बदरी-केदार मंदिर समिति में शामिल होगा आदिबदरी मंदिर समूह
मंदिर समूह को समिति में शामिल करने की कवायद तेज, 12 सितंबर को ऋषिकेश में होने वाली मंदिर समिति बोर्ड की बैठक में रखा जाएगा इसका प्रस्ताव, सोमवार को मंदिर समिति की उच्चस्तरीय टीम ने आदिबदरी धाम पहुंचकर जुटाई इस संबंध में अहम जानकारी
देहरादून, 07 सितंबर 2026: उत्तराखंड के चमोली जिले में स्थित आदिबदरी मंदिर समूह को श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) में शामिल किए जाने को लेकर कवायद तेज हो गई है। बीकेटीसी उपाध्यक्ष ऋषि प्रसाद सती के नेतृत्व में सोमवार को उच्चस्तरीय टीम आदिबदरी पहुंचकर मंदिर प्रबंध समिति से मंदिर की पूजा पद्धति व व्यवस्थाओं समेत अन्य महत्वपूर्ण बिंदुओं पर जानकारी ली। अभी बीकेटीसी में बदरीनाथ व केदारनाथ धाम समेत 47 छोटे-बड़े मंदिर शामिल हैं।
मंदिर प्रबंध समिति व आदि बदरी क्षेत्र के लोग लंबे समय से प्रथम बदरी माने जाने वाले आदिबदरी मंदिर समूह को बीकेटीसी में शामिल करने की मांग करते आ रहे हैं। इसके लिए शासन को भी पत्र भेजा गया था। इसी कड़ी में बीकेटीसी की टीम ने सोमवार को मंदिर प्रबंध समिति के साथ बैठक कर मंदिर से जुड़ी विभिन्न व्यवस्थाओं की जानकारी जुटाई। इस दौरान पूजा पद्धति व धार्मिक व्यवस्थाओं के साथ ही मंदिर की भू-संपत्ति, हक-हकूक, धार्मिक एवं सांस्कृतिक समारोह और अन्य महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा हुई। बीकेटीसी उपाध्यक्ष ऋषि प्रसाद सती ने कहा कि जनभावनाओं को देखते हुए आदिबदरी मंदिर समूह को मंदिर समिति में शामिल करने के प्रयास हो रहे हैं। 12 सितंबर को ऋषिकेश में होने वाली बीकेटीसी बोर्ड की बैठक में इसका प्रस्ताव रखा जाएगा। इसके बाद आगे की कार्यवाही होगी।
बैठक में बीकेटीसी के सदस्य दिनेश डोभाल, धीरज पंचभैया, डा. विनीत पोस्ती, अवर अभियंता गिरीश रावत, प्रभारी संपत्ति निरीक्षक कुलदीप बिष्ट, आदिबदरी मंदिर समिति के अध्यक्ष जगदीश बहुगुणा, कोषाध्यक्ष विजय चमोला, नवीन बहुगुणा आदि मौजूद रहे। इससे पूर्व, मंदिर प्रबंध समिति ने आदिबदरी पहुंचने पर बीकेटीसी उपाध्यक्ष व सदस्यों का भव्य स्वागत किया। समिति की ओर से उपाध्यक्ष ऋषि प्रसाद सती को मंदिर समूह का चित्र भी भेंट किया गया।
आज भी उपेक्षित है ऐतिहासिक आदिबदरी मंदिर समूह
प्रथम बदरी कहे जाने वाले आदिबदरी धाम उत्तराखंड के प्रमुख तीर्थस्थलों में शामिल है, लेकिन तीर्थाटन व पर्यटन की दृष्टि से इसे आज तक पहचान नहीं मिल पाई। मंदिर प्रबंध समिति का मानना है कि यदि आदिबदरी मंदिर समूह को बीकेटीसी में शामिल किया जाता है तो यहां धार्मिक पर्यटन को नई दिशा मिल सकती है। मंदिर समिति के पदाधिकारियों ने कहा कि आदिबदरी धाम में वर्षभर विभिन्न धार्मिक कार्यक्रम, सांस्कृतिक महोत्सव और समारोह आयोजित होते हैं। बीकेटीसी में शामिल होने के बाद इससे स्थानीय स्तर पर धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलने के साथ क्षेत्र की आर्थिक गतिविधियों को भी गति मिलने की उम्मीद है।
