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जन की यात्रा बनी भवानी भाई की जीवन यात्रा

Bhavani Bhai's life journey became a journey of the people

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जन की यात्रा बनी भवानी भाई की जीवन यात्रा

दून पुस्तकालय एवं शोध केंद्र में हुआ भवानी भाई की पुस्तक जीवन यात्रा का लोकार्पण, उनके सामाजिक योगदान पर भी हुई चर्चा

देहरादून, 5 मई, 2026: सर्वोदय नेता भवानी भाई की पुस्तक जीवन यात्रा का सोमवार को दून पुस्तकालय एवं शोध केंद्र के सभागार में लोकार्पण किया गया। इस दौरान भवानी भाई के सामाजिक योगदान पर भी चर्चा हुई। इतिहासकार प्रो. शेखर पाठक ने वन व शराब आंदोलन के संदर्भ में भवानी भाई के योगदान को अद्वितीय बताते हुए उत्तरकाशी, लम्बगांव, टिहरी, जलकुर घाटी के समाज व भवानी भाई के जनआंदोलन के प्रबल नेतृत्व के अनुभव साझा किए।

पुस्तक के संपादक एवं भवानी भाई के बहुत ही करीबी रहे रक्षासूत्र आंदोलन के प्रणेता सुरेश भाई ने कहा कि भवानी भाई ने हमेशा उन्हें एक अभिवावक के तौर पर संरक्षण दिया। जब-जब उन्होंने जनता की समस्याओं पर पैरवी की या वन बचाने के लिए रक्षासूत्र आंदोलन खड़ा किया, तब-तब भवानी भाई उनके साथ एक संरक्षक के तौर पर हमेशा खड़े रहे। उन्होंने रक्षा सूत्र आंदोलन के कई संस्मरण सुनाए। कहा कि यदि भवानी भाई उनके साथ खड़े नहीं होते तो शायद आज वह यहां नहीं होते। कहा कि भवानी भाई सर्वोदय विचार के सीधे एवं सरल व्यक्तित्व थे। उन्हें कभी गुस्सा नहीं आया करता था और कभी किसी से नाराजगी भी नहीं रही। सदा उनके विचार सकारात्मक ही हुआ करते थे। उन्होंने चिपको आंदोलन से लेकर उत्तराखंड में परिवर्तन की लड़ाई तक का नेतृत्व किया।

पुस्तक की परिकल्पना और लेखन करने वाले वरिष्ठ पत्रकार प्रेम पंचोली ने भवानी भाई से जुड़े संस्मरण सुनाए। बताया कि एक दिन चौरंगीखाल में भवानी भाई वन बचाओ आंदोलन को संबोधित कर रहे थे, तो वहां मौजूद जनसमूह रोता हुआ नजर आया। लेकिन, जब भवानी भाई ने अपने भाषण को आगे बढ़ाया तो सब लोग उनके साथ नारेबाजी करते हुए खड़े हो गए और संकल्प लिया कि जंगलों में माफियाओं को घुसने नहीं दिया जाएगा।

भवानी भाई के पास रहे ठक्कर बाबा आश्रम के छात्र एवं जल निगम से सेवानिवृत्त इंजीनियर किशनलाल ने कहा कि जब वह पढ़ने के लिए टिहरी आए, तब उनके सामने खर्चे की समस्या हुआ करती थी। ठक्कर बाबा आश्रम में भवानी भाई के सानिध्य में रहकर उन्होंने अपनी पढ़ाई पूरी की और वह उत्तराखंड जल निगम के प्रबंधक पद से सेवानिवृत हुए। कहा कि भवानी भाई के सानिध्य में रहकर सैकड़ों छात्र आज सफलता की सीढ़ी चढ़ रहे हैं।

पूर्व ब्लाक प्रमुख एवं वरिष्ठ अधिवक्ता जयप्रकाश शाह ने कहा कि भवानी भाई जैसा व्यक्ति शायद कभी इस दुनिया में आए। उनके जैसे नौजवानों के लिए ठक्कर बाबा आश्रम एक गार्जियनशिप वाला आश्रम था। इस आश्रम में शिक्षा के साथ-साथ पठन-पाठन करने वाले छात्रों को संस्कार भी दिए जाते थे। सर्वोदय विचार से जुड़ने के बाद उनके जीवन में भी एक नई ऊर्जा का संचार हुआ। सामाजिक कार्यकर्ता प्रभा रतूड़ी ने कहा कि युवाओं और महिलाओं के लिए भवानी भाई हमेशा एक पिता के तौर पर सामने आए। ठक्करबप्पा आश्रम एक छात्रावास ही नहीं था बल्कि युवाओं को दिशा देने का भी एक प्रमुख केंद्र रहा है।

कार्यक्रम में पत्रकार रमेश कुड़ियाल, लेखक गजेन्द्र नौटियाल, वरिष्ठ पत्रकार एवं लेखक सोमवारी लाल उनियाल व दून पुस्तकालय एवं शोध केन्द्र के कार्यक्रम अधिकारी चंद्रशेखर तिवारी ने भी विचार साझा किए। संचालन डॉ. योगेश धस्माना ने किया।इस मौके पर प्रतीक पंवार, आलोक सरीन, वरिष्ठ पत्रकार मनोज इष्टवाल, कमलेश भट्ट, पुस्तकालयाध्यक्ष डॉ. डीके पाण्डे, देवेन्द्र काण्डपाल, शैलेन्द्र नौटियाल, संदीप गुसाईं, भगवान प्रसाद घिल्डियाल, कुसुम नौटियाल आदि मौजूद रहे।

Global Ganga News

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