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बहुत कठिन है डगर नंदा पथ की, हर कदम पर जोखिम ही जोखिम

The path of Nanda Path is very difficult.

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बहुत कठिन है डगर नंदा पथ की, हर कदम पर जोखिम ही जोखिम

  • नासूर बने दरकते पहाडों ने बढ़ाई अगले साल होने वाली नंदा राजजात की चुनोतियां 

  • 77 किमी लंबे थराली-देवाल–वाण स्टेट हाईवे की हालत जर्जर, कई जगह उभरे भूस्‍खलन जोन

  • इस मार्ग पर स्थित हैं राजजात के चेपड़यूं, नंदकेसरी, फाल्दिया, मुंदोली और वाण जैसे पड़ाव

देवाल (चमोली), 5 अक्‍टूबर 2025 : हिमालय के महाकुंभ नंदा राजजात को भव्‍य स्‍वरूप देने के लिए सरकार ने तैयारियों शुरू कर दी हैं। अगले साल होने वाली एशिया की इस सबसे लंबी पैदल यात्रा में देश और विदेश से हजारों श्रद्धालुओं और पर्यटकों के शामिल होने की उम्‍मीद है। राजजात में अब एक वर्ष से भी कम का समय शेष रह गया है, लेकिन आपदा के बाद इस पथ की चुनौतियां भी बढ गई हैं। विशेषकर थराली से देवाल और वाण को जोडने वाले 77 किलोमीटर लंबे स्‍टेट हाईवे पर जगह-जगह भूस्‍खलन जोन सक्रिय हो गए हैं। मार्ग की हालत भी खासी जर्जर बनी हुई है। ग्रामीण सीएम पोर्टल पर भी इस बारे में बता चुके हैं।

दरअसल, नंदा राजजात का शुभारंभ चमोली में कर्णप्रयाग के पास नौटी गांव से होता है और उच्‍च हिमालय में स्थित होमकुंड में समापन के बाद यात्रा सुतोल होते हुए वापस नौटी पहुंचती है। करीब 280 किमी लंबी इस यात्रा में 20 पडाव पडते हैं। इनमें से पांच महत्‍वपूर्ण पडाव चेपडयूं, नंदकेसरी, फाल्दिया, मुंदोली और वाण, थराली से वाण तक जाने वाले मार्ग पर ही  हैं। वाण यात्रा की राह में अंतिम गांव है। इसके बाद निर्जन पडाव शुरू हो जाते हैं। ऐसे में इस मार्ग की अहमियत समझी जा सकती है।

 

लोहाजंग के रहने वाले सुरेंद्र कहते हैं कि इस मार्ग पर जान हथेली पर रखकर सफर करना पड रहा है। दरकते पहाड कब जानलेवा साबित हो जाएं कहा नहीं जा सकता। वह कहते हैं कि सरकार को जल्‍द से जल्‍द इस मार्ग को दुरुस्‍त कर भूस्‍खलन जोन का ट्रीटमेंट करना चाहिए। यदि समय पर ट्रीटमेंट न हुआ तो अगली बरसात में यहां जोखिम कहीं ज्‍यादा बढ जाएगा। वह बताते हैं कि ग्रामीण सीएम पोर्टल पर भी इसके लिए गुहार लगा चुके हैं। लोहाजंग में ही एडवेंचर टूर आपरेटर बख्‍तावर सिंह राणा भी सुरेंद्र की चिंता से सहमत हैं। वह कहते हैं कि देखा जाए तो सरकार के पास तैयारियों के लिए महज छह माह का ही समय है। इसी अवधि में रोड को भी दुरुस्‍त करना होगा। यह यहां के गांवों के लोगों की ही नहीं, देश विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं की सुरक्षा का भी सवााल है।

एक दर्जन गांवों के लिए मुसीबत का सफर

पिछले माह दो सितंबर को हुई भारी बारिश के कारण देवाल-लोहाजंग-वाण मार्ग पर गमलीगाड के पास भारी भूस्‍खलन हुआ। इसके बाद कई दिनों तक ग्रामसभा देवाल के अलावा तलोली, बनास, वाण, कौंर, मल्ला, बगवाला, तुपा, धुरापाक, कोटिया, बांख जैसे गांव अलग-थलग पड गए। हालांकि अब किसी तरह यहां पर रास्‍ता आने जाने लायक तो बना दिया गया है, लेकिन यह पहाड बेहद संवदेनशील हो चुका है। यहां पर बार-बार मलबा आने से आवाजाही बाधित हो रही है। लोक निर्माण विभाग की ओर से यहां पर जेसीबी मशीन तैनात की गई है जो मलबा हटाने का काम कर रही है।  देवाल से वाण तक की सडक पर सफर पूरी तरह से जोखिम भरा है। जगह-जगह सडक उधडी हुई है और पहाडों से फूट रहे झरने सीधे सडक से होते हुए घाटी में जा रहे हैं। इन स्‍थानों पर हालत और भी खराब है। कई स्‍थानों पर लैंड स्‍लाइड जोन मुसाफिरों की परीक्षा ले र‍हे हैं।

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