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नौसेना के बेड़े में शामिल होगा समुद्र का नया The new sea पहरेदार ‘आन्द्रोत’

The new sea watchdog 'Androt' will join the Navy's fleet watchdog 'Androt'

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नौसेना के बेड़े में शामिल होगा समुद्र का नया पहरेदार ‘आन्द्रोत’

नई दिल्ली, 24 सितंबर 2025 : भारत की समुद्री सीमाओं की रक्षा के संकल्प को और अधिक मजबूत करते हुए भारतीय नौसेना 06 अक्टूबर 2025 को एक और ऐतिहासिक पल की गवाह बनेगी। इस दिन विशाखापत्तनम नौसेना डॉकयार्ड में अत्याधुनिक पनडुब्बी रोधी युद्धक उथले पानी के जहाज (ASW-SWC) ‘आन्द्रोत’ को नौसेना के बेड़े में औपचारिक रूप से शामिल किया जाएगा।

इस भव्य अवसर पर पूर्वी नौसेना कमान के फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ वाइस एडमिरल राजेश पेंढारकर अध्यक्षता करेंगे। यह देश में बने सोलह ASW-SWC जहाजों की श्रृंखला का दूसरा जहाज है, जो भारत की आत्मनिर्भरता और तकनीकी कौशल का चमकदार प्रतीक है।

स्वदेशी सामर्थ्य का गौरव

कोलकाता के गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (GRSE) लिमिटेड द्वारा निर्मित ‘आन्द्रोत’ 80% से अधिक स्वदेशी तकनीक और उपकरणों से सुसज्जित है। यह ‘आत्मनिर्भर भारत’ की राह में एक बड़ा कदम है और यह संदेश देता है कि भारत अब अपनी समुद्री सुरक्षा के लिए खुद आत्मनिर्भर है।

नाम से जुड़ी विरासत और प्रेरणा

‘आन्द्रोत’ का नाम लक्षद्वीप समूह के आन्द्रोत द्वीप से लिया गया है। यह नाम भारत के विस्तृत समुद्री क्षेत्रों की सुरक्षा और संकल्प का प्रतीक है। इससे पहले आईएनएस आन्द्रोत (P69) ने पूरे 27 वर्षों तक देश की सेवा कर भारत के गौरव को ऊंचा किया था। नया ‘आन्द्रोत’ उस गौरवशाली विरासत को आगे बढ़ाएगा।
 आधुनिक तकनीक से लैस युद्धक जहाज
‘आन्द्रोत’ में उन्नत हथियार, सेंसर सूट, अत्याधुनिक संचार प्रणाली और वॉटरजेट प्रणोदन जैसी क्षमताएं हैं। यह जहाज समुद्र के भीतर छिपे खतरों का पता लगाने, ट्रैक करने और उन्हें नष्ट करने में सक्षम है। साथ ही यह समुद्री निगरानी, खोज एवं बचाव अभियानों और तटीय रक्षा मिशनों को भी सफलतापूर्वक अंजाम देगा।‘आन्द्रोत’ का जलावतरण केवल एक तकनीकी उपलब्धि नहीं, बल्कि यह राष्ट्रभक्ति और अदम्य संकल्प का उद्घोष है। यह भारतीय नौसेना की मजबूती का ऐलान है और यह स्पष्ट करता है कि भारत अपनी समुद्री सीमाओं की रक्षा किसी भी कीमत पर करने को तैयार है।

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