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एक दिन में सिर्फ 200 श्रद्धालु ही जा सकेंगे रुद्रनाथ धाम

Only 200 devotees will be able to visit Rudranath Dham in a day

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एक दिन में सिर्फ 200 श्रद्धालु ही जा सकेंगे रुद्रनाथ धाम

चतुर्थ केदार के कपाट खुलने के बाद से बड़ी संख्या में दर्शन को पहुंच रहे श्रद्धालु, बढ़ती भीड़ से रुद्रनाथ धाम क्षेत्र में चरमरा रहीं खाने-रहने की व्यवस्थाएं, इसे देखते हुए यात्रियों को दोपहर दो बजे के बाद नहीं जाने दिया जाएगा रुद्रनाथ धाम

देहरादून, 21 मई 2026: चतुर्थ केदार रुद्रनाथ धाम के कपाट खुलने के बाद बड़ी संख्या में श्रद्धालु बाबा के दर्शन को पहुंच रहे हैं। लगातार बढ़ रही भीड़ के चलते अब यात्रा मार्ग और खाने-ठहरने की व्यवस्थाओं पर दबाव बढ़ने लगा है। इसी को देखते हुए वन विभाग व प्रशासन ने प्रतिदिन 200 श्रद्धालुओं को ही रुद्रनाथ धाम भेजने का निर्णय लिया है। इसके लिए ‘पहले आओ पहले जाओ’ का फार्मूला तय किया गया है।

चमोली जिले के अंतर्गत केदारनाथ वन्य जीव विहार में समुद्रतल से 11,808 फीट की ऊंचाई पर स्थित रुद्रनाथ धाम की यात्रा अति दुर्गम मानी जाती है। 19 किमी की इस यात्रा में 18 किमी पैदल मार्ग वन्य जीव विहार के भीतर से गुजरता है। बेहद चुनौतीपूर्ण इस मार्ग पर बफर जोन में वन्य जीव विहार के कड़े नियम लागू होते हैं। यह
क्षेत्र दुर्लभ वन्य जीवों का प्राकृतिक आवास माना जाता है। ऐसे में इस क्षेत्र में यात्री व्यवस्थाओं को लेकर किसी भी तरह का निर्माण संभव नहीं है। हालांकि, वन विभाग ने ल्वींठी बुग्याल में ईको विकास समिति के माध्यम से यात्रियों के खाने-ठहरने के लिए अस्थायी व्यवस्था करने की अनुमति दी है। रास्ते में अस्थायी शौचालय भी लगाए गए हैं।

जिस प्रकार रुद्रनाथ धाम में यात्रियों की आमद बढ़ रही है, उससे वर्तमान व्यवस्थाओं को लेकर दिक्कतें होना स्वाभाविक है। गोपेश्वर वन प्रभाग की ओर से जारी पत्र में बताया गया है कि रुद्रनाथ यात्रा मार्ग केदारनाथ वन्य जीव अभयारण्य के संरक्षित एवं अति दुर्गम क्षेत्र से होकर गुजरता है। यहां यात्रियों के ठहरने की सीमित व्यवस्था है और ऊंचाई वाले क्षेत्र में आक्सीजन की कमी, अचानक मौसम परिवर्तन, अतिवृष्टि और ओलावृष्टि जैसी परिस्थितियां कभी भी चुनौती बन सकती हैं। वन विभाग ने स्पष्ट किया है कि यात्रा मार्ग पर स्थित ईको विकास समितियों, मंदिर समिति की धर्मशालाओं और होटलों में प्रतिदिन 250 यात्रियों को ही ठहराने की व्यवस्था है। बावजूद इसके बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने से व्यवस्थाएं प्रभावित होने लगी हैं।

केदारनाथ वन्य जीव विहार के प्रभागीय वनाधिकारी सर्वेश दुबे ने कहा कि यात्री संख्या में वृद्धि के चलते अव्यवस्थाएं हो रही हैं। इसका संज्ञान लेते हुए जिलाधिकारी से वार्ता की गई और निर्णय लिया गया कि प्रतिदिन सिर्फ 200 यात्रियों को ही रुद्रनाथ भेजा जाएगा। दोपहर दो बजे के बाद यात्रियों को इस रूट पर जाने की अनुमति नहीं होगी। यात्रियों को ‘पहले आओ पहले जाओ’ की व्यवस्था के तहत भेजा जाएगा। इसके लिए पंजीकरण की भी व्यवस्था की गई है।

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