उत्तराखंडबैठकयातायात

दून में फ्री कीजिए कैब की सवारी, जानिए कैसे 

Take a free cab ride in Doon, know how

खबर को सुनें


दून में फ्री कीजिए कैब की सवारी, जानिए कैसे

देहरादून, 16 अक्टूबर 2025 :  प्रशासन की ओर से संचालित “प्रोजेक्ट ऑटोमेटेड पार्किंग” के तहत ‘‘फ्री सखी कैब’’ सेवा की शुरुआत की गई है। परेड ग्राउंड स्थित पार्किंग से दो इलेक्ट्रिक वाहनों को विधायक खजानदास, महापौर सौरभ थपलियाल, जिलाधिकारी सविन बंसल और एसएसपी अजय सिंह ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। यह सेवा महिलाओं के कृष्णा स्वयं सहायता समूह के माध्यम से संचालित होगी, जो प्रदेश की पहली महिला संचालित ऑटोमेटेड पार्किंग भी है।

यह सेवा परेड ग्राउंड से 5 किलोमीटर के दायरे तक यात्रियों को निःशुल्क ड्रॉप की सुविधा देगी। जल्द ही 6 और ईवी वाहन इस बेड़े में जोड़े जाएंगे। इसके साथ ही शहर में 5 स्टॉप पॉइंट — परेड ग्राउंड, गांधी पार्क, पल्टन बाजार, घंटाघर, राजपुर रोड, सचिवालय, कांग्रेस भवन, क्रॉसरोड मॉल, होटल बाउलवर्ड और एस्लेहॉल ग्लोब चौक — निर्धारित किए गए हैं।

डीएम सविन बंसल ने बताया कि पारंपरिक पार्किंग की तुलना में यह पार्किंग तीन गुना सस्ती और जल्दी बनकर तैयार हुई है। इसका उद्देश्य शहर को जाम से निजात दिलाना और महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाना है। वर्तमान में समूह को प्रतिदिन ₹29,120 की आय हो रही है, जो अब और बढ़ने की संभावना है।

शहर में सुभाष रोड, गांधी पार्क, एस्लेहॉल, घंटाघर, तिब्बती मार्केट क्षेत्र में सड़क पर खड़े वाहनों पर अब सख्त कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन ने इन इलाकों में डेडिकेटेड क्रेन तैनात की है।

देहरादून में तीन स्थानों — परेड ग्राउंड (111 वाहन क्षमता), तिब्बती मार्केट (132), और कोरोनेशन हॉस्पिटल (18) — पर कुल 261 वाहनों की क्षमता वाली ऑटोमेटेड पार्किंग तैयार की गई है। मुख्यमंत्री धामी जल्द ही इन परियोजनाओं का विधिवत लोकार्पण करेंगे।

यह पहल न केवल शहर को सुगम यातायात देगी, बल्कि महिला स्वसहायता समूहों को आजीविका संवर्धन और आत्मनिर्भरता की दिशा में नई उड़ान भी दे रही है।

Global Ganga News

साथियों, Globalganga.com के मंच पर आपका स्वागत करते हुए हम स्वयं को गौरवान्वित महसूस कर रहे हैं। यह ऐसा मौका है, जब हम भी वेब पोर्टल की भीड़ में शामिल होने जा रहे हैं, इस संकल्प के साथ कि भीड़ का हिस्सा होते हुए भी हमेशा भीड़ से अलग दिखने का प्रयास करेंगे। हम चाहते हैं कि उत्तराखंड की संस्कृति एवं परंपराओं का देश-दुनिया में प्रसार हो, उत्तराखंड की बोली-भाषाएं समृद्ध हों और उन्हें स्वतंत्र पहचान मिले, यहां आध्यात्मिक पर्यटन एवं तीर्थाटन का विकास हो …और सबसे अहम बात यह कि इस सब में हमारी भी कुछ न कुछ भागीदारी अवश्य रहे। साथ ही एक विनम्र आग्रह भी है कि अपने कीमती सुझावों से समय-समय पर अवगत कराते रहें। ताकि सुधार की प्रक्रिया निरंतर गतिमान रहे। अंत में सिर्फ इतना ही कहना है कि हम एक-दूसरे पर भरोसा बनाये रखें। यही भरोसा समाज में संवाद की बुनियाद मजबूत करने का आधार बनेगा। इन्हीं शब्दों के साथ आइये! कामना करें कि- ‘सबके हृदय में सर्वदा संवेदना की दाह हो, हमको तुम्हारी चाह हो, तुमको हमारी चाह हो। -संपादक

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button