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सुबह पांच से दस बजे तक ही हेमकुंड साहिब जा सकेंगे यात्री, विश्व का सबसे ऊंचा गुरुद्वारा है यह

Pilgrims can visit Hemkund Sahib only between 5 am and 10 am, it is the world's highest gurdwara

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सुबह पांच से दस बजे तक ही हेमकुंड साहिब जा सकेंगे यात्री, विश्व का सबसे ऊंचा गुरुद्वारा है यह

सुबह पांच से दोपहर दो बजे तक ही दी जाएगी गोविंदघाट से हेमकुंड साहिब के बेस कैंप घांघरिया तक जाने की अनुमति, दोपहर दो बजे बाद यात्रियों को हेमकुंड साहिब में रुकने की अनुमति नहीं, गोविंदघाट से पुलना तक तीन किमी हिस्से में होगा शटल सेवा का संचालन, 16 किमी ही तय करनी पड़ेगी यात्रियों को पैदल दूरी

देहरादून, 10 मई 2026: विश्व के सबसे ऊंचे गुरुद्वारा हेमकुंड साहिब यात्रा के लिए रूट चार्ट जारी कर दिया गया है। यात्री सुबह पांच से दोपहर दो बजे तक ही गोविंदघाट से हेमकुंड साहिब के बेस कैंप घांघरिया जा सकेंगे। घांघरिया से हेमकुंड साहिब जाने की अनुमति सुबह पांच से दस बजे तक ही होगी। गोविंदघाट से तीन किमी आगे पुलना तक यात्री शटल सेवा से पहुंचेंगे और यहां उनके पंजीकरण की जांच होगी। चमोली जिले में स्थित गुरुद्वारा हेमकुंड साहिब के कपाट 23 मई और लोकपाल लक्ष्मण मंदिर के कपाट 22 मई को खोले जाने हैं।

गुरुद्वारा श्री हेमकुंड साहिब मैनेजमेंट ट्रस्ट के सीईओ सरदार सेवा सिंह ने बताया कि रूट चार्ट के अनुसार यात्रियों को दोपहर दो बजे तक हर हाल में हेमकुंड साहिब से घांघरिया के लिए वापसी करनी होगी। बताया कि हेमकुंड साहिब में इन दिनों बर्फबारी हो रही है, जिससे यात्रा तैयारियों में व्यवधान आ रहा है। हेमकुंड यात्रा की रीढ़ मानी जाने वाली लंगर सेवा शुरू करने के लिए लंगर हाल की सफाई के साथ प्रवेश द्वार और गुरुद्वारे के मुख्य द्वार से भी बर्फ हटा दी गई है। अब लोकपाल लक्ष्मण मंदिर के आसपास से बर्फ हटाने का कार्य चल रहा है। हेमकुंड साहिब जाने वाले पुराने सीढ़ मार्ग को सुचारु कर दिया गया है। छह फीट चौड़े घोड़ा-खच्चर मार्ग से बर्फ हटाने का कार्य भी जल्द शुरू होगा। बताया कि धाम में बर्फ हटाने के कार्य में लगे सेना के अधिकारियों से बैठक कर 20 मई तक पैदल मार्ग की सफाई समेत अन्य प्रमुख कार्य पूरे करने का लक्ष्य रखा गया है। सेना के जवान व सेवादार मौसम साफ होते ही बर्फ हटाने के कार्य में जुट जा रहे हैं।

तीन किमी घटी हेमकुंड साहिब की पैदल दूरी

शटल सेवा के संचालन से हेमकुंड साहिब गुरुद्वारा जाने के लिए यात्रियों को सिर्फ 16 किमी की दूरी तय करनी पड़ेगी। पहले यात्री गोविंदघाट से हेमकुंड पहुंचने के लिए 19 किमी की दूरी पैदल तय करते थे, लेकिन गोविंदघाट से पुलना तक सड़क बन जाने के कारण यह दूरी तीन किमी घट गई है। पुलना में पार्किंग की व्यवस्था नहीं है, इसलिए गोविंदघाट से पुलना के बीच शटल सेवा शुरू की गई है।

हेली यात्रियों के लिए सिर्फ छह किमी की पैदल दूरी पर है हेमकुंड साहिब

हेली सेवा से हेमकुंड साहिब जाने वाले यात्रियों को सिर्फ छह किमी की दूरी पैदल तय करनी पड़ेगी। हेमकुंड जाने के लिए गोविंदघाट से बेस कैम्प घांघरिया तक हेली सेवा उपलब्ध है। यहां से हेमकुंड की पैदल दूरी महज छह किमी है।

एसडीआरएफ व एटीएस के साथ पुलिस टीम तैनात

समुद्रतल से 15,225 फीट की ऊंचाई पर स्थित हेमकुंड साहिब की यात्रा बेहद दुर्गम मानी जाती है। इस रूट पर 19 किमी पैदल चलना पड़ता है। पैदल मार्ग पर घांघरिया से लेकर हेमकुंड तक यात्रियों की मदद के लिए एसडीआरएफ व एटीएस की टीम तैनात रहेगी। इसके अलावा अटलाकोटी ग्लेशियर में एसडीआरएफ की देखरेख में यात्रियों की आवाजाही कराई जाएगी। पुलिस, होमगार्ड व पीआरडी के जवान भी जगह-जगह गश्त करेंगे। थानाध्यक्ष चित्रगुप्त ने बताया कि हेमकुंड तक व्यवस्थाओं को लेकर निरीक्षण किया गया है। पुलिस यात्रियों की सेवा व सुरक्षा के लिए तत्पर है।

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