शारदीय नवरात्र
आ गईं संयम, ध्यान और पूजा की नौ रातें
Nine nights of restraint, meditation and worship have arrived.

आ गईं संयम, ध्यान और पूजा की नौ रातें
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शारीरिक, बौद्धिक और आध्यात्मिक, सभी स्तरों पर अपना प्रभाव छोड़ते हैं व्रत
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व्रत का वास्तविक एवं आध्यात्मिक अभिप्राय है ईश्वर की निकटता प्राप्त करना
रजनी चंदर, देहरादून, 20 सितंबर 2025
ऋतु परिवर्तन हमारे शरीर में छिपे हुए विकारों एवं ग्रंथि विषों को उभार देता है। ऐसे समय में व्रत रखकर इन विकारों को बाहर निकाल देना न केवल अधिक सुविधाजनक होता है, बल्कि जरूरी एवं लाभकारी भी। हमारे ऋषि-मुनियों ने इसीलिए ऋतुओं के संधिकाल में व्रत रखने का विधान किया। इसमें भी नवरात्र के दौरान रखे गए व्रत वर्ष के अन्य अवसरों पर किए जाने वाले व्रतों से अधिक महत्वपूर्ण माने गए हैं। कारण, नवरात्र व्रत के दौरान संयम, ध्यान और पूजा की त्रिवेणी बहा करती है। सो, यह व्रत शारीरिक, बौद्धिक और आध्यात्मिक, सभी स्तरों पर अपना प्रभाव छोड़ते हैं।
देखा जाए तो व्रत का वास्तविक एवं आध्यात्मिक अभिप्राय ईश्वर की निकटता प्राप्त कर जीवन में रोग एवं थकावट का अंत कर अंग-प्रत्यंग में नया उत्साह भरना और मन की शिथिलता एवं कमजोरी को दूर करना है। श्री रामचरितमानस में राम को शक्ति, आनंद एवं ज्ञान का प्रतीक और रावण को मोह यानी अंधकार का प्रतीक माना गया है। नवरात्र व्रतों की सफल समाप्ति के बाद व्रती के जीवन में मोह आदि दुर्गुणों का विनाश होकर उसे शक्ति, आनंद एवं ज्ञान की प्राप्ति हो, ऐसी अपेक्षा की जाती है।
शरीर के नवद्वारों की साधना
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अमावस्या की रात से अष्टमी तक या पड़वा से नवमी की दोपहर तक व्रत नियम चलने से नौ रात यानी नवरात्र नाम सार्थक है। चूंकि यहां रात गिनते हैं, इसलिए इसे नवरात्र कहा जाता है। रूपक के माध्यम से हमारे शरीर को नौ मुख्य द्वारों वाला कहा गया है और इसके भीतर निवास करने वाली जीवनी शक्ति का नाम ही दुर्गा है। इन मुख्य इंद्रियों में अनुशासन, स्वच्छता, तारतम्य स्थापित करने के प्रतीक रूप में, शरीर तंत्र को पूरे साल के लिए सुचारू रूप से क्रियाशील रखने के लिए नवद्वारों की शुद्धि का पर्व नौ दिन मनाया जाता है। इनको व्यक्तिगत रूप से महत्व देने के लिए नौ दिन नौ दुर्गाओं को समर्पित किए गए हैं।

शारदीय नवरात्र की तिथियां
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22 सितंबर : घटस्थापना, चंद्रदर्शन, मां शैलपुत्री पूजन
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(घटस्थापना सुबह 05:34 बजे से सुबह 07:29 बजे तक। अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:14 बजे से दोपहर 12:02 बजे तक।)
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23 सितंबर : मां ब्रह्मचारिणी पूजन
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24 सितंबर : मां चंद्रघंटा पूजन
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26 सितंबर : मां कुष्मांडा पूजन
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27 सितंबर : मां स्कंदमाता पूजन
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28 सितंबर : मां सरस्वती आवाहन, मां कात्यायनी पूजन
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29 सितंबर : मां सरस्वती व मां कालरात्रि पूजन
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30 सितंबर : मां महागौरी पूजन
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01 अक्टूबर : मां सिद्धिदात्री पूजन
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02 अक्टूबर : मां दुर्गा विसर्जन, विजयदशमी
विजयदशमी पर्व के मुहूर्त
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दशमी तिथि शुरू : 01 अक्टूबर, बुधवार शाम 7:02 बजे
दशमी तिथि समाप्त : 02 अक्टूबर, गुरुवार शाम 07:11 बजे
अपराजिता पूजन : 02 अक्टूबर, गुरुवार
आयुध पूजन : 02 अक्टूबर
रावण दहन : प्रदोष काल में शाम 6:30 बजे से रात 8:30 बजे तक





