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दून पुस्तकालय में हुआ हिंदी सिनेमा पर सचित्र व्याख्यान का आयोजन 

Illustrated lecture on Hindi cinema organised at Doon Library

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दून पुस्तकालय में हुआ हिंदी सिनेमा पर सचित्र व्याख्यान का आयोजन

पार्थ चटर्जी ने किया 1950 के दशक से लेकर 1970 तक के दशक में हिंदी सिनेमा के भावनात्मक व समाजशास्त्रीय विकास का विश्लेषण

देहरादून, 7 अप्रैल, 2026: फिल्म विशेषज्ञ पार्थ चटर्जी की ओर से दून पुस्तकालय एवं शोध केन्द्र में आयोजित सचित्र व्याख्यान कार्यक्रम में 1950 के दशक से लेकर 1970 तक के दशक में हिंदी सिनेमा की स्थिति का मूल्यांकन किया गया। इस मौके पर हिंदी सिनेमा के सौंदर्यशास्त्र और समाजशास्त्रीय परिदृश्य पर भी चर्चा हुई।

पार्थ ने इन 20 वर्षों में हिंदी सिनेमा के भावनात्मक व समाजशास्त्रीय विकास का विश्लेषण किया। कहा कि इस कालखंड के सिनेमा में बिमल रॉय, गुरु दत्त, कमाल अमरोही, किदार शर्मा और राज कपूर जैसे निर्देशकों के दृष्टिकोण से उस समय की चिंताओं को अभिव्यक्ति दी गई है। यह फिल्में महिलाओं की भूमिका पर भी विशेष रूप से प्रकाश डालती हैं। उन्होंने हिंदी सिनेमा का सौंदर्यशास्त्र व समाजशास्त्रीय परिदृश्य, चिंताएं, भावनात्मक रेखांकन और निर्देशकों की दृष्टि व अभिनेत्रियों की भूमिका को साझा करने के साथ ही कई निर्देशकों का दृष्टिकोण भी प्रस्तुत किया। साथ ही बिमल रॉय, गुरु दत्त, कमाल अमरोही, किदार शर्मा व राज कपूर के साथ ही नरगिस, मीना कुमारी, गीता बाली, नूतन, बीना राय, वैजयंतीमाला, निम्मी व वहीदा रहमान जैसी हस्तियों से जुड़ी कई महत्वपूर्ण जानकारी श्रोताओं को दीं। श्रोताओं ने मुक्तकंठ से सचित्र व्याख्यान माला की सराहना की।

उन्होंने यह भी बताया कि उस दौर में प्रमुख कलाकारों के रूप में मान्यता प्राप्त होने के बावजूद कई कलाकारों को उचित भुगतान नहीं मिलता था। इस दौरान श्रोताओं ने उनसे सवाल-जबाब भी किए। कार्यक्रम में  दून पुस्तकालय के कार्यक्रम अधिकारी चन्द्रशेखर तिवारी सहित संजय शुक्ला, एलन सीली, नादिर बिल्मोरिया, प्रकाश नागिया, डॉ.मनोज पंजानी, अरुण असफल, अपर्णा वर्धन, वीके डोभाल, राजीव राजदान, आलोक सरीन, बीएस रावत, कुलभूषण नैथानी, हिमांशु आहूजा, सुंदर सिंह बिष्ट, मदन सिंह, राकेश कुमार, विजय यादव आदि मौजूद रहे।

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