अध्यात्मउत्तराखंडचारधाम यात्रातीर्थाटनधर्म-परम्पराएंराष्ट्रीयसंस्कृति

आज पता चलेगा क‍ि कब खुलेंगे बदरीनाथ धाम के कपाट

Today we will know when the doors of Badrinath Dham will open

खबर को सुनें


आज पता चलेगा क‍ि कब खुलेंगे बदरीनाथ धाम के कपाट

परंपरा के अनुसार वसंत पंचमी के दिन टिहरी के नरेंद्रनगर राजमहल में निकाली जाती है बदरीनाथ धाम के कपाट खुलने और तिलों के तेल पिरोने की तिथि

देहरादून, 22 जनवरी 2026: टिहरी के नरेंद्रनगर राजमहल में आज बदरीनाथ धाम के कपाट खुलने और भगवान बदरी विशाल के अभिषेक में प्रयुक्‍त‍ होने वाले तिलों का तेल पिरोने की तिथि तय की जाएगी। श्री बदरीनाथ डिमरी धार्मिक केंद्रीय पंचायत के सदस्य चमोली जिले के डिम्‍मर गांव से गाडू घड़ा (तेल कलश)  लेकर गुरुवार को ऋषिकेश पहुंचे। यहां रात्रि विश्राम के बाद सुबह पंचायत के सदस्य नरेंद्रनगर राजमहल के लिए रवाना होंगे।
परंपरा के अनुसार बदरीनाथ धाम के कपाट खुलने की तिथि वसंत पंचमी के दिन टिहरी राजा की मौजूदगी में तय की जाती है। शुक्रवार को नरेंद्रनगर राजमहल में कपाट खुलने के साथ ही तेल पिरोने की तिथि भी निकाली जाएगी। मंगलवार को डिमरी पंचायत के सदस्य जोशीमठ स्थित नृसिंह मंदिर से गाडू घड़ा लेकर पांडुकेश्वर स्थित योग-ध्‍यान बदरी मंदिर पहुंचे थे। इसके बाद डिम्मर गांव स्थित लक्ष्मी-नारायण मंदिर में गाडू घड़ा की पूजा-अर्चना की गई। गुरुवार शाम पंचायत के सदस्य ऋषिकेश पहुंचे। श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति की धर्मशाला में रात्रि विश्राम के बाद शुक्रवार सुबह नौ बजे गाडू घड़ा को लेकर सदस्य नरेंद्रनगर राजमहल पहुंचेंगे। इसके बाद राजपुरोहित कपाट खुलने की तिथि निकालेंगे।

Global Ganga News

साथियों, Globalganga.com के मंच पर आपका स्वागत करते हुए हम स्वयं को गौरवान्वित महसूस कर रहे हैं। यह ऐसा मौका है, जब हम भी वेब पोर्टल की भीड़ में शामिल होने जा रहे हैं, इस संकल्प के साथ कि भीड़ का हिस्सा होते हुए भी हमेशा भीड़ से अलग दिखने का प्रयास करेंगे। हम चाहते हैं कि उत्तराखंड की संस्कृति एवं परंपराओं का देश-दुनिया में प्रसार हो, उत्तराखंड की बोली-भाषाएं समृद्ध हों और उन्हें स्वतंत्र पहचान मिले, यहां आध्यात्मिक पर्यटन एवं तीर्थाटन का विकास हो …और सबसे अहम बात यह कि इस सब में हमारी भी कुछ न कुछ भागीदारी अवश्य रहे। साथ ही एक विनम्र आग्रह भी है कि अपने कीमती सुझावों से समय-समय पर अवगत कराते रहें। ताकि सुधार की प्रक्रिया निरंतर गतिमान रहे। अंत में सिर्फ इतना ही कहना है कि हम एक-दूसरे पर भरोसा बनाये रखें। यही भरोसा समाज में संवाद की बुनियाद मजबूत करने का आधार बनेगा। इन्हीं शब्दों के साथ आइये! कामना करें कि- ‘सबके हृदय में सर्वदा संवेदना की दाह हो, हमको तुम्हारी चाह हो, तुमको हमारी चाह हो। -संपादक

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button