 2025 में दो लाख 74 हजार 441 यात्री पूरे सीजन में हेमकुंड साहिब पहुंचे थे।

चमोली जिले की भ्यूंडार घाटी में समुद्रतल से 15225 फीट की ऊंचाई पर स्थित हेमकुंड साहिब और लोकपाल लक्ष्मण मंदिर की यात्रा बेहद दुर्गम मानी जाती है। यहां पहुंचने के लिए पुलना से 16 किमी की दूरी पैदल तय करनी पड़ती है। अमूमन मानसून सीजन के दौरान यात्रियों की संख्या में भारी गिरावट आ जाती है, लेकिन इस बार लगातार वर्षा के बावजूद एक हजार से अधिक यात्री प्रतिदिन हेमकुंड साहिब पहुंच रहे हैं। यात्रा मार्ग के साथ ही बेस कैंप में गुरुद्वारा श्री हेमकुंड साहिब मैनेजमेंट ट्रस्ट की ओर से लंगर की व्यवस्था की गई है। इसके अलावा पैदल मार्ग पर जगह-जगह होटल ढाबे भी हैं। इससे यात्रियों को किसी तरह की परेशानी नहीं झेलनी पड़ रही।


गुरुद्वारा श्री हेमकुंड साहिब मैनेजमेंट ट्रस्ट के सीईओ सरदार सेवा सिंह ने बताया कि श्रद्धालुओं के लिए हेमकुंड साहिब, बेस कैंप घांघरिया व गोविंदघाट में चौबीसों घंटे लंगर व ठहरने की व्यवस्था है। इसके अलावा यात्रियों के लिए घोड़ा-खच्चर व डंडी-कंडी की सुविधा भी उपलब्ध है। बता दें कि हेमकुंड साहिब के कपाट इस बार 23 मई, जबकि लोकपाल लक्ष्मण मंदिर के 22 मई को खोले गए थे और परंपरा के अनुसार आगामी 10 अक्टूबर को दोनों धाम के कपाट बंद किए जाएंगे।

पैदल मार्ग पर रंग-बिरंगे फूल बने आकर्षण का केंद्र

इन दिनों घांघरिया से लेकर हेमकुंड साहिब तक छह किमी क्षेत्र में ब्रह्मकमल, फेनकमल व ब्लू पापी समेत विभिन्न प्रजाति के रंग-बिरंगे हिमालयी फूल खिले हुए हैं, जो अपनी मनोहारी आभा से श्रद्धालुओं को खासे आकर्षित कर रहे हैं। घटाओं के बीच धाम की प्राकृतिक सुंदरता भी मन को मोह लेने वाली है। यात्रियों का कहना कि इस मौसम में यात्रा को लेकर संशय था, लेकिन पैदल मार्ग पर जिस तरह की सुविधाएं हैं, उनसे उन्हें कोई दिक्कत नहीं आ रही।

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