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4250 मीटर की ऊंचाई से ब्रह्मांड की सैर

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नई दिल्ली, 27 सितंबर 2025 : लद्दाख का शांत गांव हानले सितारों की छांव में कुछ दिनों के लिए एक अलग ही दुनिया बन गया। 18 से 23 सितंबर तक  यहाँ आयोजित हुई हानले डार्क स्काई रिज़र्व (एचडीएसआर) स्टार पार्टी के तीसरे संस्करण ने देशभर से आए खगोल विज्ञान प्रेमियों को आसमान से सीधी दोस्ती करने का मौका दिया।

चार रातें और ब्रह्मांड की सैर

4250 मीटर की ऊँचाई पर बसा हानले वैसे भी अपने साफ और अंधेरे आसमान के लिए प्रसिद्ध है, लेकिन इस बार यह जगह और भी खास रही।
भारतीय खगोल भौतिकी संस्थान (IIA), भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र (BARC) और वन्यजीव संरक्षण विभाग, लद्दाख द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में कर्नाटक, तमिलनाडु, मध्य प्रदेश, गुजरात, दिल्ली, जम्मू-कश्मीर, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश और केरल से आए सैकड़ों शौकिया खगोलविद और खगोल-फोटोग्राफर शामिल हुए। किसी ने अपने कैमरे से पूरी आकाशगंगा कैद की, तो किसी ने पहली बार दूरबीन से नेबुला और धुंधले तारे देखे। कार्यक्रम के दौरान “हानले नाइट स्काई के 7 अजूबे” जैसी गतिविधियों और खगोल-फ़ोटोग्राफ़ी मास्टरक्लास ने सभी को नई जानकारी दी।

जब पूरी बस्ती तारों को निहारती रही

आयोजन की आखिरी रात को “ओपन नाइट” के रूप में रखा गया। इस दिन का नज़ारा बिल्कुल अलग था।
300 से अधिक लोग – स्थानीय ग्रामीण, पर्यटक और सेना के जवान – देर रात तक दूरबीनों से चाँद के गड्ढे, शनि के छल्ले और आकाशगंगा की लकीरें निहारते रहे। बच्चों की आँखों में पहली बार चाँद को इतनी नज़दीक से देखने का उत्साह था, वहीं बुजुर्गों ने कहा कि ऐसा दृश्य जीवन में पहली बार देखा।

महिलाएँ बनीं तारों की दूत

स्टार पार्टी की असली हीरो हानले के वे लोग रहे जिन्हें ‘खगोल-राजदूत’ बनाया गया। इनमें से 24 में से 60% महिलाएँ थीं। ये महिलाएँ न सिर्फ पर्यटकों को दूरबीन से तारे दिखा रही थीं, बल्कि लोककथाओं और पारंपरिक गीतों से आसमान को कहानियों में बदल देती थीं। डॉ. नम्रता पाठक के शब्दों में “हानले की रात सिर्फ वैज्ञानिक अनुभव नहीं थी, बल्कि एक आध्यात्मिक यात्रा भी थी। महिलाएँ जिस तरह से आकाश को संस्कृति से जोड़ रही थीं, वह अद्भुत है।”

वैज्ञानिकों की राय

भारतीय खगोल भौतिकी संस्थान की निदेशक प्रो. अन्नपूर्णी सुब्रमण्यम ने कहा “हानले का आसमान भारत का सबसे कीमती खज़ाना है। यहाँ से धुंधले खगोलीय पिंड भी इतने स्पष्ट दिखते हैं, जितना देश के किसी और हिस्से से संभव नहीं।” वेधशाला के प्रभारी अभियंता दोर्जे अंगचुक ने बताया कि प्रतिभागियों को खगोल-फ़ोटोग्राफ़ी और अवलोकन के नए तरीके सिखाए गए। BARC के अधिकारी थुपस्तान रिनचेन ने कहा “कुछ प्रतिभागियों ने अपने उपकरणों से गहरी आकाशीय वस्तुओं की तस्वीरें खींचीं, तो कई लोग सिर्फ अपनी आँखों से तारे देखकर रोमांचित हो गए। हर रात आपसी बातचीत भी सभी के लिए सीखने का अनुभव रही।”

विज्ञान और समुदाय का संगम

स्टार पार्टी ने साबित कर दिया कि हानले सिर्फ वैज्ञानिक खोज का केंद्र नहीं, बल्कि स्थानीय समुदाय के लिए भी गर्व और अवसर का स्थान है। यहाँ विज्ञान, संस्कृति और पर्यटन तीनों का संगम देखने को मिला।

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