उत्तराखंडडरभालू का आतंकशासन

पूरी नींद नहीं ले पाने से आक्रामक हो रहे भालू 

Bears are becoming aggressive due to lack of sleep

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पूरी नींद नहीं ले पाने से आक्रामक हो रहे भालू

भूख भी हो रही इस आक्रामकता को बढ़ाने में सहायक

देहरादून, 24 नवंबर 2025 : उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में इन दिनों भालुओं की आक्रामकता तेजी से बढ़ी है, जिसने ग्रामीणों के साथ-साथ शासन-प्रशासन को भी चिंता में डाल दिया है। मामला इतना गंभीर हो चुका है कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी स्वयं उच्चाधिकारियों के साथ लगातार बैठक कर स्थिति की समीक्षा कर रहे हैं। हालांकि, हालात दिन-ब-दिन बिगड़ते जा रहे हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार इस वर्ष कम बर्फबारी और बदलते मौसम ने भालुओं की प्राकृतिक शीतनिद्रा (हाइबरनेशन) के चक्र को बाधित किया है। वाइल्डलाइफ़ इंस्टीट्यूट ऑफ़ इंडिया के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. एस. सत्यकुमार बताते हैं कि हाइबरनेशन अवधि घटने के कारण भालू सामान्य से अधिक समय तक सक्रिय हैं, जिससे वे भूख और चिड़चिड़ेपन के चलते मानव बस्तियों की ओर अधिक आकर्षित हो रहे हैं।

जंगलों में प्राकृतिक आहार की कमी भी समस्या को और बढ़ा रही है। भोजन की तलाश में भालू खेतों, गोशालाओं और कचरे के ढेरों में पहुंच रहे हैं। रुद्रप्रयाग, चमोली, टिहरी और पिथौरागढ़ जिले इस संकट के मुख्य केंद्र बने हुए हैं, जहां पिछले कुछ महीनों में भालू हमलों की घटनाएं लगातार बढ़ी हैं। इन घटनाओं में कई लोग घायल हुए हैं और मवेशियों का भी भारी नुकसान हुआ है।

वैज्ञानिकों का मानना है कि बढ़ते शहरीकरण और गांवों में फैलते कचरे ने इंसानी इलाकों को भालुओं के लिए आसान भोजन का स्रोत बना दिया है। यही मानव-वन्यजीव संघर्ष को खतरनाक स्तर तक ले आया है।

स्थिति पर नियंत्रण को लेकर सरकार ने वन विभाग को संवेदनशील क्षेत्रों में विशेष निगरानी बढ़ाने, त्वरित प्रतिक्रिया दल तैनात करने और कचरा प्रबंधन को कड़ाई से लागू करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही जंगलों में जंगली बेर, ओक आदि खाद्य वनस्पतियों के संरक्षण और संवर्धन पर भी जोर दिया जा रहा है, ताकि भालुओं को प्राकृतिक भोजन उपलब्ध हो सके।

 कैमरा ट्रैप, गश्त और ड्रोन निगरानी तेज

मानव-वन्यजीव संघर्ष को रोकने के लिए वन विभाग ने निगरानी तंत्र को और मजबूत किया है। संवेदनशील क्षेत्रों में कैमरा ट्रैप लगाए जा रहे हैं और रात-दिन गश्त बढ़ाई गई है। पिंजरों और ड्रोन की मदद से भालुओं को सुरक्षित रूप से जंगल में लौटाने की कोशिश की जा रही है।
विभाग ने ग्रामीणों से अपील की है कि अकेले जंगल न जाएँ और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की तुरंत सूचना संबंधित अधिकारियों को दें।

Global Ganga News

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