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गुलाबी कांठा के लिए रवाना हुआ 21-सदस्यीय पर्यटक दल

21-member tourist group leaves for Gulabi Kantha

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गुलाबी कांठा के लिए रवाना हुआ 21-सदस्यीय पर्यटक दल

  • पर्यटन सचिव धीराज सिंह गर्ब्याल ने हरी झंडी दिखाकर दल को किया रवाना

  • सरकार ने वर्ष 2025 के लिए गुलाबी कांठा को घोषित किया है ट्रेक आफ द ईयर

देहरादून, 29 सितंबर 2025
साहसिक पर्यटन को बढ़ावा देने, स्थानीय युवाओं को रोजगार से जोड़ने और प्रदेश में पर्यटकों की संख्या बढ़ाने के उद्देश्य से वर्ष 2025 के लिए ट्रेक ऑफ ईयर घोषित किये गये उत्तरकाशी जिले के गुलाबी कांठा ट्रेक पर पर्यटकों का पहला दल रवाना हुआ। दल में विभिन्न राज्यों के 21 पर्यटक शामिल हैं, जो छह दिन का ट्रेक करेंगे।
पर्यटक दल को ट्रेक द हिमालयाज (टीटीएच) के देहरादून कार्यालय से पर्यटन सचिव धीराज सिंह गर्ब्याल ने हरी झंडी दिखाकर स्यानाचट्टी के लिए रवाना किया। उम्मीद है कि आने वाले समय में यह ट्रेक बड़ी संख्या में देश-विदेश के ट्रेकर्स को आकर्षित करेगा और उत्तराखंड पर्यटन का एक महत्वपूर्ण केंद्र बनकर उभरेगा। गुलाबी कांठा आप सर्दी-गर्मी किसी भी मौसम में आ सकते हैं, लेकिन अक्टूबर से अप्रैल तक का समय सबसे अच्छा माना जाता है। दिसंबर से मार्च तक यहां बर्फ की चादर बिछी रहती है।
विदित हो कि समुद्रतल से 12,500 फ़ीट की ऊंचाई पर स्थित खूबसूरत बुग्याल गुलाबी कांठा वर्ष 2016 से पहले दुनिया की नजरों से ओझल था। सिर्फ स्थानीय चरवाहे ही यहां जाते थे। लेकिन, धीरे-धीरे यह पर्यटकों की खास पसंद बनता जा रहा है। 2.5 किमी लंबे और 1.5 किमी चौड़े इस बुग्याल तक पहुंचने के लिए हनुमानचट्टी से तीन किमी कंडोला थात व सात किमी सीमा टॉप होते हुए 14 किमी का ट्रेक करना पड़ता है। यहां से सूर्योदय का रोमांचित कर देने वाला नजारा दिखाई देता है।

फूलों की गुलाबी आभा से पड़ा गुलाबी कांठा नाम

वसंत ऋतु में यह बुग्याल गुलाबी और बैंगनी रंग के फूलों की चादर ओढ़े रहता है, इसलिए लोग इसे गुलाबी कांठा कहने लगे और कालांतर में यही नाम लोकप्रिय हो गया। हालांकि, अन्य प्रकार के फूलों की भी यहां बहुतायत रहती है।

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