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देवभूमि की सदियों पुरानी इस परंपरा में हो रहा बदलाव… जानने के लिए पढ़ें

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देहरादून, 5 अक्टूबर: देवभूमि की आस्था और परंपरा में इस वर्ष एक ऐतिहासिक अध्याय जुड़ने जा रहा है। देहरादून के जनजातीय क्षेत्र जौनसार बावर से छत्रधारी चालदा महासू देवता इस बार दसऊ मंदिर से मशक जाने के बजाय सीधे हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले के पश्मी गांव पहुंच कर वहां प्रवास करेंगे। दिसंबर में होने वाली यह यात्रा न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि महासू देवता की परंपरागत प्रवास परंपरा में एक बड़ा परिवर्तन भी दर्ज करेगी।

दशहरे के दिन देवता की पवित्र बरवांश प्रवास यात्रा का कार्यक्रम घोषित किया गया। तय कार्यक्रम के अनुसार 14 दिसंबर को देवता सिरमौर जिले के शिलाई प्रखंड स्थित पश्मी गांव पहुंचेंगे। परंपरा के अनुसार, चालदा महासू हर बार दसऊ मंदिर से मशक गांव के लिए रवाना होते थे, लेकिन इस बार वे सीधे सिरमौर की ओर प्रस्थान करेंगे।

लोक मान्यता के अनुसार चालदा महासू देवता चार भाइयों (बाशिक, बोठा, पवासी और चालदा महासू) में सबसे छोटे हैं। चालदा महासू हमेशा चलायमान रहते हैं और एक स्थान से दूसरे स्थान पर प्रवास करते हैं। टोंस नदी के दो हिस्सों शांठीबिल और पांशीबिल में देवता का प्रवास क्रमशः 12 से 20 वर्ष के अंतराल में होता है। कई बार यह अवधि 40 वर्ष तक भी खिंच जाती है।

दिसंबर में होगा आस्था का महासमागम

आयोजकों के अनुसार, 8 दिसंबर को दसऊ मंदिर के गर्भगृह से देवता की पालकी गाजे-बाजे के साथ निकलेगी। 9 से 12 दिसंबर तक दसऊ, भूपोऊ, जगथान-बुरायला और सावड़ा में भक्त पारंपरिक बागड़ी पूजा-अर्चना करेंगे। 13 दिसंबर को देवता की यात्रा द्रविड़ गांव पहुंचेगी और 14 दिसंबर को पहली बार सिरमौर के पश्मी गांव में प्रवेश करेगी, जहां देवता पूरे एक वर्ष तक प्रवास करेंगे।

भक्तों ने स्वयं बनाया मंदिर, उमंग में डूबा पश्मी

देवता के स्वागत के लिए पश्मी और घासन पंचायतों के लोगों ने अपने संसाधनों से एक भव्य नया मंदिर बनवाया है। इस मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा 13 अप्रैल, बैसाखी के दिन विधि-विधान से की गई थी। अब पूरे क्षेत्र में उत्सव का माहौल है।

 

13 वर्ष से शांठीबिल में थे विराजमान

वर्ष 2012 में बंगाण क्षेत्र के ठडियार मंदिर से शुरू हुई पिछली प्रवास यात्रा में देवता हनोल, कोटी-बावर, मुंधोल, थंगाड़, जनोग, थरोच, मोहना और दसऊ जैसे पवित्र स्थानों में विराजमान रहे। अब लगभग 13 वर्ष बाद चालदा महासू पहली बार सिरमौर की धरती पर पधारने वाले हैं।

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