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ग्लेशियरों पर मेहर और जिंदगी पर कहर बरपाकर मानसून ने ली विदाई

Monsoon bids adieu after showering blessings on glaciers and wreaking havoc on life

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ग्लेशियरों पर मेहर और जिंदगी पर कहर बरपाकर मानसून ने ली विदाई

  • इस बार मानसून सीजन में 22 प्रतिशत अधिक हुई बारिश

  • आपदाओं ने ली 260 से अधिक की जान, 100 लोग हैं लापता

देहरादून, 27 सितंबर। उत्तराखंड से मानसून की औपचारिक विदाई हो गई है। शुक्रवार देर शाम मौसम विभाग ने इसकी घोषणा की। इस बार मानसून ने जहां भारी तबाही मचाई, वहीं वैज्ञानिकों के अनुसार ऊंचाई वाले क्षेत्रों में हुई अधिक बर्फबारी ग्लेशियरों के लिए ‘सजीवनी’ साबित होगी और भूजल भंडार को भी रिचार्ज करेगी।
आंकड़ों के अनुसार सामान्यत: मानसून सीजन में 1154 मिमी बारिश दर्ज होती है, जबकि इस बार 1411.8 मिमी वर्षा रिकार्ड की गई, जो सामान्य से 22 प्रतिशत अधिक है। मानसून 20 जून को प्रवेश कर 27 सितंबर तक सक्रिय रहा। जून में 36 फीसदी अधिक, जुलाई में 16 फीसदी कम, अगस्त में 50 फीसदी अधिक और सितंबर में 22 फीसदी ज्यादा वर्षा हुई। सबसे अधिक बारिश बागेश्वर जिले में सामान्य से 241 प्रतिशत अधिक, जबकि पौड़ी जिले में 30 प्रतिशत कम दर्ज की गई।
इस दौरान 16 बादल फटने की घटनाएं हुईं, जिनमें 9 बड़ी रहीं। इनसे 260 से अधिक लोगों की मौत हुई और करीब 100 लोग अभी भी लापता हैं। राज्य सरकार ने 5702 करोड़ रुपये से अधिक की आर्थिक क्षति का अनुमान लगाकर केंद्र से सहयोग मांगा है।
वाडिया इंस्टीट्यूट ऑफ हिमालयन जियोलॉजी के वैज्ञानिक मनीष मेहता के अनुसार, चार हजार मीटर से अधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में अगस्त में एक फीट से ज्यादा बर्फबारी दर्ज हुई है, जो ग्लेशियरों के पोषण का काम करेगी। अतिरिक्त बरसात से ग्राउंडवॉटर भी रिचार्ज होने की संभावना है।
मौसम विज्ञान केंद्र ने बताया कि जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, हिमाचल और उत्तराखंड से मानसून विदा हो चुका है। आने वाले दिनों में प्रदेश में मौसम शुष्क रहने की संभावना है।

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