
शुरू हुई उत्तरकाशी में पहले हैम रेडियो स्टेशन की टेस्टिंग
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भारत स्काउट गाइड ने स्मार्ट कंट्रोल रूम में स्थापित किया हैम रेडियो स्टेशन, आपातकाल के दौरान स्टेशन से सूचनाओं के आदान-प्रदान में होगा सहायक
देहरादून: उत्तरकाशी के पहले हैम रेडियो स्टेशन के लिए भारत स्काउट गाइड की ओर से टेस्टिंग शुरू कर दी गयी है। धराली आपदा के दौरान परंपरागत दूरसंचार सेवाओं के ठप होने से उपजी समस्याओं के बीच हैम रेडियो के महत्व को देखते हुए स्मार्ट कंट्रोल रूम में इसका स्टेशन बनाया गया है। गंगाघाटी में सोनगाड व तिहार के आसपास इसके रिपीटर स्थापित करने की योजना है।
उत्तरकाशी में हैम रेडियो लाइसेंसधारी ओंकार बहुगुणा व शिक्षक मंगल सिंह पंवार के अनुसार आपदा के दौरान जब पारंपरिक नेटवर्क, यथा- मोबाइल, लैंडलाइन आदि ध्वस्त हो जाए, तब सूचनाओं का आदान-प्रदान न होने से आपदा के कारण कटे क्षेत्र के बारे में जानकारी नही मिल पाती। ऐसे में हैम रेडियो स्टेशन के जरिये कुछ खास रेडियो तरंगों का उपयोग कर बातचीत की जा सकती है। असल में हैम रेडियो एक विश्वसनीय और स्थिर संचार माध्यम है। वर्ष 2001 में भुज में आए भूकंप, वर्ष 2004 में आई सुनामी और वर्ष 2013 में केदारनाथ आपदा में यह तकनीक जीवन रक्षक साबित हुई थी। अफसोस कि उत्तरकाशी में अब तक इस पर गंभीरता से काम नहीं हुआ।
खैर! धराली आपदा के बाद भारत स्काउट गाइड ने स्मार्ट कंट्रोल रूम में इसकी स्थापना की है। जहां स्काउट गाइड से जुड़े शिक्षक एवं हैम रेडियो लाइसेंसधारी मंगल सिंह पंवार इसकी टेस्टिंग में जुटे हुए हैं। रविवार को उनकी टीम टकनौर पट्टी में इसके रिपीटर स्थापित करने के लिए भी रवाना हुई थी। उधर, जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी शार्दुल सिंह गुसाईं का कहना है कि हैम रेडियो स्टेशन स्थापित होता है तो निश्चित रूप से आपातकाल में यह सूचनाओं के आदान-प्रदान में सहायक सिद्ध होगा।
हैम रेडियो स्टेशनों से सीधे राज्य व राष्ट्रीय स्तर के आपदा नियंत्रण केंद्रों से संपर्क किया जा सकता है। पर्वतीय क्षेत्रों में भौगोलिक कठिनाइयों और बार-बार आने वाली आपदाओं को देखते हुए हैम रेडियो नेटवर्क न केवल तकनीकी, बल्कि जन सुरक्षा की दृष्टि से भी अनिवार्य है।
यह होता है हैम रेडियो
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यह व्यक्तिगत एवं गैर-व्यावसायिक रेडियो संचार प्रणाली है, जिसे शौकिया रेडियो भी कहा जाता है। इसमें रेडियो तरंगों का उपयोग करके लोगों को एक-दूसरे से बात करने की अनुमति मिलती है। इससे बिना इंटरनेट और दूरसंचार कनेक्शन के दुनिया भर में या अंतरिक्ष में भी संचार हो सकता है। हैम रेडियो लाइसेंसधारी मंगल सिंह पंवार के अनुसार, इसमें तीन तरह की फ्रीक्वेंसी (वेरी हाई, अल्ट्रा हाई व हाई) होती हैं। हैम रेडियो में एक बेस सेट होता
है, जिसमें वाकी-टाकी जैसे यंत्र बातचीत के लिए होते हैं।




