राष्ट्रीय

77 राष्ट्रीय राजमार्गों पर 1,083 ‘हाई फैटैलिटी जोन’, जहां हादसों में होती है सर्वाधिक मौत

1,083 'High Fatality Zones' on 77 national highways

खबर को सुनें


77 राष्ट्रीय राजमार्गों पर 1,083 ‘हाई फैटैलिटी जोन’, जहां हादसों में होती है सर्वाधिक मौत

नई दिल्‍ली , 7 सितंबर 2025 : हर साल, भारत में लाखों लोग सड़क हादसों का शिकार होते हैं, और इनमें से हजारों अपनी जान गंवा देते हैं। केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय की 2023 की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में साल 2022 में 4.61 लाख से अधिक सड़क दुर्घटनाएं हुईं, जिनमें 1.68 लाख लोगों की मौत हुई और करीब 4 लाख लोग गंभीर रूप से घायल हुए। ये आंकड़े सिर्फ नंबर नहीं हैं, बल्कि ये कई परिवारों की जिंदगी को हमेशा के लिए बदल देते हैं। इसी को ध्‍यान मे रख हादसें को कम करने के लिए भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने एक बड़ा कदम उठाया है। सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों को रोकने के लिए एनएचएआई ने दिल्ली में एक खास ट्रेनिंग प्रोग्राम का आयोजन किया। इस प्रोग्राम में देश भर के सड़क सुरक्षा अधिकारी और ऑडिटर शामिल हुए। इसका मुख्य उद्देश्य सड़क सुरक्षा से जुड़ी चुनौतियों का समाधान खोजना और नई तकनीकों का इस्तेमाल करना था।
इस कार्यक्रम के दौरान ‘सेव लाइफ फाउंडेशन’ के सहयोग से कई महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की गई। इसमें एक खास बात थी ड्रोन-आधारित एआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) और एमएल (मशीन लर्निंग) तकनीक का इस्तेमाल। इस तकनीक से यह पता लगाया जाएगा कि किन जगहों पर हादसे ज्यादा होते हैं और उनके पीछे की वजह क्या है।
ड्रोन करेगा हादसों की वजह का पता
एनएचएआई का नया ‘ड्रोन एनालिटिक्स मॉनिटरिंग सिस्टम’ (DAMS) हादसों वाली जगहों की डिटेल रिपोर्ट तैयार करेगा। इसके बाद उन जगहों पर सुरक्षा के उपाय किए जाएंगे, जिससे भविष्य में वहां कोई दुर्घटना न हो। यह सिस्टम न सिर्फ हादसों की पहचान करेगा, बल्कि उनकी निगरानी भी करेगा।
‘जीरो डेथ’ का महत्वाकांक्षी लक्ष्य
एनएचएआई के सदस्य विशाल चौहान ने बताया कि उनका लक्ष्य राष्ट्रीय राजमार्गों पर ‘जीरो डेथ’ यानी ‘शून्य मृत्यु दर’ हासिल करना है। उन्होंने कहा कि इसके लिए इंजीनियरिंग, लोगों के व्यवहार और वाहनों की बनावट में सुधार पर ध्यान देना जरूरी है।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि श्री के.एन. श्रीवास्तव ने भी इस पहल की सराहना की और कहा कि आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल करके ही सड़क हादसों को कम किया जा सकता है। उन्होंने यह भी बताया कि 2030 तक सड़क हादसों में होने वाली मौतों को 50% तक कम करने का लक्ष्य रखा गया है।
हादसे वाले जगहों की पहचान
सरकार ने देश भर में 77 राष्ट्रीय राजमार्गों पर 1,083 ऐसे ‘हाई फैटैलिटी जोन’ (High Fatality Zones) यानी ज्यादा मौतों वाले क्षेत्रों की पहचान की है। एनएचएआई इन जगहों पर सुरक्षा से जुड़े उपाय कर रहा है, ताकि लोगों की यात्रा सुरक्षित बन सके।

Global Ganga News

साथियों, Globalganga.com के मंच पर आपका स्वागत करते हुए हम स्वयं को गौरवान्वित महसूस कर रहे हैं। यह ऐसा मौका है, जब हम भी वेब पोर्टल की भीड़ में शामिल होने जा रहे हैं, इस संकल्प के साथ कि भीड़ का हिस्सा होते हुए भी हमेशा भीड़ से अलग दिखने का प्रयास करेंगे। हम चाहते हैं कि उत्तराखंड की संस्कृति एवं परंपराओं का देश-दुनिया में प्रसार हो, उत्तराखंड की बोली-भाषाएं समृद्ध हों और उन्हें स्वतंत्र पहचान मिले, यहां आध्यात्मिक पर्यटन एवं तीर्थाटन का विकास हो …और सबसे अहम बात यह कि इस सब में हमारी भी कुछ न कुछ भागीदारी अवश्य रहे। साथ ही एक विनम्र आग्रह भी है कि अपने कीमती सुझावों से समय-समय पर अवगत कराते रहें। ताकि सुधार की प्रक्रिया निरंतर गतिमान रहे। अंत में सिर्फ इतना ही कहना है कि हम एक-दूसरे पर भरोसा बनाये रखें। यही भरोसा समाज में संवाद की बुनियाद मजबूत करने का आधार बनेगा। इन्हीं शब्दों के साथ आइये! कामना करें कि- ‘सबके हृदय में सर्वदा संवेदना की दाह हो, हमको तुम्हारी चाह हो, तुमको हमारी चाह हो। -संपादक

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button