तीर्थाटन

एक माह बाद गंगोत्री यात्रा शुरू, यमुनोत्री के लिए अभी इंतजार

एक माह बाद गंगोत्री यात्रा शुरू

खबर को सुनें


एक माह बाद गंगोत्री यात्रा शुरू, यमुनोत्री के लिए अभी इंतजार

उत्तरकाशी, 10 सितंबर 2025: उत्तराखंड में मानसून की आपदा के बाद, चारधाम यात्रा का दूसरा चरण अब धीरे-धीरे पटरी पर लौट रहा है। उत्तरकाशी के जिलाधिकारी प्रशांत आर्य ने जानकारी दी कि गंगोत्री धाम की यात्रा मंगलवार से दोबारा शुरू हो गई है, लेकिन यमुनोत्री धाम के भक्तों को अभी कुछ दिन और इंतजार करना होगा। यमुनोत्री यात्रा 12 सितंबर के बाद शुरू करने पर विचार किया जाएगा।
सीमित संख्या में गंगोत्री जा सकेंगे श्रद्धालु
जिलाधिकारी ने बताया कि गंगोत्री धाम की यात्रा मौसम और सड़क की स्थिति को देखते हुए, सीमित संख्या में ही तीर्थयात्रियों को अनुमति दी जा रही है। गंगोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग पर धरासू, नालूपानी, हेलगुगाड़ और डबरानी जैसे कई संवेदनशील स्थान हैं, जहां भूस्खलन का खतरा बना हुआ है। इन जगहों पर सड़क को सुरक्षित और सुचारू रखने के लिए पर्याप्त मशीनरी और टीमें तैनात हैं।
यमुनोत्री यात्रा पर अपडेट
यमुनोत्री धाम की यात्रा को लेकर भी तैयारियां तेजी से चल रही हैं। जिलाधिकारी ने बताया कि यमुनोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग पर जंगलचट्टी, बनास और फूलचट्टी के पास भारी नुकसान हुआ है। जंगलचट्टी में करीब 150 मीटर और बनास में 40 मीटर सड़क का हिस्सा पूरी तरह से ध्वस्त हो गया था। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NH) 12 सितंबर तक इन मार्गों को सुचारू करने का प्रयास कर रहा है, जिसके बाद ही यमुनोत्री यात्रा शुरू करने का निर्णय लिया जाएगा।
जिलाधिकारी ने सभी श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे यात्रा शुरू करने से पहले जिला प्रशासन द्वारा जारी की गई स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) का पालन करें। उन्होंने बताया कि 5 अगस्त तक गंगोत्री धाम में 6,68,365 और यमुनोत्री धाम में 5,85,237 श्रद्धालु दर्शन कर चुके हैं। सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए प्रशासन सीमित संख्या में ही यात्रियों को आगे बढ़ने की अनुमति देगा, ताकि किसी भी अप्रिय घटना से बचा जा सके।

Global Ganga News

साथियों, Globalganga.com के मंच पर आपका स्वागत करते हुए हम स्वयं को गौरवान्वित महसूस कर रहे हैं। यह ऐसा मौका है, जब हम भी वेब पोर्टल की भीड़ में शामिल होने जा रहे हैं, इस संकल्प के साथ कि भीड़ का हिस्सा होते हुए भी हमेशा भीड़ से अलग दिखने का प्रयास करेंगे। हम चाहते हैं कि उत्तराखंड की संस्कृति एवं परंपराओं का देश-दुनिया में प्रसार हो, उत्तराखंड की बोली-भाषाएं समृद्ध हों और उन्हें स्वतंत्र पहचान मिले, यहां आध्यात्मिक पर्यटन एवं तीर्थाटन का विकास हो …और सबसे अहम बात यह कि इस सब में हमारी भी कुछ न कुछ भागीदारी अवश्य रहे। साथ ही एक विनम्र आग्रह भी है कि अपने कीमती सुझावों से समय-समय पर अवगत कराते रहें। ताकि सुधार की प्रक्रिया निरंतर गतिमान रहे। अंत में सिर्फ इतना ही कहना है कि हम एक-दूसरे पर भरोसा बनाये रखें। यही भरोसा समाज में संवाद की बुनियाद मजबूत करने का आधार बनेगा। इन्हीं शब्दों के साथ आइये! कामना करें कि- ‘सबके हृदय में सर्वदा संवेदना की दाह हो, हमको तुम्हारी चाह हो, तुमको हमारी चाह हो। -संपादक

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button