उत्तराखंडडरभालू का आतंक

अब केमिकल के छिड़काव से भागेगा भालू

Now the bear will run away after spraying chemicals

खबर को सुनें


अब केमिकल के छिड़काव से भागेगा भालू

चमोली जिले के भालू प्रभावित क्षेत्रों में किया जा रहा केमिकल का वितरण, दावा है कि इसके छिड़काव से आबादी से दूर रहेगा भालू

गोपेश्वर, 15 दिसंबर 2025: उत्तराखंड का पर्वतीय जिले गुलदार के साथ भालू के आतंक से भी बुरी तरह त्रस्त हैं। भालू तो अब शहरी क्षेत्रों में भी लोगों के लिए संकट का कारण बन गया है। इसी को देखते हुए चमोली जिला पंचायत ने जनपद के विभिन्न क्षेत्रों में केमिकल युक्त रसायन स्प्रे का छिड़काव शुरू किया है। दावा है कि इससे भालू को आबादी से दूर रखने में मदद मिलेगी।

इस अभियान के प्रथम चरण की शुरुआत जिला पंचायत अध्यक्ष दौलत सिंह बिष्ट ने सोमवार 15 दिसंबर को नंदानगर के बैरासकुंड से की। सबसे पहले स्प्रे मशीन समेत केमिकल युक्त रसायन छिड़काव के लिए खुनाणा, नौना बनाला, सेमा, बैरासकुंड, कांडई, चाका मोठा व खलतरा के ग्राम प्रधान को सौंपे गए। इसके बाद आवश्यकता पड़ने पर अन्य क्षेत्रों में भी रसायन व स्प्रे मशीन वितरण किया जाएगा। दावा किया गया है कि इस केमिकल के छिड़काव से भालू गांव के आसपास नहीं फटकेगा। इसकी गंध उसे जंगल में भागने के लिए मजबूर कर देगी।

उधर, विकास भवन में मुख्य विकास अधिकारी डा. अभिषेक त्रिपाठी ने ग्रामीण क्षेत्रों में जंगली जानवरों से फसलों एवं मानव जीवन की सुरक्षा के उद्देश्य से प्रायोगिक तौर पर ‘डेंजर’ नामक दवाई ग्रामीणों को उपलब्ध कराई। यह दवाई विशेष रूप से भालू, जंगली सूअर सहित अन्य वन्यजीवों की रोकथाम में सहायक है। इस दवाई का प्रयोग ग्रामीणों दी ओर से जंगली जानवरों के प्रवेश स्थलों और उनके आवागमन वाले क्षेत्रों में किया जाएगा। ताकि फसल क्षति और मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं में कमी लाई जा सके।

Global Ganga News

साथियों, Globalganga.com के मंच पर आपका स्वागत करते हुए हम स्वयं को गौरवान्वित महसूस कर रहे हैं। यह ऐसा मौका है, जब हम भी वेब पोर्टल की भीड़ में शामिल होने जा रहे हैं, इस संकल्प के साथ कि भीड़ का हिस्सा होते हुए भी हमेशा भीड़ से अलग दिखने का प्रयास करेंगे। हम चाहते हैं कि उत्तराखंड की संस्कृति एवं परंपराओं का देश-दुनिया में प्रसार हो, उत्तराखंड की बोली-भाषाएं समृद्ध हों और उन्हें स्वतंत्र पहचान मिले, यहां आध्यात्मिक पर्यटन एवं तीर्थाटन का विकास हो …और सबसे अहम बात यह कि इस सब में हमारी भी कुछ न कुछ भागीदारी अवश्य रहे। साथ ही एक विनम्र आग्रह भी है कि अपने कीमती सुझावों से समय-समय पर अवगत कराते रहें। ताकि सुधार की प्रक्रिया निरंतर गतिमान रहे। अंत में सिर्फ इतना ही कहना है कि हम एक-दूसरे पर भरोसा बनाये रखें। यही भरोसा समाज में संवाद की बुनियाद मजबूत करने का आधार बनेगा। इन्हीं शब्दों के साथ आइये! कामना करें कि- ‘सबके हृदय में सर्वदा संवेदना की दाह हो, हमको तुम्हारी चाह हो, तुमको हमारी चाह हो। -संपादक

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button