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देवताल-माणा पास सीमा दर्शन को आज निकलेगी लोकजात

The 'Lok-Jaat' (traditional pilgrimage procession) will set out today for a border visit to Devtal-Mana Pass.

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देवताल-माणा पास सीमा दर्शन को आज निकलेगी लोकजात

इस यात्रा में शामिल होने के लिए बदरीनाथ धाम पहुंचे श्रद्धालु, उत्तराखंड के चमोली जिले में समुद्रतल से 18,500 फीट की ऊंचाई पर स्थित है देवताल-माणा पास, माणा दर्रा और चीन सीमा क्षेत्र के निकट है यह ताल

देहरादून, 16 सितंबर 2026: भारत-चीन सीमा पर बदरीनाथ धाम से लगभग 52 किमी दूर समुद्रतल से 18,500 फीट की ऊंचाई पर देवताल-माणा पास सीमा दर्शन लोकजात कन्या संक्रांति के अवसर पर गुरुवार को आयोजित होगी। इसके लिए यात्री बदरीनाथ धाम पहुंच चुके हैं। इस यात्रा की शुरुआत वर्ष 2015 में तत्कालीन
मंत्री मोहन सिंह ‘गांववासी’ ने की थी। इस बार यात्रा का नेतृत्व उत्तराखंड वरिष्ठ नागरिक कल्याण परिषद के अध्यक्ष रामचंद्र गौड़ कर रहे हैं।

उत्तराखंड के चमोली जनपद के उच्च हिमालयी क्षेत्र में स्थित देवताल को धार्मिक एवं सांस्कृतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। माणा दर्रा और चीन सीमा क्षेत्र के निकट स्थित इसी ताल से सरस्वती नदी उद्गम हुआ है। यात्रा संयोजक डा. सुभाष चंद्र थलेड़ी ने बताया कि चमोली जिला प्रशासन की ओर से इस वर्ष यात्रा के लिए करीब डेढ़ दर्जन यात्रियों को इनर लाइन परमिट जारी किए गए हैं। 1962 के भारत-चीन युद्ध के बाद से इस सीमावर्ती क्षेत्र में आम लोगों की आवाजाही प्रतिबंधित थी।

वर्ष 2015 में तत्कालीन मंत्री मोहन सिंह रावत ‘गांववासी’ के प्रयासों के बाद  जिला प्रशासन एवं सेना की अनुमति से सीमित संख्या में यात्रियों के साथ इस यात्रा की शुरुआत हुई। तब से यह यात्रा प्रतिवर्ष आयोजित हो रही है। यात्रा का उद्देश्य उच्च हिमालयी क्षेत्र की लोक आस्था, सांस्कृतिक विरासत और सीमांत क्षेत्र से जुड़े धार्मिक एवं ऐतिहासिक महत्व को जनमानस तक पहुंचाना है। लोकजात में शामिल होने वाले सहयात्रियों में नीरज नैथानी, राजेश नंबूरी, राजेश जैन, राजेंद्र कप्रवान, माधुरी नैथानी, नरेश नौटियाल, देवेंद्र उनियाल, रक्षा उनियाल, रेणु नौटियाल आदि शामिल हैं।

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