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धर्म भाई लाटू और मां द्वारी से हुआ उत्तराखंड की लोक देवी नंदा का भावपूर्ण मिलन, छलछलाए श्रद्धालुओं के नेत्र

A poignant reunion took place between the folk goddess Nanda of Uttarakhand and her 'Dharma-bhai' (ritual brother) Latu and Mother Dwari, leaving the eyes of devotees brimming with tears.

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धर्म भाई लाटू और मां द्वारी से हुआ उत्तराखंड की लोक देवी नंदा का भावपूर्ण मिलन, छलछलाए श्रद्धालुओं के नेत्र

लाटूखाल और कांडई में हुआ देव डोलियों का यह अलौकिक मिलन, लोकवाद्यों की मधुर लहरियों के बीच नंगे पैर नंदा के ससुराल कैलास की ओर बढ़ रहे हैं श्रद्धालु, नंदा की एक झलक पाने को रास्तेभर उमड़ रही श्रद्धालुओं की भीड़

देहरादून, 07 सितंबर 2026: बारिश की फुहारों के बीच देवी नंदा की बड़ी जात सोमवार को अपने तीसरे पड़ाव कांडई गांव पहुंच गई। 20 किमी की इस यात्रा के दौरान लाटूखाल में नंदा का अपने धर्म भाई लाटू देवता और कांडई में मां द्वारी से मिलन भावुक कर देने वाला था। यह दृश्य देख श्रद्धालुओं के नेत्र छलछला आए। यात्रा मार्ग पर श्रद्धालु जगह-जगह नंदा की डोली पर पुष्प वर्षा स्वागत कर रहे थे। कई स्थानों पर ग्रामीणों ने नंदा को स्थानीय उत्पाद भी अर्पित किए।

बड़ी जात को लेकर नंदा के मायके में उत्सव का माहौल है। तीसरे दिन लुंतरा गांव में पूजा-अर्चना के बाद यात्रा चौसिंग्या खाडू की अुगआई में कांडा, खुनाणा, लामसौंणा, माणखी चोपड़ाकोट व चौंरी गांव होते हुए कांडई पहुंची। यात्रा के दौरान दशोली परगना के लाटूखाल मंदिर में 72 गांवों के ईष्ट लाटू देवता और कांडई के मां द्वारी मंदिर में देवी नंदा की विशेष पूजा हुई। बड़ी संख्या में श्रद्धालु लोकवाद्यों की मधुर लहरियों के बीच नंगे पैर नंदा के ससुराल कैलास की ओर बढ़ रहे हैं। कठिन पथरीले रास्तों से गुजरते इन श्रद्धालुओं का उत्साह देखते ही बनता है। देवी की डोली-छंतोली जिस भी गांव पहुंच रही हैं, ग्रामीण पंचायती चौक में उनकी पूजा-अर्चना कर रहे हैं। इस दौरान स्थानीय देवी-देवता भी अपने पश्वों पर अवतरित होकर श्रद्धालुओं को आशीर्वाद दे रहे हैं। मंगलवार सुबह बड़ी जात कांडई में मां द्वारी की पूजा-अर्चना के बाद खलतरा व मोठा चाका होते हुए 15 किमी की दूरी तय कर रात्रि विश्राम के लिए सेमा गांव पहुंचेगी।

ल्वां पहुंची बंड क्षेत्र की नंदा डोली

बड़ी जात में शामिल होने के लिए बंड भूम्याल क्षेत्र की नंदा डोली सुबह बाटुला गांव में पूजा-अर्चना के बाद सिरकोट, पनगड्डी, डिगोली व लगेठा मंदिर होते हुए अपने तीसरे पड़ाव ल्वां गांव पहुंची। मंगलवार सुबह ल्वां गांव में पूजा-अर्चना के बाद डोली मेहरगांव, गडोरा, गड्ढी, अगथल्ला व पीपलकोटी होते हुए अपने चौथे पड़ाव नौरख पहुंचेगी। यात्रा मार्ग पर भक्त नंदा जागरों के बीच पुष्प वर्षा कर डोली को अगले पड़ाव के लिए विदा कर रहे हैं।

नंदा देवी लोकजात : उस्तोली गांव पहुंची मां राजराजेश्वरी की डोली

कुरुड़ नंदा देवी सिद्धपीठ से पांच सितंबर को शुरू हुई मां नंदा राजराजेश्वरी की लोकजात सोमवार को मथकोट धरगांव व सिद्धेश्वर मंदिर नंदानगर होते हुए अपने तीसरे पड़ाव उस्तोली पहुंच गई। यात्रा गांवों की पगडंडियों से गुजरते हुए नदी-नालों को पार कर आगे बढ़ रही है। कुनबगड़ के पास तो यात्रियों ने उफान पर आए नाले को पार किया। लोकजात को लेकर भी श्रद्धालुओं में खासा उत्साह है। ग्रामीण जगह-जगह मां नंदा राजराजेश्वरी की पूजा-अर्चना कर उन्हें विदा कर रहे हैं। यह यात्रा वेदनी बुग्याल तक जाएगी। यहां वेदनी कुंड में पूजा-अर्चना व तर्पण के बाद नंदा को कैलास के लिए विदा किया जाएगा। यात्रा का चौथा पड़ाव भेंटी गांव है।

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