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बाबा मध्यमेश्वर के आंगन में यात्रियों को खुले आसमान के नीचे गुजारनी पड़ रही रात

Pilgrims are forced to spend the night under the open sky in the courtyard of Baba Madhyameshwar

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बाबा मध्यमेश्वर के आंगन में यात्रियों को खुले आसमान के नीचे गुजारनी पड़ रही रात

 

मध्यमेश्वर धाम में है सिर्फ 200 यात्रियों के खाने-ठहरने की व्यवस्था, पहुंच रहे हैं रोजाना एक हजार से अधिक यात्री, ठंड लगने से बीमार पड़ जा रहे कई यात्री, सुगम एवं सरल चारधाम यात्रा का दावा करने वालों का नहीं है इस ओर ध्यान

देहरादून, 26 मई 2026: द्वितीय केदार मध्यमेश्वर धाम में इन दिनों श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही है। 21 मई को कपाट खुलने वाले दिन से ही एक हजार से अधिक यात्री रोजाना बाबा के दर्शन को पहुंच रहे हैं। लेकिन, खाने-ठहरने की सीमित सुविधाओं के चलते यात्रियों को भारी दिक्कतें झेलनी पड़ रही हैं। यहां तक कि उन्हें रात भी खुले आसमान के नीचे गुजारनी पड़ रही है। जबकि, धाम में जबर्दस्त ठंड है, जिससे कई यात्री बीमार भी पड़ जा रहे हैं। बीते दिनों हुई दो यात्रियों की मौत के पीछे भी ठंड के कारण तबीयत बिगड़ने और समय पर उपचार न मिल पाने को ही मुख्य वजह बताया जा रहा है।

मध्यमेश्वर धाम में सिर्फ 200 यात्रियों के रहने -खाने की व्यवस्था है, जबकि इन दिनों बाबा के दर्शन को एक हजार से अधिक यात्री प्रतिदिन यहां पहुंच रहे हैं। दरअसल, मध्यमेश्वर धाम प्रतिबंधित वन क्षेत्र यानी केदारनाथ वन्य जीव प्रभाग के अंतर्गत आता है, जिसके चलते यहां स्थायी निर्माण कार्य नहीं हो पाए हैं। मूलभूत सुविधाओं के अभाव के पीछे भी यही प्रमुख वजह है। धाम की यात्रा बेहद चुनौतीपूर्ण है और यहां पहुंचने के लिए गौंडार गांव से 16 किमी का सफर पैदल तय करना पड़ता है। यह मार्ग घने जंगल के बीच से होकर गुजरता है और बीच मे कहीं रुकने की भी व्यवस्था नहीं है।

नहीं सुनी जा रही यात्री सुविधाएं विकसित करने की बात

स्थानीय निवासियों की ओर से धाम के आसपास केदारनाथ धाम की तरह गढ़वाल मंडल विकास निगम या किसी अन्य संस्था के माध्यम से खाने-ठहरने की अस्थायी व्यवस्था करवाये जाने की वर्षों से मांग उठती रही है। लेकिन इस ओर कभी किसी ने ध्यान नहीं दिया। हैरानी वाली बात देखिये कि यात्रा मार्ग में सुधार के लिए भी आज तक कोई ठोस प्रयास नहीं हुए। नतीजा, इसका खामियाजा, देश-दुनिया से आने वाले यात्रियों को भुगतना पड़ रहा है।

नीति-नियंताओं की समझ में आती यह बात तो क्षेत्र की आर्थिकी होती मजबूत

स्थानीय लोगों के अनुसार मध्यमेश्वर धाम में ठंड और खुले आसमान के नीचे रात गुजारने के कारण हाइपोथर्मिया व हृदयाघात जैसी घटनाओं का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए जरूरी है की धाम और पैदल मार्ग पर यात्री सुविधाओं का विकास हो। इससे यात्रियों को तो सुविधा होगी ही, क्षेत्र की आर्थिकी को भी मजबूती मिलेगी। पर्यटन विकास में भी यह कदम मील का पत्थर साबित होगा। काश! ये बात उत्तराखंड के नीति-नियंताओं की समझ में आ पाती।

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