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भारत में पहली बार देखी दर्शकों ने फ़िल्म ‘मैरिज कॉप्स’

For the first time in India, audiences saw the film 'Marriage Cops'

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भारत में पहली बार देखी दर्शकों ने फ़िल्म ‘मैरिज कॉप्स’

शाश्वती तालुकदार और शेरिल हेस हैं इस फिल्म के निर्माता-निर्देशक, दून पुस्तकालय एवं शोध केंद्र के सभागार में हुआ इसका प्रदर्शन

देहरादून, 4 फरवरी, 2026। दून पुस्तकालय एवं शोध केंद्र के सभागार में मंगलवार शाम प्यार, कानून और वैवाहिक समस्याओं को सुलझाने वाले पुलिस अधिकारियों पर बनी शानदार डॉक्यूमेंट्री फ़िल्म ‘मैरिज कॉप्स’ का प्रदर्शन हुआ। फ़िल्म का निर्माण एवं निर्देशन शाश्वती तालुकदार और चेरिल हेस ने किया है। भारत में फ़िल्म का यह पहला प्रदर्शन था। मैरिज कॉप्स एक शानदार फीचर डॉक्यूमेंट्री है। यह फिल्म देहरादून महिला हेल्पलाइन की एक अनोखी झलक दिखाती है, जहाँ शादी में सुलह और कानून प्रवर्तन सबसे अप्रत्याशित तरीकों से मिलते हैं।

80 मिनट  की अवधि में यह हिंदी फिल्म सब-इंस्पेक्टर संध्या और कृष्णा की कहानी बताती है, जो दो समर्पित अधिकारी हैं और जिनके काम करने का तरीका बहुत अलग है। दोनों बहुत ही समझदार हैं और अपने काम में माहिर हैं। वे ऐसेे रिश्तों में शांति बनाए रखने की पूरी कोशिश करते हैं, जिनके ठीक होने यानी पटरी पर आने की संभावना नजर नहीं आती। गाली देने वाले पति, लापरवाह पिता, धोखा देने वाली पत्नियाँ और दखल देनी वाली सास इन रिश्तों के मुख्य कारक होते हैं।

‘मैरिज कॉप्स’ का वर्ल्ड प्रीमियर टोरंटो में प्रतिष्ठित हॉट डॉक्स कैनेडियन इंटरनेशनल डॉक्यूमेंट्री फेस्टिवल में हुआ था। इसके बाद बीते वर्ष डॉकफेस्ट म्यूनिख (जर्मनी) में यूरोपियन प्रीमियर, डॉक एज ऑकलैंड (न्यूजीलैंड) में ऑस्ट्रोएशिया प्रीमियर, गॉलवे फिल्म फ्लीध आयरलैंड, वैंकुवर इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल, रियो डी जनेरियो इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल, वॉच डॉक, वारसा पोलैंड और इस वर्ष FIPA डॉक, बियारिट्ज़, फ्रांस बिग स्काई डॉक्यूमेंट्री फेस्टिवल, USA प्रीमियर, डॉक एज सिंगापुर एशियन प्रीमियर में इसे प्रदर्शित किया जा चुका है।

इस फिल्म की सह-निर्देशक एवं संपादक शाश्वती तालुकदार का जन्म देहरादून में हुआ है। मैरिज कॉप्स उनकी दूसरी डॉक्यूमेंट्री फीचर फिल्म है। उन्होंने अपने प्रोफेशनल करियर की शुरुआत न्यूयॉर्क शहर में माइकल मूर के लिए असिस्टेंट एडिटर के तौर पर की और बाद में HBO, BBC, Lifetime, Sundance और Cablevision के प्रोजेक्ट्स पर काम किया। उनकी फिल्में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दिखाई गई हैं, जिनमें बुसान इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल, हेलसिंकी में कियास्मा म्यूजियम ऑफ आर्ट और व्हिटनी बिएनियल शामिल हैं।

उनके काम को बुसान में एशियन सिनेमा फंड, जेरोम फाउंडेशन, न्यूयॉर्क स्टेट काउंसिल ऑन द आर्ट्स, ट्रिबेका फाउंडेशन और इंडिया फाउंडेशन ऑफ द आर्ट्स सहित कई संस्थानों से समर्थन मिला है। शाश्वती को सेंटर फॉर एशियन अमेरिकन मीडिया से जेम्स यी मेंटरशिप अवार्ड और IFP (गॉथम) न्यूयॉर्क से प्रोजेक्ट इन्वॉल्व फेलोशिप से सम्मानित किया गया है। उनके पास टेम्पल यूनिवर्सिटी, फिलाडेल्फिया से फिल्म और वीडियो आर्ट्स में MFA और जामिया मिलिया इस्लामिया नई दिल्ली से मास कम्युनिकेशंस में MA की डिग्री है।

कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि पूर्व पुलिस अधिकारी एवं साहित्यकार अनिल रतूड़ी, पुलिस अधिकारी एवं लेखक अमित श्रीवास्तव, मुख्य सूचना आयुक्त राधा रतूड़ी, निकोलस हॉफलैण्ड, चन्द्रशेखर तिवारी, कर्नल वीके दुग्गल, हिमांशु आहूजा, विनोद समलानी, डॉ.डीके पाण्डे, सुंदर बिष्ट, जगदीश महर, देवेन्द्र कांडपाल, वृतचित्र में शामिल सब-इंस्पेक्टर कृष्णा जयाड़ा, संध्या, मुकुल शर्मा व महिला हेल्पलाइन के कांस्टेबल सहित सिने प्रेमी,  साहित्यकार, लेखक, युवा, छात्र आदि उपस्थित रहे।

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