
देहरादून, 24 अक्टूबर 2025 : गुरुवार को उत्तरांचल प्रेस क्लब में आयोजित साहित्यिक संध्या में वरिष्ठ पत्रकार और शायर दर्द गढ़वाली के गजल संग्रह ‘उजाले बांटते रहना’ का लोकार्पण किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रख्यात शायर इकबाल आजर ने की, जबकि मुख्य अतिथि के रूप में विजय कुमार ‘द्रोणी’, नवीन नीर, भूपेंद्र कंडारी, डॉ. अतुल शर्मा, सुनील साहिल, राजकुमार राज और अन्य साहित्यकार उपस्थित रहे
कार्यक्रम की शुरुआत गीतकार सत्यप्रकाश शर्मा ‘सत्य’ द्वारा मां सरस्वती की वंदना से हुई। गजल संग्रह की समीक्षा करते हुए सुनील साहिल ने कहा कि दर्द गढ़वाली की शायरी में जीवन संघर्ष, भाईचारा, देशभक्ति, सामाजिक सरोकार और आम आदमी की पीड़ा सभी रंग मौजूद हैं। डॉ. अतुल शर्मा ने कहा कि उनकी ग़ज़लें समसामयिकता और सामाजिक व्यंग्य से परिपूर्ण हैं, जो पाठकों के दिल को छूती हैं।
इकबाल आजर ने कहा कि दर्द गढ़वाली की रचनाओं में समाज की सच्चाइयों का प्रतिबिंब झलकता है। इस मौके पर लेखक ने अपनी गजलों ‘अपनी दुल्हन सजा रहा हूं मैं’ और ‘अब कबूतर उड़ा रहा हूं मैं’ का पाठ किया, जिन्हें श्रोताओं ने खूब सराहा।



