उत्तराखंडऑफबीटजागरूकताप्रेरणाबाल मनोविज्ञानमनोरंजनशिक्षा

बच्चों के लिए सिलाई और पुराने वस्त्रों के उपयोग पर कार्यशाला

Workshop on sewing and using old clothes for children

खबर को सुनें


बच्चों के लिए सिलाई और पुराने वस्त्रों के उपयोग पर कार्यशाला

दून पुस्तकालय एवं रिसर्च सेंटर के बाल विभाग की ओर से आयोजित की गई यह कार्यशाला, बच्चों में दिखा जबर्दस्त उत्साह

देहरादून, 24 जनवरी 2026: पुराने कपड़ों और कपड़े के टुकड़ों को फेंकने के बजाय उपयोगी एवं रचनात्मक वस्तुओं में बदला जा सकता है। इनसे थैले, बुक कवर, सजावटी एवं उपहार सामग्री जैसी वस्तुएं बनाई जा सकती हैं। यह जानकारी शनिवार को दून पुस्तकालय एवं रिसर्च सेंटर के बाल विभाग की ओर से सिलाई एवं पुराने वस्त्रों के उपयोग पर आधारित कार्यशाला में बच्चों को दी गई।

कार्यशाला का संचालन करते हुए दून सिटिज़न्स फोरम (DCF) की सुश्री मौसुमी भट्टाचार्य ने बच्चों को सिलाई की मूलभूत तकनीकें, जैसे- रनिंग स्टिच, हेम स्टिच और बटन सिलना सिखाया। साथ ही रोज़मर्रा के जीवन में इन कौशलों के महत्व पर प्रकाश डाला। बच्चों ने पूरे उत्साह के साथ गतिविधियों में भाग लिया और स्वयं हाथ से सिलाई कर अनुभव प्राप्त किया। कार्यक्रम में विभिन्न स्कूलों और एनजीओ से कुल 13 बच्चों ने भाग लिया, जिनमें राफेल राइडर चेशायर स्कूल के बच्चे भी शामिल थे। इस समूह में छह लड़के और सात लड़कियां शामिल थीं।

कार्यक्रम में लड़कों की सक्रिय भागीदारी विशेष रूप से सराहनीय रही, क्योंकि सिलाई जैसे कौशल को अक्सर लैंगिक दृष्टि से देखा जाता है। इस पहल के माध्यम से इस धारणा को बदलने का प्रयास किया गया। कार्यक्रम में दून पुस्तकालय के बाल विभाग से सुश्री मेघा एन. विल्सन, आईआईआरएस से संदीप गुप्ता, प्रसुम गुप्ता आदि उपस्थित रहे।

Global Ganga News

साथियों, Globalganga.com के मंच पर आपका स्वागत करते हुए हम स्वयं को गौरवान्वित महसूस कर रहे हैं। यह ऐसा मौका है, जब हम भी वेब पोर्टल की भीड़ में शामिल होने जा रहे हैं, इस संकल्प के साथ कि भीड़ का हिस्सा होते हुए भी हमेशा भीड़ से अलग दिखने का प्रयास करेंगे। हम चाहते हैं कि उत्तराखंड की संस्कृति एवं परंपराओं का देश-दुनिया में प्रसार हो, उत्तराखंड की बोली-भाषाएं समृद्ध हों और उन्हें स्वतंत्र पहचान मिले, यहां आध्यात्मिक पर्यटन एवं तीर्थाटन का विकास हो …और सबसे अहम बात यह कि इस सब में हमारी भी कुछ न कुछ भागीदारी अवश्य रहे। साथ ही एक विनम्र आग्रह भी है कि अपने कीमती सुझावों से समय-समय पर अवगत कराते रहें। ताकि सुधार की प्रक्रिया निरंतर गतिमान रहे। अंत में सिर्फ इतना ही कहना है कि हम एक-दूसरे पर भरोसा बनाये रखें। यही भरोसा समाज में संवाद की बुनियाद मजबूत करने का आधार बनेगा। इन्हीं शब्दों के साथ आइये! कामना करें कि- ‘सबके हृदय में सर्वदा संवेदना की दाह हो, हमको तुम्हारी चाह हो, तुमको हमारी चाह हो। -संपादक

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button