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नौ माह से बंद पड़ी है पिंडर नदी पर लगी हाइड्रोलिक ट्राली, लोग लकड़ी के कच्चे पुल से पर कर रहे उफनती नदी

The hydraulic trolley on the Pindar River has been out of service for nine months, with people crossing the swollen river on a crude wooden bridge.

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नौ माह से बंद पड़ी है पिंडर नदी पर लगी हाइड्रोलिक ट्राली, लोग लकड़ी के कच्चे पुल से पर कर रहे उफनती नदी

नदी का जलस्तर चढ़ने से बढ़ी ओडर के ग्रामीणों की मुश्किलें, लकड़ी का अस्थायी पुल डूबने के कगार पर, वर्ष 2013 की आपदा में बह गया था पिंडर पर बना झूलापुल, तब से ट्राली ही है ग्रामीणों का सहारा

देहरादून, 16 जून 2026: चमोली जनपद के देवाल ब्लाक में ओडरधार से ओडर गांव के बीच पिंडर नदी पर लगी हाइड्रोलिक ट्राली पिछले नौ माह से बंद है। ऐसे में नदी के आर-पार जाने के लिए ग्रामीण लकड़ी के अस्थायी कच्चे पुल पर निर्भर हैं। हालिया वर्षा के चलते नदी का जलस्तर काफी बढ़ गया है और अब मानसून सिर पर होने के कारण यह पुल कभी भी नदी के उफान की भेंट चढ़ सकता है। अगर ट्राली को जल्द सुचारु नहीं किया गया तो बरसात में ओडर के 50 परिवार गांव में ही कैद होकर रह जाएंगे। ज्ञात रहे कि 2013 की आपदा में पिंडर नदी पर बना झूलापुल बह गया था, तब से यह ट्राली ही ग्रामीणों का एकमात्र सहारा है।

ओडर की ग्राम प्रधान प्रेमा देवी टम्टा ने बताया कि वर्ष 2013 की आपदा में झूलापुल बहने के बाद लोनिवि ने ओडरधार से ओडर गांव के बीच पिंडर नदी पर हाइड्रोलिक ट्राली लगाई थी। लेकिन, इस ट्राली का संचालन सिर्फ बरसात के तीन महीने ही होता है। शेष अवधि में ओडर के 50 परिवारों के 300 से अधिक ग्रामीण पिंडर नदी पर लकड़ी का अस्थायी पुल बनाकर आवाजाही करते हैं। पुल हर बरसात नदी के उफान की भेंट चढ़ जाता है। उन्होंने बताया कि बीते कुछ दिनों से वर्षा के चलते पिंडर नदी का जलस्तर बढ़ गया है, जिससे लकड़ी का पुल डूबने के कगार पर है।

प्रधान ने बताया कि हाइड्रोलिक ट्राली का एक तार ढीला होने के कारण वह जमीन से टकरा रही है, लिहाजा उसकी तत्काल मरम्मत कराए जाने की जरूरत है। अन्यथा ग्रामीण बरसात में कैद होकर रह जाएंगे। उन्होंने नदी पर स्थायी पुल बनाने की भी मांग की है।

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