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उत्तरकाशी के प्रसिद्ध दयारा बुग्याल में में मना अंढूड़ी उत्सव, दूध-मक्खन में नहाए पर्यटक

Andhuri festival celebrated at the famous Dayara Bugyal in Uttarkashi, tourists bathed in milk and butter.

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उत्तरकाशी के प्रसिद्ध दयारा बुग्याल में में मना अंढूड़ी उत्सव, दूध-मक्खन में नहाए पर्यटक

भाद्रपद संक्रांति को 4,000 मीटर की ऊंचाई पर दयारा बुग्याल में खेली गई दूध-मक्खन व मट्ठा की अनूठी होली,  दो हजार से अधिक स्थानीय ग्रामीण और पर्यटक बने इस लोक उत्सव का हिस्सा, वर्षा के बावजूद कम नहीं हुआ पर्यकों का उत्साह

देहरादून, 17 अगस्त 2026: उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में स्थित प्रसिद्ध दयारा बुग्याल (अल्पाइन घास का मैदान) में भाद्रपद संक्रांति को अंढूड़ी उत्सव की धूम रही। वर्षा के बावजूद स्थानीय ग्रामीणों के साथ पर्यटकों ने भी बढ़-चढ़कर उत्सव में हिस्सा लिया और जमकर दूध, मक्खन व मट्ठा की होली खेली।  इससे पूर्व, ग्रामीणों व पर्यटकों ने लोक देवताओं की पूजा-अर्चना कर उन्हें दूध-मक्खन अर्पित किया और फिर शुरू हुआ लोकवाद्यों की मधुर लहरियों के बीच अंढूड़ी उत्सव।

दो दिवसीय बटर फेस्टिवल का हिस्सा बनने के लिए रविवार से ही स्थानीय ग्रामीण व पर्यटक दयारा बुग्याल पहुंचने लगे थे। सोमवार को पहले दिन दयारा बुग्याल के आधार स्थल रैथल गांव से सोमेश्वर देवता की डोली यात्रा निकाली गई। इस आयोजन में दयारा पर्यटन विकास समिति की ओर से मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी व जिले के प्रभारी मंत्री सौरभ बहुगुणा को आमंत्रित किया गया था, लेकिन वह नहीं पहुंच सके। मुख्यमंत्री के प्रतिनिधि के रूप में उनके गढ़वाल समन्वयक किशोर भट्ट आयोजन में शामिल हुए।  उन्होंने कहा कि इन आयोजनों के माध्यम से ग्रामीण नई पीढ़ी को अपनी लोक परंपराओं और संस्कृति से जोड़ने का प्रयास कर रहे हैं, जो सराहनीय है।

आयोजन समिति के अध्यक्ष मनोज राणा ने बताया कि पंचगाईं क्षेत्र के आराध्य सोमेश्वर देवता की पूजा-अर्चना के साथ ग्रीष्मकाल में बुग्यालों में चरने वाले दुधारु पशुओं की रक्षा के लिए ग्रामीणों ने सबसे पहले देवी-देवताओं व आंछरी-मांतरियों का आभार जताया। इसके बाद राधा-कृष्ण के रूप में सजे कलाकारों ने जैसे ही मक्खन से भरी हांडी फोड़ी, दूध-मक्खन की होली का विधिवत शुभारंभ हो गया।

सुबह 10 बजे से लेकर दोपहर बाद तक वर्षा के बावजूद समुद्रतल से 4,000 मीटर की ऊंचाई पर स्थित दयारा बुग्याल उल्लास में झूमता रहा। ‘हाथी-घोड़ा-पालकी, जय कन्हैया लाल की’ के उद्घोष घाटियां-चोटियां गूंजती रहीं। ग्रामीण व पर्यटक एक-दूजे पर दूध, दही व मक्खन लगाकर लोक उत्सव का आनंद उठाते रहे। पारंपरिक वेशभूषा में सजी महिलाओं ने राधा-कृष्ण के रूप में सजे कलाकारों के साथ रासो-तांदी नृत्य की मनमोहक छटा बिखेरी। ऐसा प्रतीत हो रहा है, मानो प्रकृति और संस्कृति एकसार हो गई हैं। आयोजन समिति के अध्यक्ष मनोज राणा ने कहा कि यह बटर फेस्टिवल धीरे-धीरे भव्य स्वरूप लेता जा रहा है। इसका पर्यटकों को वर्षभर बेसब्री से इंतजार रहता है।

बैड़थात में दूधगाडू मिल्क फेस्टिवल की धूम

दयारा बुग्याल की तर्ज पर गमरी और धनारी पट्टी के शीर्ष पर स्थित बैड़थात में भी दूधगाडू मिल्क फेस्टिवल मनाया गया। आयोजक टीम के मुकेश जगमोहन चौहान ने बताया कि सुबह से ही दोनों पट्टियों के ग्रामीण पारंपरिक वेशभूषा में सज-धजकर बैड़थात पहुंचने लगे थे।श्रद्धालुओं ने अपने आराध्य हुण देवता और नागराज देवता की पूजा-अर्चना की। धार्मिक अनुष्ठान के दौरान देवताओं का दूध व दही से अभिषेक किया गयाऔर प्रकृति एवं लोक देवताओं से क्षेत्र में सुख, शांति एवं समृद्धि की कामना की गई।

गमरी क्षेत्र के गोपाल प्रकाश मिश्रा ने बताया कि इस दौरान हुण देवता और नागराज देवता ने अपने पश्वाओं पर अवतरित होकर श्रद्धालुओं को आशीर्वाद दिया। इसके बाद ग्रामीणों ने एक-दूसरे पर मक्खन लगाकर पारंपरिक अंदाज में उत्सव मनाया। बैड़थात में भक्ति और उल्लास का माहौल बना रहा। यह उत्सव भी धीरे-धीरे दयारा बटर फेस्टिवल की तरह लोकप्रिय होता जा रहा है।

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