उत्तराखंड पत्रकार यूनियन की जसपुर इकाई में उठी यह मांग। पत्रकारों को मिले तहसील स्तर पर मान्यता। साथ ही उमके लिए आर्थिक सहायता की व्यवस्था हो सुनिश्चित।
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जसपुर (ऊधम सिंह नगर), 29 अगस्त 2025.
उत्तराखंड पत्रकार यूनियन ने मुख्यमंत्री के समक्ष पत्रकारों के हित में एक ठोस नीति बनाये जाने के मांग रखेगी। इसमें पत्रकारों को तहसील स्तर पर मान्यता देने और आर्थिक सहायता की व्यवस्था सुनिश्चित करने पर जोर रहेगा। यूनियन का मानना है कि यदि सरकार पत्रकारों को लेकर गंभीर है तो उसे निचले स्तर तक काम करने वाले पत्रकारों की समस्याओं पर विशेष रूप से ध्यान देना चाहिए।
उत्तराखंड पत्रकार यूनियन की जसपुर इकाई की यहां आयोजित बैठक में यह निर्णय लिए गए। इस दौरान पत्रकारों के अधिकार, सुरक्षा और सुविधाओं को लेकर विस्तार से चर्चा की गई। मुख्य मुद्दा तहसील स्तर पर पत्रकारों को मान्यता दिलाने और उन्हें आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने का रहा। प्रदेश अध्यक्ष आशीष ध्यानी ने कहा कि यूनियन का लक्ष्य केवल संगठन को मजबूत करना ही नहीं, बल्कि पत्रकारों के हक और सम्मान की रक्षा करना भी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यूनियन किसी भी पत्रकार के साथ हो रहे अन्याय या उत्पीड़न को बर्दाश्त नहीं करेगी। उन्होंने सभी पत्रकारों से आपसी मतभेद भुलाकर एक मंच पर आने और एकजुट रहने की अपील भी की।
बैठक में कहा गया कि पत्रकार लोकतंत्र की रीढ़ जरूर हैं, लेकिन आए दिन उन्हें अपमान, अभद्रता और उत्पीड़न का सामना करना पड़ रहा है। ऐसी घटनाओं की कड़ी निंदा करते हुए यूनियन ने एकजुट होकर उनका विरोध करने का संकल्प लिया।
इस मौके पर प्रदेश महामंत्री हरीश जोशी, वरिष्ठ उपाध्यक्ष तिलक राज व किरण शर्मा, जिलामंत्री विनोद कुमार, सुशील चौहान, महेंद्र राही, हसीब सिद्दीकी, कुलदीप सिंह, तौफीक अहमद, यूसुफ मंसूरी, सावित्री देवी, चित्रा भटनागर व प्रकाश पुंज समेत बड़ी संख्या में पत्रकार मौजूद रहे। संचालन आलम रज़ा ने किया।
इससे पूर्व, स्थानीय इकाई की ओर से सभी पदाधिकारियों का फूल मालाओं से स्वागत किया गया।
साथियों,
Globalganga.com के मंच पर आपका स्वागत करते हुए हम स्वयं को गौरवान्वित महसूस कर रहे हैं। यह ऐसा मौका है, जब हम भी वेब पोर्टल की भीड़ में शामिल होने जा रहे हैं, इस संकल्प के साथ कि भीड़ का हिस्सा होते हुए भी हमेशा भीड़ से अलग दिखने का प्रयास करेंगे। हम चाहते हैं कि उत्तराखंड की संस्कृति एवं परंपराओं का देश-दुनिया में प्रसार हो, उत्तराखंड की बोली-भाषाएं समृद्ध हों और उन्हें स्वतंत्र पहचान मिले, यहां आध्यात्मिक पर्यटन एवं तीर्थाटन का विकास हो …और सबसे अहम बात यह कि इस सब में हमारी भी कुछ न कुछ भागीदारी अवश्य रहे। साथ ही एक विनम्र आग्रह भी है कि अपने कीमती सुझावों से समय-समय पर अवगत कराते रहें। ताकि सुधार की प्रक्रिया निरंतर गतिमान रहे।
अंत में सिर्फ इतना ही कहना है कि हम एक-दूसरे पर भरोसा बनाये रखें। यही भरोसा समाज में संवाद की बुनियाद मजबूत करने का आधार बनेगा। इन्हीं शब्दों के साथ आइये! कामना करें कि- ‘सबके हृदय में सर्वदा संवेदना की दाह हो, हमको तुम्हारी चाह हो, तुमको हमारी चाह हो।
-संपादक