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साइबर क्राइम : डिजिटल अपराधियों के पर कतरने की तैयारी

Now the bank will be aware of the risky accounts.

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साइबर क्राइम : डिजिटल अपराधियों के पर कतरने की तैयारी

अब बैंक को पता चल जाएँगे जोखिम वाले अकाउंट 

नई दिल्ली, 26 सितंबर 2025 ; क्या आप जानते हैं: सरकार ने पहले ही 2.84 करोड़ फ़र्जी मोबाइल कनेक्शनों की पहचान कर डिस्कनेक्ट करवा दी है — और अब यही अनुभव भविष्य की बड़ी ढाल बनकर उभर रहा है। दूरसंचार विभाग और वित्तीय खुफिया इकाई-भारत (FIU-IND) के बीच आज हुए ऐतिहासिक एमओयू ने इस लड़ाई को और धार दी है।
देश के डिजिटल नक्शे पर धाँधली करने वालों के लिए अब मुश्किलें बढ़ने वाली हैं , क्योंकि मोबाइल नंबरों की पहचान और वित्तीय डेटा अब एक साथ जुड़कर धोखेबाज़ों को पहले से कहीं तेज़ी से ट्रैप करेगी।
दूरसंचार सचिव डॉ. नीरज मित्तल ने कहा — “यह केवल शुरुआत है; विभागीय सीमाएँ पार करके एक-दूसरे से सीखना ही असली जीत है।” राजस्व सचिव अरविंद श्रीवास्तव ने जोड़ा — “टेक्नोलॉजी-संचालित यह साझेदारी सटीकता और त्वरितता लेकर आएगी, जिससे डेटा का बेहतर उपयोग सुनिश्चित होगा।”
फ़र्जी मोबाइल नंबरों के बड़े पैमाने पर खुलासे और अब वित्तीय-खुफिया का साथ मिलने से धोखाधड़ी करने वालों के पास बचने की जगह कम रहती जा रही है। जब नेटवर्क-लेवल खुफिया और बैंक-लेवल विश्लेषण एक ही स्क्रीन पर आ जाएँ, तो अपराधियों के लिए फ़िजिकल और डिजिटल दोनों रास्ते बंद हो जाते हैं।
नतीजा — नागरिकों के डिजिटल वॉलेट और बैंकिंग खाते सुरक्षित होंगे, और धोखाधड़ी का रास्ता पहले से कहीं ज्यादा संकरा।
क्या बदलेगा — और कैसे रुकेगा साइबर क्राइम?
रियल-टाइम जोखिम फलक: संदिग्ध नंबरों को तुरंत “मध्यम/उच्च/बहुत-उच्च” रिस्क लेबल मिलेगा — यानी धोखाधड़ी का संभावित झटका होने से पहले ही अलार्म।
फ़ौरन कनेक्शन कटौती: दूरसंचार विभाग की MNRL (मोबाइल नंबर निरस्तीकरण सूची) में दर्ज कटौतियों का डेटा FIU-IND के साथ ऑटोमैटिक रूप से साझा होगा — जो संदिग्ध नंबरों को नेटवर्क से बाहर कर देगा।
बैंकों को रेड-फ्लैग: वित्तीय संस्थाएँ लेन-देन के दौरान तुरंत यह देख सकेंगी कि किस मोबाइल नंबर से जुड़े खाते उच्च जोखिम पर हैं, और जरूरी रोक-थाम लागू कर सकेंगी।
टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल: DIU के डिजिटल इंटेलिजेंस प्लेटफ़ॉर्म और FIU-IND के FinNex 2.0 जैसे पोर्टल से जानकारी तेज, सुरक्षित और संरचित तरीके से आदान-प्रदान होगी।
क्या हासिल हुआ  और भविष्य में क्या संभव है?
पहले से की गई कार्रवाई से 48 लाख संदिग्ध लेन-देन रोके गए, जिससे लगभग ₹140 करोड़ की संभावित हानि टली।
2.84 करोड़ फ़र्जी कनेक्शन काटे जा चुके हैं — अब यह अनुभव और डेटा FIU-IND के साथ मिलकर धोखाधड़ी के नमूनों की पहचान और पैटर्न-एनालिसिस को और सशक्त बनाएगा।
अगला कदम: एक संयुक्त कार्यसमूह जिसकी नज़र खासकर मुखौटा कंपनियों, मनी-म्यूल नेटवर्क और अंतरराष्ट्रीय स्पूफिंग गतिविधियों पर होगी।

Global Ganga News

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