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बच्चों ने सीखा कि गढ़वाली कैसे बोलें

The children learned how to speak Garhwali

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बच्चों ने सीखा कि गढ़वाली कैसे बोलें

गढ़वाली लोकभाषा एवं कविता लेखन पर तीन जनवरी को दून लाइब्रेरी के बाल अनुभाग में आयोजित किया गया मातृभाषा के प्रयोग को बढ़ावा देने के लिए यह सत्र

 

देहरादून, 3 जनवरी 2026: दून लाइब्रेरी के बाल अनुभाग में शनिवार तीन जनवरी को गढ़वाली लोकभाषा एवं कविता लेखन पर एक रोचक सत्र आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में 10 बच्चों ने भाग लिया। आयोजन में दो स्वयंसेवकों ने सहयोग रहा।

सत्र का संचालन नवोदित गढ़वाली कवयित्री सुश्री सुरभि रावत ने किया। उन्होंने बच्चों को सरल और संवादात्मक तरीके से अंग्रेज़ी से हिंदी और फिर गढ़वाली भाषा की ओर मार्गदर्शन किया। बच्चों ने नए गढ़वाली शब्दों के साथ अपनी भावनाओं को कविता के रूप में व्यक्त करना सीखा। सत्र के अंत तक बच्चे आत्मविश्वास के साथ गढ़वाली में बोलते और कविताएँ रचते नज़र आए।

यह सत्र दून लाइब्रेरी बाल अनुभाग की उस निरंतर पहल का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य बच्चों के दैनिक जीवन में मातृभाषा के प्रयोग को बढ़ावा देना है। यह पहल राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के अनुरूप है, जो मातृभाषा को बच्चे के बौद्धिक, भावनात्मक और आलोचनात्मक विकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मानती है, विशेष रूप से सुरक्षित और सहयोगी वातावरण में।

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