जीपीएस ट्रेकिंग की मदद से खोजा गया प्राचीन कल्प केदार मंदिर। खीरगंगा नदी में सैलाब में बह गया मंदिर का ऊपरी ढांचा। मलबे में दबा हुआ है मंदिर का गर्भगृह। कल्प केदार मंदिर से ही है धराली की पहचान।
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देहरादून, 30 अगस्त 2025.
धराली आपदा के दौरान खीरगंगा नदी के सैलाब में लोप हुए बाबा कल्प केदार वर्तमान में कहां और किस रूप में हैं, इसका पता लग गया है। ऐसा संभव हो पाया मोबाइल जीपीएस ट्रेकिंग की बदौलत। श्री कल्प केदार मंदिर समिति की ओर से इस स्थान को चिह्नित कर पत्थरों के ढेर के बीच यहां बाकायदा हनुमान ध्वजा स्थापित की गई है। साथ ही केंद्र से 20 मीटर के दायरे में बैरिकेड टेप भी लगाया गया है, ताकि निकट भविष्य में यहां सुरक्षित ढंग से मंदिर को मलबे के अंदर से निकालने का कार्य किया जा सके।
हिमालय के चारधाम में द्वितीय गंगोत्री धाम के प्रमुख पड़ाव धराली की पहचान भगवान शिव के प्राचीन मंदिर कल्प केदार से ही थी, जो पांच अगस्त 2025 को खीरगंगा के सैलाब में समा गया था। कहा तो यह भी जा रहा है कि सैलाब मंदिर के ऊपरी ढांचे को बहा ले गया। अब सिर्फ मंदिर का गर्भगृह बचा है, जो कि जमीन से करीब सात मीटर नीचे है और मलबे में दबा हुआ है। खीरगंगा और भागीरथी नदी के संगम के पास स्थिति इस पूरे क्षेत्र में आपदा के बाद इतना मलबा पसरा हुआ है कि मंदिर कहां था, इसका ठीक-ठीक अंदाज नहीं हो पा रहा था। इसलिए 21 अगस्त को पूर्वाह्न 11 बजे के आसपास श्री कल्प केदार मंदिर समिति के अध्यक्ष राजेश पंवार, सचिव संजय पंवार, संयोजक दुर्गेश पंवार, सहसचिव संतोष पंवार, सदस्य सचेंद्र पंवार आदि ने जीपीएस ट्रेकिंग की मदद से उस स्थान को तलाशने में सफ़लता हासिल की, जहां मंदिर मौजूद था।
समिति के अध्यक्ष राजेश पंवार बताते हैं कि मंदिर का गर्भगृह सतह से सात मीटर नीचे है। इसलिए पूरी उम्मीद कि उसे कोई नकसान नहीं पहुंचा होगा और वहां मौजूद शिवलिंग सुरक्षित होगा। कहा कि जब भी यहां भारी
मशीनें संचालन की स्थिति में होंगी, तब मंदिर के गर्भगृह तक खुदाई कर उसे मलबे से निकाला जाएगा। बता दें कि धराली में गंगोत्री हाईवे से 50 मीटर की दूरी पर स्थित कल्प केदार मंदिर को जलमग्न शिवलिंग के रूप में भी जाना जाता था। यहां गर्भगृह में विराजमान शिवलिंग हमेशा जल में डूब रहता था। चारधाम यात्रा के दौरान गंगोत्री धाम के दर्शन को आने वाले तीर्थयात्री धराली में रुककर भगवान कल्प केदार के दर्शन करना नहीं भूलते थे।
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-संपादक