
देहरादून, 3 अक्टूबर: राजधानी देहरादून में एक और बड़े चिटफंड घोटाले का पर्दाफाश हुआ है। दून समृद्धि निधि लिमिटेड/सर्व माइक्रोफाइनेंस इंडिया एसोसिएशन नाम से चल रही कंपनी ने निवेशकों को ऊंचा ब्याज और एजेंटों को मोटे मुनाफे का लालच देकर करोड़ों रुपये हड़प लिए। समय पूरा होने पर रकम लौटाने की बजाय कंपनी के जिम्मेदारों ने टालमटोल शुरू कर दी। शिकायतों के बाद नेहरू कॉलोनी थाना पुलिस ने कंपनी की डायरेक्टर और फाउंडर मेंबर समेत छह आरोपितों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है।
ऐसे बुना जाल
बाईपास पुलिस चौकी प्रभारी प्रवीण पुंडीर की ओर से दर्ज कराए गए मुकदमे के अनुसार, वर्ष 2022 में दून यूनिवर्सिटी रोड पर कंपनी का दफ्तर खोला गया। डायरेक्टर नीलम चौहान और फाउंडर मेंबर जगमोहन सिंह चौहान ने मिलकर कंपनी का संचालन शुरू किया। जगमोहन खुद कार्यालय में बैठकर लोगों को अधिक ब्याज का लालच देता और आरडी, एफडी व डीडीएस योजनाओं में निवेश करवाता।
एजेंट बने हथियार
जगमोहन ने अपने साथियों को अलग-अलग पद देकर निवेशकों को जोड़ने का काम सौंपा
- कमलेश बिजल्वाण (जोनल हेड)
- कुसुम शर्मा (ब्रांच हेड)
- अनिल रावत (एडमिन मैनेजर)
- दीपिका (कैशियर)
इनके साथ कई एजेंट भी जुड़े थे, जो स्थानीय लोगों को योजनाओं का झांसा देकर खाते खुलवाते थे। निवेशकों से अधिकतर रकम नकद में ली जाती और उन्हें फर्जी बांड थमा दिया जाता।
लौटाई नहीं गई रकम
योजनाओं के तहत अवधि पूरी होने पर निवेशकों को मूलधन के साथ ब्याज लौटाने का वादा किया गया था। शुरुआत में कुछ लोगों को भुगतान किया भी गया, लेकिन धीरे-धीरे रकम लौटाना बंद कर दिया गया। अब हजारों-लाखों रुपये फंसे होने से निवेशक परेशान हैं।
पुलिस की कार्रवाई
आरोपितों नीलम चौहान, जगमोहन सिंह चौहान, कमलेश बिजल्वाण, कुसुम शर्मा, अनिल रावत, दीपिका सहित कई एजेंटों पर धोखाधड़ी और ठगी का मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस के अनुसार, मामले की गहन जांच जारी है।



