मध्यमेश्वर यात्रियों को ट्राली के सहारा, तीन साल से नहीं बन पाया झूलापुल
Madhyameshwar passengers rely on trolleys, suspension bridge not built for three years

मध्यमेश्वर यात्रियों को ट्राली के सहारा, तीन साल से नहीं बन पाया झूलापुल
वर्ष 2023 की आपदा में बह गया था बनतोली में मोरखंडा नदी पर बना झूलापुल, तब से लकड़ी के अस्थायी पुल और ट्राली के सहारे नदी को पार रहे हैं श्रद्धालु

देहरादून, 03 अगस्त 2026: मध्यमेश्वर यात्रा मार्ग पर बनतोली में मोरखंडा नदी पर झूलापुल का निर्माण नहीं हो पाया है। इसके चलते श्रद्धालु लकड़ी के अस्थायी पुल और ट्राली के सहारे नदी पार करने को विवश हैं। यहां बना पुल वर्ष 2023 की आपदा में बह गया था।
14 अगस्त 2023 को अतिवृष्टि के चलते मोरखंडा नदी उफान पर आ गई थी, जिससे बनतोली में बना लोहे का गार्डर पुल भी बह गया था। तब मध्यमेश्वर धाम में सैकड़ों श्रद्धालु फंस गए थे, जिन्हें प्रशासन ने हेलीकाप्टर की मदद से सुरक्षित निकाला। बाद में गौंडार गांव के ग्रामीणों ने श्रमदान कर नदी पर लकड़ी का अस्थायी पुल तैयार किया, जिससे यात्रा दोबारा शुरू हो सकी। लेकिन, 26 जुलाई 2024 को नदी के तेज बहाव में लकड़ी का यह पुल भी बह गया, जिससे एक बार फिर यात्रा बाधित हुई और धाम में फंसे श्रद्धालुओं को हेलीकाप्टर से निकालना पड़ा। नदी का जलस्तर कम होने के बाद ग्रामीणों ने दोबारा अस्थायी पुल बनाया, जबकि लोनिवि ऊखीमठ ने यात्रियों की आवाजाही के लिए ट्राली की व्यवस्था की।
30 जुलाई 2025 को फिर से अस्थायी पुल की सुरक्षा दीवार क्षतिग्रस्त होने के कारण इस पर आवाजाही बंद करनी पड़ी और यात्रा पूरी तरह ट्राली पर निर्भर हो गई। वर्तमान में भी यही ट्राली एकमात्र सहारा है, जिससे यात्रियों को जान जोखिम में डालकर नदी पार करनी पड़ती है। हालांकि, मध्यमेश्वर यात्रा को सुरक्षित बनाने के लिए शासन ने अब 90 मीटर लंबे झूलापुल के निर्माण को 7.27 करोड़ की वित्तीय एवं प्रशासनिक स्वीकृति दे दी है। टेंडर प्रक्रिया पूरी होने के बाद लोनिवि ऊखीमठ ने पुल का निर्माण कार्य भी शुरू करा दिया है। पुल डेढ़ वर्ष में बनकर तैयार हो जाएगा। लोनिवि ऊखीमठ के अधिशासी अभियंता राकेश नैथानी का कहना है कि पुल का निर्माण कार्य प्रगति पर है, अगले वर्ष यह बनकर तैयार हो जाएगा।



