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उत्‍तराखंड में भी हो रहा धान की उन्नत प्रजातियों पर नवाचार, मीथेन उत्सर्जन कम करने वाली हैं ये प्रजाति

Uttarakhand is also developing innovative rice varieties that reduce methane emissions.

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उत्‍तराखंड में भी हो रहा धान की उन्नत प्रजातियों पर नवाचार, मीथेन उत्सर्जन कम करने वाली हैं ये प्रजाति

कटक स्थित केंद्रीय चावल अनुसंधान संस्‍थान ने विकसित की हैं धान की 194 प्रजाति। उत्‍तराखंड समेत देश के कुल धान क्षेत्र के 22 प्रतिशत हिस्से में हो रहा है इन प्रजाति का उपयोग

कटक (ओडिशा), 27 मार्च 2026: उत्तराखंड से आए मीडिया अध्‍ययन दल ने बीते मंगलवार को ओडिशा के कटक स्थित केंद्रीय चावल अनुसंधान संस्‍थान में धान उत्‍पादन से जुड़ी अनुसंधान गतिविधियों, विकास कार्यक्रमों और आधुनिक तकनीकी नवाचारों की जानकारी प्राप्त की। संस्थान ने अब तक धान की 194 प्रजाति विकसित की हैं, जिनमें प्रतिकूल परिस्थितियों को सहन करने वाली और बायोफोर्टिफाइड प्रजाति भी शामिल हैं। इन प्रजाति का उपयोग उत्‍तराखंड समेत देश के कुल धान क्षेत्र के लगभग 22 प्रतिशत हिस्से में किया जा रहा है, जिससे किसानों को महत्वपूर्ण आर्थिक लाभ मिला है। इनमें से कई प्रजाति पर उत्‍तराखंड में विवेकानंद पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्‍थान अल्मोड़ा और गोविंद बल्‍लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्‍वविद्यालय पंतनगर में शोध कार्य चल रहा है।

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के सहयोग से पीआइबी देहरादून के सहायक निदेशक संजीव सुंद्रियाल के नेतृत्‍व में ओडिशा आए मीडिया दल को संस्थान के निदेशक डा. प्रताप भट्टाचार्य ने धान उत्पादन से जुड़ी अनुसंधान गतिविधियों, विकास कार्यक्रमों और आधुनिक तकनीकी नवाचारों की जानकारी दी। बताया कि संस्‍थान की प्रमुख उपलब्धियों में जीनोम एडिटिंग टूल, एआइ आधारित प्रिसीजन एग्रीकल्चर, ड्रोन तकनीक, धान के भूसे के पुनः उपयोग की तकनीक, राइस एक्‍सपर्ट एडवाइजरी प्लेटफार्म, मीथेन उत्सर्जन कम करने वाले मेथेनोट्राफ फार्मुलेशन और नाइट्रोजन उपयोग दक्षता बढ़ाने वाली तकनीकें शामिल हैं। इस दौरान उन्‍होंने उन्‍होंने जलवायु अनुकूल कृषि, जैविक खेती, सुगंधित एवं जीआइ टैग वाले चावल और लो ग्लाइसेमिक इंडेक्स वाली धान की किस्मों से जुड़े सवालों के जवाब भी दिए।

डा. भट्टाचार्य ने बताया कि उत्‍तराखंड की जलवायु के अनुकूल ऐसी धान प्रजाति भी विकसित की जा रही हैं, जिन्‍हें किसान आसानी से अपना सकते हैं। इन प्रजाति पर अल्मोड़ा व पंतनगर में काम हो रहा है। अध्‍ययन दल ने इस दौरान अत्याधुनिक प्रयोगशालाओं और अनुसंधान खेतों का भी दौरा किया और संस्‍थान की ओर से किए जा रहे प्रयोगों व नई तकनीकों को करीब से देखा। इस मौके पर पीआइबी भुवनेश्वर के सहायक निदेशक महेंद्र प्रसाद जेना भी मौजूद रहे।

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