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लो जी! यातायात नियमों का पाठ पढ़ाने गांधीगीरी पर उतरी पुलिस

Behold! The police resort to Gandhigiri to teach traffic rules

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लो जी! यातायात नियमों का पाठ पढ़ाने गांधीगीरी पर उतरी पुलिस

देहरादून, 25 अक्टूबर 2025 : त्योहारों के मौसम में जब सड़कों पर रफ्तार और भीड़ दोनों बढ़ जाते हैं, तब दून पुलिस ने इस बार सख्ती नहीं, बल्कि संवेदनशीलता को हथियार बनाया। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक देहरादून के निर्देशन में चलाए जा रहे इस विशेष यातायात अभियान ने सड़कों पर अनुशासन का नया संदेश दिया।

“EEE — Education, Engineering और Enforcement” की अवधारणा पर आधारित इस मुहिम में पुलिस ने एक अनोखा तरीका अपनाया — गलतियों पर डंडा नहीं, बल्कि संवाद से सुधार।

गलत लेन में चलने या ज़ेब्रा क्रॉसिंग पार करने वालों को पुलिसकर्मियों ने मुस्कुराते हुए रोका और कहा —

“Sir, जय हिंद, आप ट्रैफिक रूल्स ब्रेक कर रहे हैं, ये अच्छी बात नहीं है। प्लीज़ फॉलो द रूल्स।”

इस तरह की “गांधीगीरी” स्टाइल अपील ने चालकों के चेहरों पर मुस्कान लाई और नियमों के प्रति सम्मान भी बढ़ाया।

मुख्य चौराहों पर लगाए गए बैरिकेड, साइनेज और फ्लेक्सी पोस्टरों ने यातायात प्रवाह को सुचारु रखने में मदद की। वहीं, जो वाहन चालक बार-बार नियम तोड़ते मिले, उन पर मोटर वाहन अधिनियम के तहत कार्रवाई भी की गई।

कई चालकों ने पुलिस के इस सौम्य व्यवहार की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे प्रयासों से नियम पालन की संस्कृति विकसित होती है। त्योहारों के बीच यह पहल साबित करती है कि अनुशासन डर से नहीं, संवेदनशीलता से भी स्थापित हो सकता है।

“कानून का सम्मान तभी स्थायी बनता है, जब उसे प्यार से समझाया जाए।”
— एक ट्रैफिक पुलिस अधिकारी

पुलिसकर्मी सड़क पर “EEE” अभियान का फ्लेक्स लगा रहे हैं।
ज़ेब्रा क्रॉसिंग पर रिक्रूट आरक्षियों की ड्यूटी।
मुस्कुराते हुए वाहन चालक का पुलिस से संवाद।

Global Ganga News

साथियों, Globalganga.com के मंच पर आपका स्वागत करते हुए हम स्वयं को गौरवान्वित महसूस कर रहे हैं। यह ऐसा मौका है, जब हम भी वेब पोर्टल की भीड़ में शामिल होने जा रहे हैं, इस संकल्प के साथ कि भीड़ का हिस्सा होते हुए भी हमेशा भीड़ से अलग दिखने का प्रयास करेंगे। हम चाहते हैं कि उत्तराखंड की संस्कृति एवं परंपराओं का देश-दुनिया में प्रसार हो, उत्तराखंड की बोली-भाषाएं समृद्ध हों और उन्हें स्वतंत्र पहचान मिले, यहां आध्यात्मिक पर्यटन एवं तीर्थाटन का विकास हो …और सबसे अहम बात यह कि इस सब में हमारी भी कुछ न कुछ भागीदारी अवश्य रहे। साथ ही एक विनम्र आग्रह भी है कि अपने कीमती सुझावों से समय-समय पर अवगत कराते रहें। ताकि सुधार की प्रक्रिया निरंतर गतिमान रहे। अंत में सिर्फ इतना ही कहना है कि हम एक-दूसरे पर भरोसा बनाये रखें। यही भरोसा समाज में संवाद की बुनियाद मजबूत करने का आधार बनेगा। इन्हीं शब्दों के साथ आइये! कामना करें कि- ‘सबके हृदय में सर्वदा संवेदना की दाह हो, हमको तुम्हारी चाह हो, तुमको हमारी चाह हो। -संपादक

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