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आर्ट गैलरी नजर आने लगे सरकारी दफ्तर, कबाड़ से हो रही कमाई

Government offices started looking like art galleries

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आर्ट गैलरी नजर आने लगे सरकारी दफ्तर, कबाड़ से हो रही कमाई

10,503 मीट्रिक टन स्क्रैप हटाकर 55.91 करोड़ रुपये की कमाई
12.18 लाख वर्ग फुट दफ्तर क्षेत्र की सफाई कर बनाया गया आकर्षक
नेताजी की सात फीट ऊंची मूर्ति और गोल्डन डियर बनी स्क्रैप से
जन शिकायतों का शत प्रतिशत समाधान और सोशल मीडिया पर रिकॉर्ड कवरेज
आगामी दो अक्टूबर से विशेष अभियान 5.0 की शुरुआत
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नई दिल्ली, 9 सितंबर 2025 : कभी जिन सरकारी दफ्तरों को देखकर माथा पीटने का मन करता था, अब वही दफ्तर आर्ट गैलरी जैसे नजर आ रहे हैं। इन दफ्तरों के धूलभरे कोनों में नेताजी की प्रतिमा लगी है, तो लॉबी में स्क्रैप से बने हिरण ध्‍यान खींच रहे हैं। वहीं, अनुपयोगी पड़ी जगह न केवल बागवानी के काम आ रही है, बल्कि वहां टेबल टेनिस कोर्ट भी सजा है। यह सब संभव हो पायाबकेंद्र सरकार के विशेष अभियान 4.0 की बदौलत। सरकारी सोच में यह नया रंग कोयला मंत्रालय ने भरा है, जिसने पूरे अभियान में सबसे शानदार प्रदर्शन किया।
सफाई, स्क्रैप और स्मार्ट उपयोग : आंकड़ों की कहानी
नवंबर 2024 से अगस्त 2025 के दौरान: 10,503 मीट्रिक टन स्क्रैप हटाया गया, जिससे ₹55.918 करोड़ कमाए गये। 12.18 लाख वर्गफीट क्षेत्र को किया गया।
रिक्त और पुनः उपयोग योग्य। अब इन स्‍थानों पर अब बागवानी, चौड़े मार्ग, वेटिंग एरिया, पार्किंग और खेल स्थल बनाए गए हैं।
कबाड़ से क्रिएटिविटी : नेताजी से लेकर AI डस्टबिन तक इन जगह नजर आते हैं।
अभियान 4.0 में दिखा इनोवेशन का शानदार चेहरा:
बीसीसीएल, धनबाद में स्क्रैप से बनी सात फीट ऊंची नेताजी सुभाष चंद्र बोस की मूर्ति
सीएमपीडीआई ने कबाड़ से बनाए गोल्डन डियर और फॉन – एकदम आर्ट गैलरी स्टाइल
कोल इंडिया ने लगाए AI-सक्षम स्मार्ट डस्टबिन, जो खुद तय करते हैं कौन सा कचरा कहां जाए
पुरानी बेकार जगहों को टेबल टेनिस कोर्ट में बदला गया – कार्यस्थल में फिटनेस और फ्रेशनेस दोनों
रिकॉर्ड तोड़ कामकाज और जन शिकायतों का समाधान
71,632 फाइलों की समीक्षा, 69,227 का पूर्ण समाधान
जन शिकायतें और पीएम कार्यालय के सभी संदर्भ शत प्रतिशत हल किए गए
सोशल मीडिया पर 2163 ट्वीट्स, 1137 प्रेस विज्ञप्तियां, और 61 PIB बयान
अब बारी विशेष अभियान 5.0 की:  अब सरकार की तैयारी है अगले चरण की – विशेष अभियान 5.0, जो दो से 31 अक्टूबर 2025 तक चलेगा।

इस बार फोकस रहेगा:
ई-कचरे (E-waste) का सही और टिकाऊ निपटान। कार्यस्थलों का और अधिक व्यवस्थित और पर्यावरण के अनुकूल बनाना। 26 अगस्त और चार सितंबर को हुई
बैठकों में कोयला मंत्रालय ने अपने सभी उपक्रमों के साथ तैयारी पूरी कर ली है। अब सरकारी दफ्तर सिर्फ काम की जगह नहीं, एक सोच का प्रतीक बन रहे हैं, जहां फाइलों के ढेर की जगह फुहारों की हरियाली और जंग लगे सामान की जगह कलात्मकता दिखती है।

Global Ganga News

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