पर्यटन
उत्तराखंडी लोक को आलोकित करेगा फूलों का उत्सव
The festival of flowers will illuminate the Uttarakhand folk

उत्तराखंडी लोक को आलोकित करेगा फूलों का उत्सव
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मार्च-अप्रैल और अक्टूबर में बुरांश फ्लावर वीक और पद्म फ्लावर वीक का आयोजन करेगा उत्तराखंड
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हिमालयी पारिस्थितिकी और लोकसंस्कृति को नए आयाम देने के लिए आयोजित किये जा रहे ये उत्सव
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उत्तराखंड वन विभाग के अनुसंधान प्रकोष्ठ ने उठाया है इस गुरुत्तर आयोजन का बीड़ा
रजनी चंदर, देहरादून,14 सितंबर 2025
दक्षिण कोरिया और जापान समेत कई देशों में हर साल मार्च आखिर से अप्रैल शुरुआत तक पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए चेरी ब्लॉसम फेस्टिवल उत्सव मनाया जाता है। सो, अब उत्तराखंड भी इसी तर्ज पर एक अनूठी पहल करने जा रहा है। इसके तहत उत्तराखंड वन विभाग के अनुसंधान प्रकोष्ठ ने राज्य में हिमालयी पारिस्थितिकी और लोकसंस्कृति को नए आयाम देने के लिए बुरांश फ्लावर वीक और पद्म फ्लावर वीक आयोजित करने का निर्णय लिया है। बुरांश फ्लावर वीक का आयोजन अप्रैल प्रथम सप्ताह और पद्म फ्लावर वीक का अक्टूबर के दूसरे सप्ताह में किया जाएगा।

देश-दुनिया से आने वाले पर्यटक अब उत्तराखंड की वादियों में बर्फ, झील, झरने व नदियों की खूबसूरती निहारने के साथ फूलों की महक भी करीब से महसूस कर सकते हैं। यहां राज्य वृक्ष बुरांश (रोडोडेंड्रोन अरबोरियम) और पद्म (पइंया) के फूलों से सजी उत्तराखंड की वादियां पर्यटकों को अलौकिकता का एहसास कराती हैं। बुरांश वसंत ऋतु में अपनी सुर्ख व गुलाबी पंखुड़ियों से पहाड़ों को रंग देता है, वहीं पद्म साल में दो बार अक्टूबर और मार्च-अप्रैल में फूलों की रंगत बिखेरता है। मुख्य वन संरक्षक संजीव चतुर्वेदी बताते हैं कि इन दोनों फूलों की खूबसूरती और पारिस्थितिक महत्ता को देखते हुए ही वन विभाग की अनुसंधान शाखा ने इनके संरक्षण को यह विशिष्ट पहल की है। मुख्य वन संरक्षक संजीव चतुर्वेदी बताते हैं कि बुरांश फ्लावर वीक का आयोजन अप्रैल प्रथम सप्ताह और पद्म फ्लावर वीक का आयोजन अक्टूबर के दूसरे सप्ताह में किया जाएगा। इस दौरान होने वाले कार्यक्रमों की विस्तृत रूपरेखा तैयार की जाएगी।
पारिस्थितिकी की जान बुरांश और पद्म
बुरांश और पद्म सिर्फ आकर्षक पुष्प ही नहीं, हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण हैं। बुरांश के फूलों से तैयार शरबत औषधीय गुणों से भरपूर होता है। पद्म के फूल और पत्तियां धार्मिक अनुष्ठानों में काम आती हैं। दोनों ही पेड़ परिंदों, तितलियों और मधुमक्खियों के लिए प्राकृतिक आवास उपलब्ध कराते हैं।
जागरूकता, मनोरंजन और ज्ञानवर्धन
मुख्य वन संरक्षक संजीव चतुर्वेदी बताते हैं कि महोत्सव के दौरान लोगों को सतत दोहन, पौधारोपण और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों पर भी जागरूक किया जाएगा। महोत्सव में स्थानीय समुदाय, स्कूली छात्र, शोधकर्ता, पर्यावरणविद् और पर्यटक सबकी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी। विद्यालयों में प्रतियोगिताएं, लोकनृत्य व सांस्कृतिक कार्यक्रम, औषधीय ज्ञान पर कार्यशालाएं और फूलों से बने उत्पादों की प्रदर्शनी भी आयोजित होंगी।

पर्यटन के साथ आजीविका को भी बढ़ावा
यह महोत्सव न केवल राज्य की जैवविविधता को संरक्षित करेगा, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था में भी नई जान फूंकेगा। बुरांश के शरबत, वाइन, जैम, अचार जैसे उत्पादों को बढ़ावा मिलेगा। पद्म फूलों से जुड़ी हर्बल औषधियों का भी बाजार विकसित होगा।
जलवायु परिवर्तन पर नई पहल
बुरांश व पद्म फ्लॉवर वीक के दौरान वैज्ञानिकों की टीम बुरांश और पद्म के फूलने के पैटर्न पर अध्ययन करेंगी, ताकि जलवायु परिवर्तन के प्रभावों का आकलन किया जा सके। इससे न केवल बुरांश व पद्म के संरक्षण के प्रयासों को मजबूती मिलेगी, बल्कि भविष्य में ईको-टूरिज्म प्लानिंग की राह भी आसान होगी।
बेतहाशा दोहन से संकट में बुरांश
उत्तराखंड में बुरांश पर जलवायु परिवर्तन के साथ ही बेतहाशा दोहन के कारण संकट मंडरा रहा है। ऐसे में यह न केवल समय से पहले खिल रहा है, बल्कि इसकी गुणवत्ता भी घट रही है। प्राकृतिक उत्पादों के कम होने से औषधीय और वाणिज्यिक उपयोग पर भी खतरा है।