श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) के अधिकार क्षेत्र में बदरीनाथ व केदारनाथ धाम समेत 47 मुख्य और अधीनस्थ मंदिर शामिल हैं। इनकी सूची निम्नवत है-
मुख्य धाम
चमोली जिले में स्थित बदरीनाथ धाम, रुद्रप्रयाग में स्थित केदारनाथ धाम
बदरीनाथ क्षेत्र के अधीनस्थ 29 स्थल। इनमें भगवान विष्णु के चार मुख्य अधीनस्थ स्वरूप (पंच बदरी में शामिल), मंदिर परिसर के पावन कुंड, शिलाएं और धाराएं शामिल हैं।
अधीनस्थ मुख्य मंदिर
योग-ध्यान बदरी मंदिर (पांडुकेश्वर), ध्यान बदरी मंदिर (उर्गम घाटी), भविष्य बदरी मंदिर (सुभाईं, जोशीमठ), वृद्ध बदरी मंदिर (अणिमठ), माता मूर्ति मंदिर (माणा गांव के पास), नृसिंह मंदिर (जोशीमठ – भगवान बदरीनाथ का शीतकालीन निवास), वासुदेव मंदिर (जोशीमठ), महादेव मंदिर (ज्योतेश्वर / जोशीमठ) माता मूर्ति मंदिर
पावन कुंड, शिला और परिक्रमा क्षेत्र
तप्त कुंड (पवित्र गर्म पानी का प्राकृतिक स्रोत), ब्रह्मकपाल शिला (पितृ तर्पण के लिए विख्यात स्थल), बदरीनाथ परिक्रमा पथ (मुख्य परिसर)
वसुधारा जलप्रपात (माणा), धर्मशिला (वसुधारा के तल पर स्थित पवित्र शिला), बदरीनाथ परिसर के भीतर स्थित चार अन्य छोटे अधीनस्थ देवी-देवताओं के मंदिर (लक्ष्मी, गरुड़, कुबेर व उद्धव के मंदिर)
केदारनाथ क्षेत्र के अधीनस्थ स्थल
इसके अंतर्गत भगवान शिव के स्वरूप (पंच केदार के भाग), माता शक्ति के सिद्धपीठ और यात्रा मार्ग के अन्य प्राचीन शिवालय शामिल हैं-
पंच केदार शृंखला के मंदिर
तुंगनाथ मंदिर (चोपता-रुद्रप्रयाग – तृतीय केदार-विश्व का सबसे ऊंचा शिव मंदिर), मध्यमेश्वर मंदिर (द्वितीय केदार), रुद्रनाथ मंदिर (गोपेश्वर, चतुर्थ केदार)
मुख्य यात्रा मार्ग के मंदिर व सिद्धपीठ
ओंकारेश्वर मंदिर (ऊखीमठ – भगवान केदारनाथ का शीतकालीन गद्दी स्थल), विश्वनाथ मंदिर, (गुप्तकाशी), त्रियुगीनारायण मंदिर (अखंड धूनी, शिव-पार्वती विवाह स्थल), गौरी माई मंदिर (गौरीकुंड), आदिकेदारेश्वर मंदिर,(केदारनाथ मार्ग), कालीमठ मंदिर/कालीशिला मंदिर (सिद्धपीठ), आदि शंकराचार्य समाधि स्थल (केदारनाथ धाम के पीछे)
परिसर के अंतर्गत लघु मंदिर
केदारनाथ मंदिर प्रांगण के भीतर स्थित चार लघु मंदिर (ईशानेश्वर महादेव आदि), गुप्तकाशी विश्वनाथ मंदिर परिसर के भीतर स्थित चार अन्य छोटे अधीनस्थ मंदिर (मणिकर्णिका कुंड के समीपस्थ शिवालय )
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अंत में सिर्फ इतना ही कहना है कि हम एक-दूसरे पर भरोसा बनाये रखें। यही भरोसा समाज में संवाद की बुनियाद मजबूत करने का आधार बनेगा। इन्हीं शब्दों के साथ आइये! कामना करें कि- ‘सबके हृदय में सर्वदा संवेदना की दाह हो, हमको तुम्हारी चाह हो, तुमको हमारी चाह हो।
-संपादक