ऑस्टियोपोरोसिस: धूम्रपान करने और शराब पीने से कमजोर हो रहीं हड्डियां, 40 वर्ष का हर पांचवा व्यक्ति इसका शिकार, ये लक्षण दिखें तो हो जाएं सावधान

देहरादून, 22 अक्टूबर 2025: आधुनिक जीवनशैली और असंतुलित खानपान ने आज न केवल युवाओं बल्कि बुजुर्गों की हड्डियों को भी कमजोर करना शुरू कर दिया है। चिकित्सकों के अनुसार, तेजी से बढ़ रहा ऑस्टियोपोरोसिस (Osteoporosis) ऐसा मौन रोग है, जो बिना किसी स्पष्ट लक्षण के हड्डियों को अंदर से खोखला कर देता है।

विशेषज्ञ बताते हैं कि, “आज 40 वर्ष की उम्र के बाद लगभग हर तीसरी महिला और हर पांचवा पुरुष हड्डियों की कमजोरी की समस्या से जूझ रहा है। यह स्थिति भविष्य में गंभीर फ्रैक्चर का कारण बन सकती है।”
क्यों होता है ऑस्टियोपोरोसिस
विशेषज्ञ बताते हैं कि उम्र बढ़ने के साथ शरीर में हड्डियों का घनत्व (Bone Density) कम होने लगता है। महिलाओं में रजोनिवृत्ति (Menopause) के बाद हार्मोन एस्ट्रोजन की कमी से हड्डियां और अधिक नाजुक हो जाती हैं। वहीं, पुरुषों में धूम्रपान, शराब सेवन, व्यायाम की कमी और कैल्शियम-विटामिन D की अनुपूरकता न होना प्रमुख कारण हैं।
ये हैं लक्षण
ऑस्टियोपोरोसिस के शुरुआती दौर में आमतौर पर कोई स्पष्ट लक्षण नहीं दिखता। धीरे-धीरे पीठ या कमर में दर्द, कद में कमी, झुकाव या कूबड़ जैसा आकार और मामूली चोट पर हड्डी टूटने जैसी समस्याएं सामने आने लगती हैं। कई बार मरीज को हड्डी टूटने के बाद ही इसका पता चलता है।
ऐसे होती है जांच
रोग की पुष्टि के लिए Bone Mineral Density (BMD) या DEXA Scan सबसे प्रभावी जांच मानी जाती है। यह टेस्ट बताता है कि आपकी हड्डियां कितनी मजबूत या कमजोर हैं। डॉक्टर सलाह देते हैं कि 40 वर्ष की उम्र के बाद हर व्यक्ति को नियमित रूप से यह जांच करानी चाहिए।
उपचार और बचाव
ऑस्टियोपोरोसिस का इलाज लंबे समय तक चलने वाला होता है। कैल्शियम और विटामिन D की पर्याप्त मात्रा, हड्डियों को मजबूत करने वाली दवाओं और नियमित व्यायाम से स्थिति पर नियंत्रण पाया जा सकता है। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि जीवनशैली में सुधार ही सबसे बेहतर बचाव है। नियमित सूर्यस्नान, दूध, दही, पनीर, मछली, हरी सब्जियों का सेवन और रोजाना कम से कम 30 मिनट की वॉक या योगाभ्यास हड्डियों को लंबे समय तक मजबूत बनाए रख सकते हैं।
महिलाएं रहें विशेष सतर्क
रजोनिवृत्ति के बाद महिलाओं में ऑस्टियोपोरोसिस का खतरा अधिक रहता है। ऐसे में हार्मोनल असंतुलन को संतुलित रखने के लिए डॉक्टर की सलाह से हार्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी (HRT) भी अपनाई जा सकती है।
21 अक्टूबर को ऑस्टियोपोरोसिस-डे
ऑस्टियोपोरोसिस को अक्सर सामान्य कमजोरी समझ कर नजरअंदाज कर दिया जाता है, जबकि यही लापरवाही भविष्य में बड़ी हड्डी टूटने की घटनाओं का कारण बनती है। समय रहते जांच और सही जीवनशैली अपनाकर इस “मौन शत्रु” से बचाव संभव है। इसके प्रति जागरूक करने के लिए हर वर्ष 21 अक्टूबर को ऑस्टियोपोरोसिस-डे मनाया जाता है।



