उत्तराखंडचारधाम यात्रातीर्थाटनराष्ट्रीय

अब 26 किमी घट जाएगी गंगोत्री-यमुनोत्री के बीच की दूरी

Now the distance between Gangotri and Yamunotri will be reduced by 26 km

खबर को सुनें


अब 26 किमी घट जाएगी गंगोत्री और यमुनोत्री के बीच की दूरी

उत्तरकाशी जिले के सिलक्यारा मेंबबनकर तैयार हो चुकी है प्रदेश की सबसे बड़ी सड़क सुरंग

उत्तरकाशी, 3 नवंबर 2025 : उत्तराखंड के रजत जयंती वर्ष में प्रदेश को एक ऐतिहासिक सौगात मिली है। उत्तरकाशी जिले के सिलक्यारा में प्रदेश की सबसे बड़ी सुरंग बनकर तैयार हो चुकी है। लगभग 1384 करोड़ रुपये की लागत से बनी इस साढ़े चार किलोमीटर लंबी डबल लेन सुरंग से जल्द ही यातायात शुरू हो जाएगा। इस सुरंग के चालू होने से गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के बीच की दूरी करीब 26 किलोमीटर घट जाएगी।

वर्तमान में यमुनोत्री से गंगोत्री की दूरी लगभग 227 किलोमीटर है, जिसमें आठ से दस घंटे का समय लगता है। सुरंग के शुरू होने से यह दूरी घटकर 201 किलोमीटर रह जाएगी और सफर में डेढ़ घंटे का समय बचेगा।

सिल्कयारा सुरंग का निर्माण राष्ट्रीय राजमार्ग एवं अवसंरचना विकास निगम लिमिटेड (एनएचआईडीसीएल) की देखरेख में चारधाम ऑल वेदर रोड परियोजना के तहत किया गया है।

सात वर्ष में पूरी हुई परियोजना
सुरंग निर्माण कार्य जुलाई 2018 में शुरू हुआ था। मार्च 2022 तक निर्माण पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन जटिल भौगोलिक परिस्थितियों और कोविड महामारी के कारण परियोजना पूरी होने में सात वर्ष लग गए।

धंसने की घटना बनी सीख
सिल्कयारा सुरंग की राह चुनौतियों से भरी रही। 12 नवंबर 2023 को सुरंग धंसने की घटना में 41 श्रमिक अंदर फंस गए थे। 17 दिन तक चले देश के सबसे कठिन बचाव अभियान के बाद सभी को सुरक्षित बाहर निकाला गया। इस हादसे ने निर्माण सुरक्षा मानकों को लेकर नए सबक दिए और अब सुरंग को पूरी सुरक्षा मानकों के साथ पूरा किया गया है।

Global Ganga News

साथियों, Globalganga.com के मंच पर आपका स्वागत करते हुए हम स्वयं को गौरवान्वित महसूस कर रहे हैं। यह ऐसा मौका है, जब हम भी वेब पोर्टल की भीड़ में शामिल होने जा रहे हैं, इस संकल्प के साथ कि भीड़ का हिस्सा होते हुए भी हमेशा भीड़ से अलग दिखने का प्रयास करेंगे। हम चाहते हैं कि उत्तराखंड की संस्कृति एवं परंपराओं का देश-दुनिया में प्रसार हो, उत्तराखंड की बोली-भाषाएं समृद्ध हों और उन्हें स्वतंत्र पहचान मिले, यहां आध्यात्मिक पर्यटन एवं तीर्थाटन का विकास हो …और सबसे अहम बात यह कि इस सब में हमारी भी कुछ न कुछ भागीदारी अवश्य रहे। साथ ही एक विनम्र आग्रह भी है कि अपने कीमती सुझावों से समय-समय पर अवगत कराते रहें। ताकि सुधार की प्रक्रिया निरंतर गतिमान रहे। अंत में सिर्फ इतना ही कहना है कि हम एक-दूसरे पर भरोसा बनाये रखें। यही भरोसा समाज में संवाद की बुनियाद मजबूत करने का आधार बनेगा। इन्हीं शब्दों के साथ आइये! कामना करें कि- ‘सबके हृदय में सर्वदा संवेदना की दाह हो, हमको तुम्हारी चाह हो, तुमको हमारी चाह हो। -संपादक

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button