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‘नादान’ की नादानियों से हार गया कैंसर

Cancer lost to the foolishness of 'Nadan'

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‘नादान’ की नादानियों से हार गया कैंसर

रजनी चंदर, 01 अक्टूबर 2025:

शास्त्र और आधुनिक विज्ञान भी मानता है स्त्री में दुर्गा की सभी सिद्धियां विद्यमान हैं। इन्हीं शक्तियों के सदुपयोग से वह एक बेटी, बहन, पत्नी, बहू, सहेली जैसे विभिन्न आयामों पर खरा उतरकर स्वयं को सृजन की शक्ति के रूप में स्थापित करती है। आज ऐसी ही एक शक्तिस्वरूपा के जीवन में आए असाध्य एवं भय पैदा करने वाले कैंसर को हंसते-हंसाते विदा करने की कहानी को पढ़ने का मौका मिला।

डॉ रामेश्वरी नादान की यह कहानी अपने आप मे एक ऐसा दस्तावेज है, जो बताता है कि कैसे उन्होंने कैंसर रूपी अनचाहे मेहमान को परास्त किया, इसलिये उन्होंने इसे नाम दिया ‘अनचाहा मेहमान कैंसर’। देखा जाए तो यह सिर्फ एक पुस्तक नहीं, बल्कि दुनिया की सभी महिलाओं के लिए सनातन मोटिवेशन है।

‘नादान’ की कहानी, उन्हीं की जुबानी

‘कैंसर एक अनचाहा मेहमान है, जो बिना हमारी इजाजत के हमारे शरीर में आकर बैठ जाता है। अब आया है तो कुछ देर ठहरेगा ही। फिर भारतीय परंपरा तो ‘अतिथि देवो भवः’ की परंपरा है, इसलिए हम उसे तुरंत तो भगा नहीं सकते। सो, खातिरदारी तो करनी ही पड़ेगी और सही आहार विहार व निदान से हम उसे विदा कर सकते हैं। यह मेरी नादानी भी नहीं है। मैं जानती हैं कि यह यमराज से लड़ने का घातक संघर्ष है। आसान नहीं होता कैंसर डिटेक्ट होने पर खुद और परिवार को संभालना। लेकिन, मैं जीवटता के साथ कैंसर को हराकर वापस लौटी हूं और संयोग से हर नारी के लिए सदैव प्रेरणारूपी दस्तावेज की रचना भी कर डाली।’

संयम और सकारात्मक सोच से कर सकते हैं हर परिस्थिति का मुकाबला

Holistic Mind wellness Coach, Grand Master and NLP Counselor गणेश काला कहते हैं, लाइफ कोच एवं लेखक होने के नाते मैं यही कह सकता हूं परिस्थितियां अगर अनुकूल न हों तो पूरे संयम और सकारात्मक सोच से आप जरूर बाहर निकल जाएंगे। नादानी यानी बचपना सदैव साथ रखें जीवन की हर चुनौती को हरा सकते हैं। डॉ रामेश्वरी नादान के इस मोटिवेशनल संग्रह को उन महिलाओं को जरूर पढ़ना चाहिए जो छोटी समस्या को ताड़ बनाकर अपनी दैविक शक्तियों का ह्रास करतीं रहतीं हैं।

Global Ganga News

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